7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 19

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एलिय्याह ने अभी-अभी कर्मेल पर्वत पर एक बड़ा चमत्कार देखा था। परमेश्वर ने आग भेजकर दिखा दिया था कि वे ही सच्चे परमेश्वर हैं। पर अब रानी ईजेबेल को यह सब पता चलता है, और वह एलिय्याह को मार डालने की धमकी भेजती है। जिस एलिय्याह ने अभी इतना बड़ा चमत्कार देखा था, वही डर के मारे भाग खड़ा होता है। वह बेर्शेबा पहुँचता है, अपने सेवक को वहीं छोड़ देता है, और अकेला जंगल में चला जाता है।

वहाँ एक झाऊ के पेड़ के नीचे बैठकर वह परमेश्वर से अपनी मृत्यु माँगता है। वह कहता है, "अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।" यह बड़ी गहरी निराशा की बात है। पर परमेश्वर उसे मरने नहीं देते। इसके बजाय वे एक दूत भेजते हैं, जो उसे जगाकर रोटी और पानी देता है। एलिय्याह खाता है, फिर सो जाता है, और दूत फिर आकर उसे खिलाता है क्योंकि उसे लंबी यात्रा करनी है।

उसी भोजन से बल पाकर एलिय्याह चालीस दिन-रात चलकर होरेब पर्वत पहुँचता है, जहाँ परमेश्वर ने पहले मूसा से बात की थी। वहाँ एक गुफा में परमेश्वर उससे पूछते हैं, "तेरा यहाँ क्या काम?" एलिय्याह अपनी सारी शिकायत और थकान उँडेल देता है, वह कहता है कि वह अकेला रह गया है और उसके प्राणों के पीछे भी लोग पड़े हैं।

तब परमेश्वर उसे पर्वत पर खड़े होने को कहते हैं। एक प्रचण्ड आँधी आती है, पर परमेश्वर उसमें नहीं थे। फिर भूकम्प आता है, फिर आग, पर परमेश्वर इनमें से किसी में भी नहीं थे। अंत में एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई देता है, और वहाँ परमेश्वर थे।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी हमें एक चौंकाने वाली बात सिखाती है, परमेश्वर के सबसे बड़े सेवक भी टूट सकते हैं। एलिय्याह कोई सुपरहीरो नहीं था जिसे कभी डर नहीं लगता था। वह थक गया था, डरा हुआ था, और मरना चाहता था। और परमेश्वर ने उसे डाँटा नहीं। उन्होंने पहले उसे खाना और नींद दी, शरीर की ज़रूरतों का ध्यान रखा, उसके बाद ही बात की।

जब एलिय्याह अपना दुख बताता है, परमेश्वर उसे चुप नहीं कराते। वे उसे अपने आप को प्रकट करते हैं, पर आँधी, भूकम्प या आग में नहीं, बल्कि एक धीमी, दबी हुई आवाज़ में। यह सिखाता है कि परमेश्वर हमेशा धमाकेदार तरीके से काम नहीं करते। कभी-कभी वे शांति में, धीरे से बोलते हैं, और हमें सुनने के लिए रुकना पड़ता है।

एक बड़ी कहानी से जुड़ाव

एलिय्याह सोचता है कि वह अकेला रह गया है, लेकिन परमेश्वर उसे बताते हैं कि सात हज़ार लोग अभी भी उनके प्रति सच्चे हैं। परमेश्वर अपनी वाचा, यानी अपना वह पक्का वादा, कभी पूरी तरह नहीं तोड़ते, भले ही लगे कि सब कुछ बिगड़ गया है। वे एलिय्याह को नया काम भी देते हैं, एलीशा को अपना उत्तराधिकारी बनाने का। परमेश्वर का काम एक अकेले आदमी पर टिका नहीं रहता।

यही बात हमें यीशु मसीह की याद दिलाती है। वे भी बगीचे में बहुत दुखी और अकेले महसूस करते थे, पर परमेश्वर ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। परमेश्वर अपने लोगों को कभी पूरी तरह अकेला नहीं छोड़ते, चाहे वे कितने भी थके हुए या डरे हुए क्यों न हों।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी ऐसा महसूस किया है कि सब कुछ बहुत भारी है, कि तुम बिलकुल अकेले हो? एलिय्याह जैसे बड़े नबी को भी ऐसा लगा था। यह ठीक है कि कभी-कभी हम थक जाते हैं और परमेश्वर से सीधी बात कर सकते हैं, जैसे एलिय्याह ने की। परमेश्वर डरते नहीं कि हम उनसे अपनी सच्ची बातें कहें।

और शायद अगली बार जब तुम परमेश्वर की आवाज़ सुनना चाहो, तो चिल्लाहट या धमाके की उम्मीद मत करो। शांत रहो, और सुनो। कभी-कभी परमेश्वर की सबसे गहरी बात उस धीमी, दबी हुई आवाज़ में आती है।

बात करें

अगर तुम एलिय्याह की जगह होते और परमेश्वर तुमसे पूछते "तेरा यहाँ क्या काम?", तो तुम क्या जवाब देते?

परमेश्वर आँधी, भूकम्प और आग में नहीं थे, पर धीमी आवाज़ में थे। ऐसा क्यों हो सकता है, तुम्हें क्या लगता है?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, कभी-कभी हम भी थक जाते हैं और डर जाते हैं, जैसे एलिय्याह डर गया था। धन्यवाद कि आप तब भी हमें नहीं छोड़ते। हमें सुनना सिखाइए, जब आप धीरे से बोलते हैं। आमीन।

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1 राजाओं 19 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 19 किस विषय में है?
एलिय्याह ने अभी-अभी कर्मेल पर्वत पर एक बड़ा चमत्कार देखा था। परमेश्वर ने आग भेजकर दिखा दिया था कि वे ही सच्चे परमेश्वर हैं। पर अब रानी ईजेबेल को यह सब पता चलता है, और वह एलिय्याह को मार डालने की धमकी भेजती है। जिस एलिय्याह ने अभी इतना बड़ा चमत्कार देखा था, वही डर के मारे भाग खड़ा होता है। वह बेर्शेबा पहुँचता है, अपने सेवक को वहीं छोड़ देता है, और अकेला जंगल में चला जाता है।
1 राजाओं 19 क्या कहता है?
तब परमेश्वर उसे पर्वत पर खड़े होने को कहते हैं। एक प्रचण्ड आँधी आती है, पर परमेश्वर उसमें नहीं थे। फिर भूकम्प आता है, फिर आग, पर परमेश्वर इनमें से किसी में भी नहीं थे। अंत में एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई देता है, और वहाँ परमेश्वर थे।
1 राजाओं 19 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
एलिय्याह सोचता है कि वह अकेला रह गया है, लेकिन परमेश्वर उसे बताते हैं कि सात हज़ार लोग अभी भी उनके प्रति सच्चे हैं। परमेश्वर अपनी वाचा, यानी अपना वह पक्का वादा, कभी पूरी तरह नहीं तोड़ते, भले ही लगे कि सब कुछ बिगड़ गया है। वे एलिय्याह को नया काम भी देते हैं, एलीशा को अपना उत्तराधिकारी बनाने का। परमेश्वर का काम एक अकेले आदमी पर टिका नहीं रहता।
बच्चे 1 राजाओं 19 से क्या सीख सकते हैं?
और शायद अगली बार जब तुम परमेश्वर की आवाज़ सुनना चाहो, तो चिल्लाहट या धमाके की उम्मीद मत करो। शांत रहो, और सुनो। कभी-कभी परमेश्वर की सबसे गहरी बात उस धीमी, दबी हुई आवाज़ में आती है।
1 राजाओं 19 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे प्रभु, कभी-कभी हम भी थक जाते हैं और डर जाते हैं, जैसे एलिय्याह डर गया था। धन्यवाद कि आप तब भी हमें नहीं छोड़ते। हमें सुनना सिखाइए, जब आप धीरे से बोलते हैं। आमीन।

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