7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 9

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

सुलैमान ने परमेश्वर का भवन और अपना राजभवन बना लिया था। सब कुछ वैसा ही हो गया था जैसा उसने चाहा था। तब परमेश्वर ने उसे फिर से दर्शन दिया, जैसे पहले गिबोन में दिया था। परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने सुलैमान की प्रार्थना सुन ली है और इस भवन को पवित्र कर दिया है, यानी इसे अपने नाम के लिए अलग रख लिया है। परमेश्वर की आँखें और मन सदा वहीं लगे रहेंगे।

पर परमेश्वर एक शर्त भी रखते हैं। यदि सुलैमान अपने पिता दाऊद की तरह सीधे मन से परमेश्वर के पीछे चले और उनकी आज्ञाएँ माने, तो उसका राज्य सदा स्थिर रहेगा। लेकिन यदि सुलैमान या उसके बाद आने वाले लोग परमेश्वर को छोड़कर दूसरे देवताओं की पूजा करें, तो परमेश्वर इस्राएल को उस देश से निकाल देंगे और यह भवन भी नाश हो जाएगा। तब दूसरे देशों के लोग इस उजड़े भवन को देखकर पूछेंगे कि परमेश्वर ने अपने ही लोगों के साथ ऐसा क्यों किया। उत्तर मिलेगा, क्योंकि उन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा को छोड़ दिया और पराए देवताओं की उपासना की।

इसके बाद अध्याय बताता है कि सुलैमान ने बीस साल लगाकर यह सारा काम पूरा किया। उसने राजा हीराम को, जिसने लकड़ी और सोना दिया था, गलील के कुछ नगर दिए, पर हीराम को वे पसंद नहीं आए। सुलैमान ने कई नगरों को मजबूत किया, जिनमें काम करने के लिए उसने उन लोगों को बेगारी में रखा जो इस्राएली नहीं थे, जबकि इस्राएलियों को उसने सैनिक और अधिकारी बनाया। फिरौन की बेटी के लिए उसने एक अलग भवन भी बनाया। अंत में बताया गया है कि सुलैमान नियम से परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाता रहा, और उसने समुद्र में जहाज बनाकर ओपीर देश से बहुत सोना मँगाया।

इसका अर्थ क्या है

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का भवन बनना काफी नहीं है। असली बात यह है कि दिल किस ओर झुका है। परमेश्वर सुलैमान से कोई जादुई वचन नहीं देते कि अब सब हमेशा ठीक रहेगा। वे साफ कहते हैं, "यदि तू मेरे पीछे चलता रहे… परन्तु यदि तुम मेरे पीछे चलना छोड़ दो।" यह एक वाचा है, यानी परमेश्वर का एक पक्का वचन, लेकिन इसमें सुलैमान की ज़िम्मेदारी भी जुड़ी है। परमेश्वर जबरन किसी को वफादार नहीं बनाते।

यह थोड़ा कठिन लगता है, क्योंकि परमेश्वर यहाँ चेतावनी भी देते हैं और वह चेतावनी बहुत कठोर है, भवन का नाश होना, देश का उजड़ जाना। बाइबल यह बात छिपाती नहीं। यह ईमानदार है कि प्रेम और पवित्रता साथ चलते हैं, परमेश्वर हल्के में नहीं लिए जा सकते।

बड़ी कहानी से संबंध

परमेश्वर ने दाऊद से वचन दिया था कि उसके कुल में से कोई सदा इस्राएल की गद्दी पर बैठेगा। यह वचन यहाँ फिर याद दिलाया गया है। बाद में इस्राएल का राज्य टूट गया, मंदिर भी नाश हो गया, ठीक जैसा यह अध्याय चेतावनी देता है। पर परमेश्वर का वह वचन दाऊद के वंश के बारे में खत्म नहीं हुआ। बहुत बाद में, दाऊद के ही वंश में, यीशु मसीह आए, जो सदा के लिए राजा हैं। यीशु ने अपने बारे में कहा कि वे ही वह मंदिर हैं जिसे गिराया जाएगा और तीन दिन में उठाया जाएगा। सुलैमान का भवन पत्थरों से बना था और नाश हो सकता था, पर यीशु में परमेश्वर खुद हमेशा के लिए हमारे बीच रहने आए।

तुम्हारे लिए

शायद तुमने भी कभी कुछ बड़ा बनाया हो, एक चित्र, एक किला, कोई काम जिस पर मेहनत लगी हो। उसे बनाना एक बात है, उसकी देखभाल करते रहना दूसरी बात है। सुलैमान का भवन सुंदर था, पर परमेश्वर के साथ चलना हर दिन का फैसला था। तुम्हारे साथ भी ऐसा ही है। चर्च जाना, बाइबल पढ़ना अच्छा है, पर असली सवाल यह है, क्या तुम्हारा दिल परमेश्वर की ओर सीधा है, या किसी और चीज़ की ओर खिंच गया है। यह कोई एक बार का फैसला नहीं, यह हर दिन चुनने वाली बात है।

बातचीत के लिए

परमेश्वर ने सुलैमान को चेतावनी क्यों दी, जबकि उन्होंने उसकी प्रार्थना सुन ली थी और भवन को पवित्र भी कर दिया था?

क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर ज़्यादा कठोर थे, या यह चेतावनी भी एक तरह का प्रेम था?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, आप हमारी प्रार्थनाएँ सुनते हैं, जैसे आपने सुलैमान की सुनी। हमें सीधा मन दीजिए, जो आपकी ओर झुका रहे, न कि किसी और चीज़ की ओर। हमें याद दिलाइए कि आपके साथ चलना हर दिन का फैसला है। आमीन।

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1 राजाओं 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 9 किस विषय में है?
सुलैमान ने परमेश्वर का भवन और अपना राजभवन बना लिया था। सब कुछ वैसा ही हो गया था जैसा उसने चाहा था। तब परमेश्वर ने उसे फिर से दर्शन दिया, जैसे पहले गिबोन में दिया था। परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने सुलैमान की प्रार्थना सुन ली है और इस भवन को पवित्र कर दिया है, यानी इसे अपने नाम के लिए अलग रख लिया है। परमेश्वर की आँखें और मन सदा वहीं लगे रहेंगे।
1 राजाओं 9 क्या कहता है?
इसके बाद अध्याय बताता है कि सुलैमान ने बीस साल लगाकर यह सारा काम पूरा किया। उसने राजा हीराम को, जिसने लकड़ी और सोना दिया था, गलील के कुछ नगर दिए, पर हीराम को वे पसंद नहीं आए। सुलैमान ने कई नगरों को मजबूत किया, जिनमें काम करने के लिए उसने उन लोगों को बेगारी में रखा जो इस्राएली नहीं थे, जबकि इस्राएलियों को उसने सैनिक और अधिकारी बनाया। फिरौन की बेटी के लिए उसने एक अलग भवन भी बनाया। अंत में बताया गया है कि सुलैमान नियम से परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाता रहा, और उसने समुद्र में जहाज बनाकर ओपीर देश से बहुत सोना मँगाया।
1 राजाओं 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह थोड़ा कठिन लगता है, क्योंकि परमेश्वर यहाँ चेतावनी भी देते हैं और वह चेतावनी बहुत कठोर है, भवन का नाश होना, देश का उजड़ जाना। बाइबल यह बात छिपाती नहीं। यह ईमानदार है कि प्रेम और पवित्रता साथ चलते हैं, परमेश्वर हल्के में नहीं लिए जा सकते।
बच्चे 1 राजाओं 9 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुमने भी कभी कुछ बड़ा बनाया हो, एक चित्र, एक किला, कोई काम जिस पर मेहनत लगी हो। उसे बनाना एक बात है, उसकी देखभाल करते रहना दूसरी बात है। सुलैमान का भवन सुंदर था, पर परमेश्वर के साथ चलना हर दिन का फैसला था। तुम्हारे साथ भी ऐसा ही है। चर्च जाना, बाइबल पढ़ना अच्छा है, पर असली सवाल यह है, क्या तुम्हारा दिल परमेश्वर की ओर सीधा है, या किसी और चीज़ की ओर खिंच गया है। यह कोई एक बार का फैसला नहीं, यह हर दिन चुनने वाली बात है।
1 राजाओं 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर ज़्यादा कठोर थे, या यह चेतावनी भी एक तरह का प्रेम था?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

तब राजा सुलैमान ने हीराम को गलील देश के बीस नगर दिए।" सोचिए, ये नगर सुलैमान की कमाई नहीं थे। ये तो वह विरासत थी जो परमेश्वर ने अपने लोगों को दी थी। पर भवन इतने भव्य बन गए कि उनका हिसाब चुकाने के लिए विरासत का टुकड़ा देना पड़ा।

आप अपने सपनों का बिल किस चीज़ से चुका रहे हैं? कहीं वह चीज़ बेची तो नहीं जा रही जो परमेश्वर ने आपको सौंपी थी?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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