7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 इतिहास 21

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यह कहानी एक राजा के बारे में है जो एक बहुत अच्छे पिता का बेटा था। यहोशापात एक भला राजा था, जो परमेश्वर से डरता था। जब वह मरा, तो उसका सबसे बड़ा बेटा यहोराम राजा बना।

यहोशापात ने अपने सब बेटों से प्यार किया था। उसने उन्हें चाँदी, सोना, कीमती चीज़ें और मज़बूत नगर दिए। पर राज्य उसने यहोराम को दिया, क्योंकि वह सबसे बड़ा था।

अब यहाँ कुछ भयानक होता है। जैसे ही यहोराम को शक्ति मिली, उसने अपने सब भाइयों को तलवार से मार डाला। अपने सगे भाइयों को! और साथ में इस्राएल के कुछ हाकिमों को भी। वह डरता था कि कहीं वे उसका सिंहासन न ले लें।

यहोराम ने अहाब के घराने की एक स्त्री से विवाह किया था। अहाब उत्तर में इस्राएल का सबसे बुरा राजा था, जो मूरतों की पूजा करता था। उसकी पत्नी के प्रभाव से यहोराम भी उसी रास्ते पर चलने लगा। उसने यहूदा के पहाड़ों पर ऊँचे स्थान बनाए, जहाँ लोग झूठे देवताओं की पूजा करते थे।

फिर एक दिन यहोराम के पास एक पत्र आया। यह पत्र एलिय्याह नबी की ओर से था। पत्र में लिखा था कि परमेश्वर ने देखा है कि यहोराम ने क्या किया। उसने अपने पिता का रास्ता छोड़ा, अपने भाइयों को मारा, और लोगों को परमेश्वर से दूर किया। इसलिए एक भारी मार आएगी, और वह खुद एक भयानक बीमारी से मरेगा।

और ऐसा ही हुआ। पलिश्ती और अरबी लोग यहूदा पर चढ़ आए। वे राजभवन की सम्पत्ति, यहोराम के बेटों और स्त्रियों को उठा ले गए। सिर्फ सबसे छोटा बेटा यहोआहाज बच गया। फिर यहोराम खुद एक भयानक अंतड़ियों की बीमारी से बीमार पड़ गया, दो साल तक तड़पता रहा, और मर गया।

जब वह मरा, तो किसी ने आँसू नहीं बहाए। किसी ने उसके लिये सुगन्ध-द्रव्य नहीं जलाया। बाइबल कहती है: "सब को अप्रिय होकर जाता रहा।" उसे राजाओं की कब्रिस्तान में भी दफन नहीं किया गया।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय पढ़ने में मुश्किल है। इतनी हिंसा, इतनी बीमारी। पर अध्याय के बीच में एक बहुत ज़रूरी वाक्य है, वचन 7: "तो भी यहोवा ने दाऊद के घराने को नाश करना न चाहा, यह उस वाचा के कारण था, जो उसने दाऊद से बाँधी थी।"

वाचा एक पक्का वादा है। परमेश्वर ने दाऊद से वादा किया था कि उसके वंश का "दीपक कभी न बुझेगा।" यहोराम कितना भी बुरा हो, परमेश्वर अपना वादा नहीं तोड़ते। दीपक जलता रहता है, बस टिमटिमाता है।

साथ ही यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर से दूर जाना कोई छोटी बात नहीं। यहोराम ने सोचा होगा कि वह जो चाहे कर सकता है क्योंकि वह राजा है। पर परमेश्वर देख रहे थे। और उन्होंने चुप न रहकर एलिय्याह के ज़रिये चेतावनी भेजी। यह भी दया है, कि परमेश्वर पहले बोलते हैं।

जोड़ने वाला धागा

दाऊद का दीपक जलता रहा, यहाँ तक कि यहोराम जैसे बुरे राजा के बाद भी। क्यों? क्योंकि उस दीपक से एक दिन एक और राजा आना था। एक ऐसा राजा जो अपने भाइयों को मारेगा नहीं, बल्कि अपने भाइयों के लिये खुद मरेगा। यीशु मसीह दाऊद के वंश से आए। वे सच्चे राजा हैं जिनका सिंहासन कभी नहीं गिरेगा।

यहोराम की कहानी में हम देखते हैं कि इंसानी राजा कितने निराश करते हैं। इसीलिये हमें यीशु की ज़रूरत है, जो कभी निराश नहीं करते।

तुम्हारे लिये

यहोराम के पास एक भला पिता था, पर उसने खुद बुरा रास्ता चुना। इसका मतलब है कि तुम्हारा विश्वास सिर्फ इसलिये सच्चा नहीं है क्योंकि तुम्हारे माता-पिता विश्वास करते हैं। तुम्हें खुद परमेश्वर को जानना होगा।

एलिय्याह का पत्र देखो। परमेश्वर ने यहोराम को चेतावनी दी, भले ही वह बुरा था। परमेश्वर आज भी बोलते हैं, बाइबल के ज़रिये, प्रार्थना के ज़रिये, माता-पिता और शिक्षकों के ज़रिये। सवाल यह है: क्या तुम सुनते हो?

और आखिरी बात: यहोराम डरता था कि उसके भाई उससे कुछ छीन लेंगे। डर से वह हिंसक बना। जब तुम डरते हो कि कोई तुमसे कुछ छीन लेगा, तुम्हारी जगह, तुम्हारे दोस्त, तो याद रखो कि परमेश्वर तुम्हारी देखभाल करते हैं। तुम्हें डर से कठोर बनने की ज़रूरत नहीं है।

इस पर बात करो

यहोराम को मालूम था कि उसका पिता परमेश्वर से प्यार करता था। फिर भी उसने अलग रास्ता चुना। तुम्हारे विचार में क्यों कोई ऐसा करेगा?

वचन 7 कहता है कि परमेश्वर ने दाऊद का "दीपक" बुझने नहीं दिया। यह वादा तुम्हें अपने बारे में क्या सिखाता है, जब तुम गलती करते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आप अपने वादे नहीं तोड़ते, चाहे लोग कितने भी बदल जाएँ। हमें दिल दीजिये जो आपकी बात सुने, न कि यहोराम जैसा कठोर दिल। हमें डर से नहीं, बल्कि आप पर भरोसे से जीने की शक्ति दीजिये। यीशु के नाम से, आमीन।

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2 इतिहास 21 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 इतिहास 21 किस विषय में है?
यह कहानी एक राजा के बारे में है जो एक बहुत अच्छे पिता का बेटा था। यहोशापात एक भला राजा था, जो परमेश्वर से डरता था। जब वह मरा, तो उसका सबसे बड़ा बेटा यहोराम राजा बना।
2 इतिहास 21 क्या कहता है?
फिर एक दिन यहोराम के पास एक पत्र आया। यह पत्र एलिय्याह नबी की ओर से था। पत्र में लिखा था कि परमेश्वर ने देखा है कि यहोराम ने क्या किया। उसने अपने पिता का रास्ता छोड़ा, अपने भाइयों को मारा, और लोगों को परमेश्वर से दूर किया। इसलिए एक भारी मार आएगी, और वह खुद एक भयानक बीमारी से मरेगा।
2 इतिहास 21 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
वाचा एक पक्का वादा है। परमेश्वर ने दाऊद से वादा किया था कि उसके वंश का "दीपक कभी न बुझेगा।" यहोराम कितना भी बुरा हो, परमेश्वर अपना वादा नहीं तोड़ते। दीपक जलता रहता है, बस टिमटिमाता है।
बच्चे 2 इतिहास 21 से क्या सीख सकते हैं?
यहोराम के पास एक भला पिता था, पर उसने खुद बुरा रास्ता चुना। इसका मतलब है कि तुम्हारा विश्वास सिर्फ इसलिये सच्चा नहीं है क्योंकि तुम्हारे माता-पिता विश्वास करते हैं। तुम्हें खुद परमेश्वर को जानना होगा।
2 इतिहास 21 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
वचन 7 कहता है कि परमेश्वर ने दाऊद का "दीपक" बुझने नहीं दिया। यह वादा तुम्हें अपने बारे में क्या सिखाता है, जब तुम गलती करते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

यहोराम ने तब तलवार उठाई जब वह "स्थिर हो गया।" ताकत मिलने के बाद भी भीतर का डर नहीं गया, और उस डर ने उसके अपने भाइयों को निगल लिया। जो कुर्सी भाइयों की लाशों पर टिकी हो, वह कभी सुरक्षित नहीं लगती। सोचो, अपनी जगह बचाने के लिए तुमने किसे पीछे धकेला है? डर से लिया गया हर फैसला आगे चलकर भारी पड़ता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

योराम रात को उठकर घेरे से निकल तो आया, एदोमियों को मारा भी, पर अगली ही आयत कहती है कि एदोम आज तक बागी है। जीत मिली, पर कुछ भी न बदला। जब हम परमेश्वर को छोड़ देते हैं, तो हमारी मेहनत हमें एक रात के लिए बचा सकती है, पर टूटी हुई चीज़ें वापस नहीं जोड़ सकती। तू किस घेरे से भागने में लगा है, और किस जड़ को अनदेखा कर रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

यहोराम का जीवन एक चेतावनी है। उसने अपने भाइयों को मार डाला, मूर्तिपूजा को बढ़ावा दिया, और परमेश्वर से मुँह मोड़ लिया। फिर लिखा है, "इन सब के बाद यहोवा ने उसकी अंतड़ियों में एक असाध्य रोग लगाया।"

सोचिए, आठ साल राज किया, पर कोई शोक न हुआ जब वह मरा। पाप धीरे-धीरे भीतर से खाता है। आज अपने भीतर झाँकिए, कहीं कोई छिपा हुआ रोग तो नहीं जिसे आप अनदेखा कर रहे हैं?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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