7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 शमूएल 12

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

शमूएल अब बूढ़े हो चुके हैं। उनके बाल सफेद हो गए हैं। बचपन से लेकर आज तक उन्होंने परमेश्वर की प्रजा इस्राएल की सेवा की है। अब सब कुछ बदल गया है। लोगों ने एक राजा माँगा था, और परमेश्वर ने शाऊल को राजा ठहराया है। शमूएल सबके सामने खड़े होकर आखिरी बार लोगों से बात करते हैं।

पहले वे पूछते हैं, क्या मैंने कभी किसी का बैल या गदहा छीना? क्या मैंने किसी पर अन्याय किया, या घूस लिया? लोग जवाब देते हैं, नहीं, आपने कभी ऐसा नहीं किया। शमूएल का जीवन साफ है, और वे चाहते हैं कि सब यह जान लें, इससे पहले कि वे आगे की बात कहें।

फिर शमूएल लोगों को याद दिलाते हैं कि परमेश्वर ने उनके पूर्वजों के लिए क्या-क्या किया है। उन्होंने मूसा और हारून को भेजकर उन्हें मिस्र की गुलामी से निकाला। बाद में जब इस्राएल के लोग परमेश्वर को भूल गए और दूसरे देवताओं की पूजा करने लगे, दुश्मनों ने उन पर हमला किया। हर बार जब वे पुकारते, परमेश्वर उद्धारकर्ता भेजते, जैसे यिप्तह और शमूएल खुद।

फिर भी, जब अम्मोनी राजा नाहाश ने हमला किया, लोगों ने कहा, हमें एक राजा चाहिए, जैसे दूसरी जातियों के पास है। यह अजीब बात है, क्योंकि परमेश्वर खुद उनका राजा था। शमूएल यह बात छिपाते नहीं, वे साफ कहते हैं, यह मांग यहोवा की दृष्टि में बुरी थी।

अब शमूएल एक निशान दिखाते हैं। गेहूं की कटाई का समय है, जब आमतौर पर बारिश नहीं होती। शमूएल परमेश्वर को पुकारते हैं, और उसी दिन आकाश गरजता है और मेंह बरसता है। लोग बहुत डर जाते हैं और समझते हैं कि उन्होंने सच में बड़ी गलती की है।

लोग शमूएल से विनती करते हैं, हमारे लिए प्रार्थना करो ताकि हम मर न जाएं। शमूएल उन्हें डरने से मना करते हैं, पर यह भी कहते हैं कि वे परमेश्वर से मुंह न मोड़ें। वे वादा करते हैं कि वे हमेशा उनके लिए प्रार्थना करते रहेंगे।

What Does This Mean?

यह अध्याय एक कठिन सच्चाई बताता है। लोगों ने परमेश्वर को अस्वीकार करके एक इंसानी राजा चुना, फिर भी परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। यह परमेश्वर के चरित्र के बारे में बहुत कुछ बताता है। वे गुस्से में अपनी प्रजा को त्याग नहीं देते, बल्कि उन्हें फिर से रास्ता दिखाते हैं।

शमूएल का शुद्ध जीवन भी महत्वपूर्ण है। वे कोई बड़े दावे नहीं करते, बस पूछते हैं, क्या मैंने तुम्हारे साथ अन्याय किया? एक नेता जो ऐसा खुलकर पूछ सके, वह भरोसे के लायक होता है। साथ ही शमूएल यह भी कहने से नहीं डरते कि लोगों ने गलती की है। वे सच्चाई को मीठा बनाकर नहीं कहते।

The Common Thread

परमेश्वर ने इस्राएल से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक पक्का वादा। वे उनके परमेश्वर रहेंगे, और इस्राएल उनकी प्रजा रहेगी। जब लोगों ने राजा माँगा, वे मानो कह रहे थे, हमें परमेश्वर पर इतना भरोसा नहीं। फिर भी शमूएल कहते हैं, यहोवा अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को नहीं तजेंगे। यह वादा टूटता नहीं, भले ही लोग गलती करें। बहुत बाद में, परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक और राजा भेजेंगे, यीशु मसीह, जो कभी गलत राजा नहीं होंगे और जो अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ेंगे।

For You

शायद तुमने कभी सोचा हो कि परमेश्वर तुमसे नाराज हो गए हैं क्योंकि तुमने कुछ गलत किया। इस्राएल के लोग भी डर गए थे। पर शमूएल उनसे कहते हैं, डरो मत, बस परमेश्वर की ओर मुड़ जाओ। यही बात तुम्हारे लिए भी सच है। गलती करना इस कहानी का अंत नहीं है। असली सवाल यह है कि गलती के बाद तुम किस ओर मुड़ते हो।

Talk About It

अगर परमेश्वर पहले से ही इस्राएल का राजा था, तो उन्हें इंसानी राजा माँगना क्यों गलत था?

शमूएल कहते हैं कि वे हमेशा लोगों के लिए प्रार्थना करते रहेंगे, भले ही उन्होंने गलती की हो। क्या तुम किसी के लिए ऐसे ही प्रार्थना करते हो, भले ही वह गलत हो?

Praying Together

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते, भले ही हम गलती करें। जब हम डर जाएं, हमें याद दिलाइए कि हम आपसे दूर नहीं भागें, बल्कि आपकी ओर मुड़ें। हमें सच्चे मन से आपकी उपासना करना सिखाइए। आमीन।

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1 शमूएल 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 शमूएल 12 किस विषय में है?
शमूएल अब बूढ़े हो चुके हैं। उनके बाल सफेद हो गए हैं। बचपन से लेकर आज तक उन्होंने परमेश्वर की प्रजा इस्राएल की सेवा की है। अब सब कुछ बदल गया है। लोगों ने एक राजा माँगा था, और परमेश्वर ने शाऊल को राजा ठहराया है। शमूएल सबके सामने खड़े होकर आखिरी बार लोगों से बात करते हैं।
1 शमूएल 12 क्या कहता है?
फिर भी, जब अम्मोनी राजा नाहाश ने हमला किया, लोगों ने कहा, हमें एक राजा चाहिए, जैसे दूसरी जातियों के पास है। यह अजीब बात है, क्योंकि परमेश्वर खुद उनका राजा था। शमूएल यह बात छिपाते नहीं, वे साफ कहते हैं, यह मांग यहोवा की दृष्टि में बुरी थी।
1 शमूएल 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय एक कठिन सच्चाई बताता है। लोगों ने परमेश्वर को अस्वीकार करके एक इंसानी राजा चुना, फिर भी परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। यह परमेश्वर के चरित्र के बारे में बहुत कुछ बताता है। वे गुस्से में अपनी प्रजा को त्याग नहीं देते, बल्कि उन्हें फिर से रास्ता दिखाते हैं।
बच्चे 1 शमूएल 12 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुमने कभी सोचा हो कि परमेश्वर तुमसे नाराज हो गए हैं क्योंकि तुमने कुछ गलत किया। इस्राएल के लोग भी डर गए थे। पर शमूएल उनसे कहते हैं, डरो मत, बस परमेश्वर की ओर मुड़ जाओ। यही बात तुम्हारे लिए भी सच है। गलती करना इस कहानी का अंत नहीं है। असली सवाल यह है कि गलती के बाद तुम किस ओर मुड़ते हो।
1 शमूएल 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते, भले ही हम गलती करें। जब हम डर जाएं, हमें याद दिलाइए कि हम आपसे दूर नहीं भागें, बल्कि आपकी ओर मुड़ें। हमें सच्चे मन से आपकी उपासना करना सिखाइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

शमूएल कहते हैं, "जो कुछ तुम ने मुझ से कहा था उसे मानकर मैं ने तुम्हारे ऊपर एक राजा नियुक्त किया है।" जिस मांग ने उन्हें ठुकराया था, वही उन्होंने पूरी कर दी। कोई कड़वाहट नहीं, कोई बदला नहीं। सोचो, कभी परमेश्वर हमारी हठ मान लेता है, और वही हमारा दुख बन जाता है। तुम आज क्या मांग रहे हो?

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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