1 कुरिन्थियों 6
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
कुरिन्थुस शहर की कलीसिया में एक अजीब समस्या खड़ी हो गई थी। कुछ विश्वासी आपस में झगड़ रहे थे, और वे अपने झगड़ों को सुलझाने के लिए अदालत में जा रहे थे, उन न्यायाधीशों के पास जो परमेश्वर को नहीं मानते थे। पौलुस को यह सुनकर दुःख हुआ। वे पूछते हैं, क्या तुम में से किसी को यह साहस है कि भाई-भाई का झगड़ा अधर्मियों के सामने ले जाए, जबकि कलीसिया में ऐसे बुद्धिमान लोग हैं जो इसे सुलझा सकते थे? पौलुस कहते हैं कि एक दिन विश्वासी लोग दुनिया का और स्वर्गदूतों तक का न्याय करेंगे, तो क्या वे आपस के छोटे झगड़े नहीं सुलझा सकते?
फिर पौलुस एक गहरी बात कहते हैं, जो शायद भाई-भाई के झगड़े से भी बड़ी है। वे पूछते हैं, क्या अन्याय सहना बेहतर नहीं? क्या अपनी हानि सहना बेहतर नहीं, बजाय इसके कि भाई को अदालत में घसीटा जाए? फिर वे उन लोगों की सूची बताते हैं जो परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे, यानी जो उसमें हिस्सा नहीं पाएंगे, जैसे चोर, लोभी, व्यभिचारी, और गाली देनेवाले। यह सुनकर डर लग सकता है, पर तुरंत पौलुस कहते हैं, तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम धोए गए, पवित्र हुए और धर्मी ठहराए गए। यानी बीती बात नहीं, बदली हुई बात है।
आखिर में पौलुस शरीर के बारे में बात करते हैं। कुछ लोग सोचते थे कि देह से जो भी किया जाए, उसका आत्मा से कोई लेना-देना नहीं। पौलुस साफ कहते हैं कि यह सच नहीं है। हमारी देह मसीह के अंग है, और पवित्र आत्मा का मन्दिर है, वह जगह जहाँ परमेश्वर स्वयं रहते हैं।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय दिखाता है कि कलीसिया केवल एक इमारत या रविवार की सभा नहीं है। यह ऐसे लोगों का परिवार है जिन्हें एक-दूसरे पर भरोसा करना सीखना है। जब दो विश्वासी झगड़ते हैं और उसे सुलझाने के लिए बाहर वालों के पास जाते हैं, तो वे दुनिया को दिखा रहे हैं कि मसीह में भी प्रेम और बुद्धि नहीं है। पौलुस यह नहीं कहते कि झगड़े गलत हैं, लोग गलतियाँ करते ही हैं, पर वे चाहते हैं कि विश्वासी एक-दूसरे के साथ धीरज और न्याय से पेश आएँ।
और शरीर के बारे में पौलुस की बात गहरी है। कुछ लोग सोचते हैं कि जो मन में है वही मायने रखता है, शरीर से जो करो वह बेमतलब है। पौलुस इसे गलत ठहराते हैं। शरीर अपने आप में बुरा नहीं, यह परमेश्वर की चीज़ है, इतनी कीमती कि पवित्र आत्मा उसमें वास करते हैं।
बड़ी कड़ी
यह सब यीशु मसीह से जुड़ा है। पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर ने प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएँगे। यानी यह शरीर अस्थायी कूड़ा नहीं, यह वह चीज़ है जिसे परमेश्वर भविष्य में फिर से जीवित करेंगे। और याद रखो, तुम दाम देकर मोल लिये गए हो, यह मसीह के क्रूस की कीमत की ओर इशारा है। जो हमसे दूर था, जो गलत रास्ते पर था, वह धोया गया, पवित्र हुआ, धर्मी ठहराया गया, क्योंकि मसीह ने अपनी जान की कीमत चुकाई। यह पुराना वादा है जो पूरा हुआ, परमेश्वर अपने लोगों को नया बनाते हैं, बाहर से नहीं बल्कि भीतर से।
तुम्हारे लिए
शायद तुम्हारे और तुम्हारे दोस्त के बीच कभी झगड़ा होता है। अगली बार सोचना, क्या मैं सुलझाने की कोशिश कर रहा हूँ, या क्या मैं दूसरों को दिखाना चाहता हूँ कि मैं सही हूँ? और यह भी सोचना कि तुम्हारा शरीर, तुम्हारी आँखें, तुम्हारे हाथ, तुम्हारी ज़बान, ये सब परमेश्वर की नज़र में कीमती हैं। जो तुम उनसे करते हो, मायने रखता है, क्योंकि पवित्र आत्मा तुम में रहते हैं।
चर्चा के लिए
जब किसी के साथ तुम्हारा झगड़ा होता है, तो तुम आमतौर पर पहले क्या करते हो, और इस अध्याय के बाद क्या अलग करोगे?
पौलुस कहते हैं तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है, इसका तुम्हारे रोज़मर्रा के जीवन पर क्या असर हो सकता है?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने हमें धोया और पवित्र किया है। हमें सिखाइए कि हम अपने भाई-बहनों के साथ धीरज और प्रेम से पेश आएँ। हमें याद दिलाइए कि हमारी देह आपकी है, और उसमें पवित्र आत्मा रहते हैं। यीशु के नाम में, आमीन।
1 कुरिन्थियों 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 कुरिन्थियों 6 किस विषय में है?
1 कुरिन्थियों 6 क्या कहता है?
1 कुरिन्थियों 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 कुरिन्थियों 6 से क्या सीख सकते हैं?
1 कुरिन्थियों 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है?" पौलुस यहाँ उत्पत्ति की वही पंक्ति दोहराता है जो विवाह के लिए कही गई थी। यानी शरीर कभी भी सिर्फ शरीर नहीं रहता। जिसे तू "बस एक पल की बात" कहकर भूलना चाहता है, परमेश्वर उसे जोड़ और बंधन कहता है। तेरा तन तेरी आत्मा से अलग नहीं जीता।
क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं?" पौलुस बहस नहीं करता, वह याद दिलाता है। तू जहाँ जाता है, मसीह को साथ ले जाता है। तेरा शरीर कोई अलग कमरा नहीं जिसका दरवाज़ा तू बन्द करके अकेला रह सके। जो तू छिपकर करता है, वह भी उसी देह से होता है जिसे उसने अपना कहा। यही सोच पवित्रता को नियम नहीं, प्रेम बना देती है।
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