7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 यूहन्ना 2

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यूहन्ना यह पत्र उन लोगों को लिख रहे हैं जिन्हें वे अपने "प्रिय बालकों" कहते हैं, यानी जिन्हें वे बहुत प्यार करते हैं। वे साफ़ कहते हैं, वे चाहते हैं कि हम पाप न करें। पर वे यह भी जानते हैं कि हम गिर जाते हैं। इसलिए वे लिखते हैं कि अगर कोई पाप करे, तो परमेश्वर के पास हमारा एक सहायक है, यीशु मसीह, जो धर्मी हैं। यीशु मसीह हमारे पापों का "प्रायश्चित" हैं, यानी उन्होंने अपने आप को दे दिया ताकि हमारे पाप का हिसाब चुकता हो जाए, और यह केवल हमारे लिए नहीं बल्कि सारे संसार के लिए है।

फिर यूहन्ना पूछते हैं कि हम कैसे जानें कि हम सचमुच यीशु को जानते हैं। जवाब है: अगर हम उनकी आज्ञाओं को मानते हैं। जो कहता है "मैं उन्हें जानता हूँ" पर उनकी बात नहीं मानता, वह झूठ बोल रहा है। यह कोई नई आज्ञा नहीं है, बल्कि पुरानी है, जो शुरू से मिली थी, फिर भी यूहन्ना उसे "नई" भी कहते हैं, क्योंकि अंधकार अब मिट रहा है और यीशु की ज्योति चमक रही है। जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अब भी अंधकार में है, चाहे वह कुछ भी कहे। जो भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में चलता है।

आगे यूहन्ना बालकों, पिताओं और जवानों से अलग-अलग बात करते हैं, क्योंकि हर एक ने कुछ अलग अनुभव किया है, कोई पाप की क्षमा जान गया है, कोई परमेश्वर को गहराई से जान गया है, कोई बुराई पर जय पा चुका है। फिर चेतावनी आती है, संसार और उसकी चाहतों से प्रेम मत रखो, क्योंकि वे मिट जाएँगी, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सदा बना रहेगा। कुछ लोग यीशु को मसीह मानने से इनकार करते हैं, यूहन्ना उन्हें "मसीह विरोधी" कहते हैं। पर विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा का अभिषेक है, जो उन्हें सत्य सिखाता है।

What Does This Mean?

यह अध्याय बहुत ईमानदार है। यूहन्ना छिपाते नहीं कि विश्वासी भी पाप करते हैं। पर वे तुरंत यह भी कहते हैं कि हमारे पास एक सहायक है, कोई है जो हमारी तरफ से खड़ा होता है। यह जानना कितना अच्छा है कि परमेश्वर हमसे यह उम्मीद नहीं रखते कि हम कभी गलती न करें, बल्कि वे चाहते हैं कि हम यीशु के पास लौट आएँ जब हम गिरते हैं।

साथ ही यूहन्ना यह भी दिखाते हैं कि जानना और जीना अलग नहीं हो सकते। अगर मैं कहता हूँ कि मैं परमेश्वर को जानता हूँ, पर मेरे व्यवहार में कोई फर्क नहीं आता, तो कुछ गड़बड़ है। खासकर प्रेम की बात में, क्योंकि प्रेम और नफरत साथ नहीं रह सकते।

The Common Thread

इस पूरे अध्याय के केंद्र में यीशु मसीह हैं, वे धर्मी हैं, वे हमारे लिए परमेश्वर के सामने खड़े होते हैं, और उन्होंने अपने आप को दिया ताकि हमारे पाप क्षमा हो सकें। यह वही बड़ी कहानी है जो पूरी बाइबल में चलती है, परमेश्वर अपने लोगों से प्रेम करते हैं और उन्हें छोड़ते नहीं, चाहे वे कितनी बार गिरें। यूहन्ना अंत में एक प्रतिज्ञा की बात करते हैं, अनन्त जीवन, जो यीशु में रहने वालों को दी गई है। यह प्रतिज्ञा उतनी ही पुरानी है जितनी परमेश्वर की योजना, और उतनी ही नई जितनी ज्योति जो अभी चमकनी शुरू हुई है।

For You

तुम भी कभी गिरते हो, शायद किसी से झूठ बोल दिया, या किसी से नफरत जैसा भाव मन में आया। इस अध्याय के अनुसार यह सुनना अच्छा है कि यीशु सहायक हैं, तुम्हें छिपना नहीं पड़ता, बस उनके पास लौट आना है। पर साथ ही यह अध्याय पूछता है, क्या तुम्हारे जीवन में यह दिखता है कि तुम यीशु को जानते हो? खास करके जब कोई तुम्हें चिढ़ाए या नाराज़ करे, क्या तुम फिर भी उससे प्रेम रखने की कोशिश करते हो? यह आसान नहीं है, और यूहन्ना भी यह नहीं कहते कि यह आसान है।

Talk About It

अगर यीशु मसीह हमारे "सहायक" हैं जब हम पाप करते हैं, तो इसका मतलब है कि पाप करना ठीक है? या इसका कोई और मतलब है?

यूहन्ना कहते हैं कि जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अंधकार में है। तुम्हारे विचार में, प्रेम रखना इतना कठिन क्यों है, जबकि हम जानते हैं कि यह सही बात है?

Praying Together

प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप हमारे सहायक हैं जब हम गिर जाते हैं। हमें माफ़ी दें जब हम गलत करते हैं, और हमें सिखाएँ कि हम असल में प्रेम कैसे करें, न सिर्फ़ शब्दों से बल्कि दिल से। हमें अपनी ज्योति में चलने में मदद करें। आमीन।

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1 यूहन्ना 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 यूहन्ना 2 किस विषय में है?
यूहन्ना यह पत्र उन लोगों को लिख रहे हैं जिन्हें वे अपने "प्रिय बालकों" कहते हैं, यानी जिन्हें वे बहुत प्यार करते हैं। वे साफ़ कहते हैं, वे चाहते हैं कि हम पाप न करें। पर वे यह भी जानते हैं कि हम गिर जाते हैं। इसलिए वे लिखते हैं कि अगर कोई पाप करे, तो परमेश्वर के पास हमारा एक सहायक है, यीशु मसीह, जो धर्मी हैं। यीशु मसीह हमारे पापों का "प्रायश्चित" हैं, यानी उन्होंने अपने आप को दे दिया ताकि हमारे पाप का हिसाब चुकता हो जाए, और यह केवल हमारे लिए नहीं बल्कि सारे संसार के लिए है।
1 यूहन्ना 2 क्या कहता है?
आगे यूहन्ना बालकों, पिताओं और जवानों से अलग-अलग बात करते हैं, क्योंकि हर एक ने कुछ अलग अनुभव किया है, कोई पाप की क्षमा जान गया है, कोई परमेश्वर को गहराई से जान गया है, कोई बुराई पर जय पा चुका है। फिर चेतावनी आती है, संसार और उसकी चाहतों से प्रेम मत रखो, क्योंकि वे मिट जाएँगी, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सदा बना रहेगा। कुछ लोग यीशु को मसीह मानने से इनकार करते हैं, यूहन्ना उन्हें "मसीह विरोधी" कहते हैं। पर विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा का अभिषेक है, जो उन्हें सत्य सिखाता है।
1 यूहन्ना 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
साथ ही यूहन्ना यह भी दिखाते हैं कि जानना और जीना अलग नहीं हो सकते। अगर मैं कहता हूँ कि मैं परमेश्वर को जानता हूँ, पर मेरे व्यवहार में कोई फर्क नहीं आता, तो कुछ गड़बड़ है। खासकर प्रेम की बात में, क्योंकि प्रेम और नफरत साथ नहीं रह सकते।
बच्चे 1 यूहन्ना 2 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी कभी गिरते हो, शायद किसी से झूठ बोल दिया, या किसी से नफरत जैसा भाव मन में आया। इस अध्याय के अनुसार यह सुनना अच्छा है कि यीशु सहायक हैं, तुम्हें छिपना नहीं पड़ता, बस उनके पास लौट आना है। पर साथ ही यह अध्याय पूछता है, क्या तुम्हारे जीवन में यह दिखता है कि तुम यीशु को जानते हो?
1 यूहन्ना 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यूहन्ना कहते हैं कि जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अंधकार में है। तुम्हारे विचार में, प्रेम रखना इतना कठिन क्यों है, जबकि हम जानते हैं कि यह सही बात है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

जो कोई पुत्र का इन्कार करता है, उसके पास पिता भी नहीं; जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।" यूहन्ना यहाँ कोई गणित नहीं समझा रहा, वह दिल की बात कह रहा है। बहुत लोग कहते हैं, परमेश्वर तो एक ही है, यीशु की क्या जरूरत? पर पिता को जानने का दरवाजा पुत्र ही है। जिसे तू मानता है, उसी से तेरा रिश्ता तय होता है। आज तेरे लिए यीशु कौन है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

यूहन्ना यह उन लोगों को लिख रहा था जिनके बीच से कुछ शिक्षक निकल गए थे और कह रहे थे कि सच्चा ज्ञान उनके पास है। उनके जवाब में यूहन्ना कहता है, "और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है।" यानी जो तुझे चाहिए, वह तेरे भीतर पहले से है। किसी की चिकनी चुपड़ी बातों से डरने की ज़रूरत नहीं। पर सोच, क्या तू उस भीतर की आवाज़ को सुनने के लिए कभी शांत बैठता भी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

यूहन्ना उन लोगों को लिख रहा था जिनके बीच से कुछ लोग निकल गए थे, नई नई बातें लेकर। और वह कहता है, "जो तुमने आरम्भ से सुना है, वही तुममें बना रहे।" कुछ नया नहीं, कुछ गहरा नहीं। वही पुरानी बात जो तुमने पहले दिन सुनी थी, कि यीशु ने तुझसे प्रेम किया और तेरे लिए जान दी। क्या वह अब भी तेरे भीतर जीवित है, या बस याद बनकर रह गई?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिए लिखता हूँ, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् धर्मी यीशु मसीह।"

ध्यान दो, यूहन्ना यह नहीं कहता "तुम्हारा सहायक", वह कहता है "हमारा"। बूढ़ा प्रेरित खुद को तुमसे अलग नहीं रखता। और गिरने के बाद तुम्हें वकील ढूँढ़ना नहीं पड़ता, वह पहले से पिता के पास खड़ा है। यह जानकर तुम पाप से बचना चाहोगे, या उसे हल्का समझोगे?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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