1 शमूएल 21
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
दाऊद भाग रहा है। राजा शाऊल उसे मार डालना चाहता है, इसलिए दाऊद अकेला, बिना हथियार के, नोब नगर पहुँचता है, जहाँ याजक अहीमेलेक रहता है। अहीमेलेक काँपते हुए दाऊद से मिलता है, क्योंकि यह अजीब बात है कि इतना बड़ा योद्धा अकेला और असहाय दिखे।
और यहाँ हमें कुछ ईमानदारी से देखना है, दाऊद सच नहीं बोलता। वह कहता है कि राजा ने उसे एक गुप्त काम पर भेजा है। पर असल में वह भाग रहा है, डरा हुआ है, जान बचाने की कोशिश कर रहा है। दाऊद को खाना चाहिए, इसलिए याजक उसे भेंट की पवित्र रोटी दे देता है, जो असल में केवल याजकों के खाने के लिए अलग रखी गई थी। फिर दाऊद को हथियार भी चाहिए, तो अहीमेलेक उसे गोलियत की वही तलवार देता है, जिसे दाऊद ने कभी हरा दिया था।
वहाँ एक आदमी और खड़ा था, दोएग नाम का, जो शाऊल का कर्मचारी था। यह छोटी सी बात आगे चलकर बड़ी मुसीबत लाएगी, पर अभी टेक्स्ट इतना ही बताता है कि वह वहाँ था।
फिर दाऊद और भी दूर भागता है, दुश्मन देश पलिश्तियों के राजा आकीश के पास, गत नगर में। पर वहाँ के लोग उसे पहचान लेते हैं, वही दाऊद जिसने पलिश्तियों को हराया था। दाऊद बहुत डर जाता है और पागल होने का नाटक करने लगता है, दरवाज़ों पर लकीरें खींचता है, अपनी दाढ़ी पर लार बहाता है, जब तक आकीश उससे तंग आकर उसे भगा नहीं देता।
इसका मतलब क्या है?
यह अध्याय हमें दाऊद का वह रूप दिखाता है जो गीतों और वीरता की कहानियों में नहीं दिखता। यहाँ दाऊद डरा हुआ है, झूठ बोलता है, और अपनी जान बचाने के लिए नाटक करता है। बाइबल इसे छिपाती नहीं। परमेश्वर के चुने हुए लोग भी कमजोर पड़ते हैं, गलतियाँ करते हैं, और डर में सही रास्ता भूल जाते हैं।
यह हमें यह भी सिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को उनकी सबसे कमजोर हालत में भी नहीं छोड़ते। दाऊद यहाँ राजा नहीं लग रहा, भगोड़ा लग रहा है। फिर भी परमेश्वर की योजना उसके साथ चलती रहती है। यह कोई सस्ता सबक नहीं है कि "अच्छे बनो और सब ठीक हो जाएगा"। सच यह है कि दाऊद ने यहाँ गलत किया, और उसकी गलती से आगे नुकसान भी होगा। बाइबल इस उलझन को सुलझाती नहीं, बस दिखाती है।
बड़ी कहानी से संबंध
परमेश्वर ने दाऊद से एक वाचा, यानी एक पक्का वादा किया था, कि उसके घराने से राजा उठते रहेंगे। यह वादा दाऊद के अच्छे कामों पर नहीं टिका था, बल्कि परमेश्वर की अपनी वफादारी पर टिका था। इसी बात को हम आगे यीशु मसीह में पूरा होते देखते हैं। यीशु दाऊद के घराने से आए, पर वे दाऊद से बढ़कर हैं। जहाँ दाऊद डर में झूठ बोलता है, वहाँ यीशु मसीह ने सच बोलने में अपनी जान भी दे दी। जहाँ दाऊद रोटी लेकर अपनी जान बचाता है, वहाँ यीशु मसीह ने कहा कि वे स्वयं जीवन की रोटी हैं। दाऊद की कमजोरी हमें यीशु मसीह की ओर देखने के लिए कहती है, जो हमारा सिद्ध और भरोसेमंद राजा हैं।
आपके लिए
क्या तुमने कभी इतना डर लगा हो कि तुमने कुछ ऐसा कहा या किया जो सच नहीं था? दाऊद जैसा हाल किसी के भी साथ हो सकता है, बड़े विश्वासी लोगों के साथ भी। यह अध्याय हमें यह हिम्मत देता है कि हम अपने डर और अपनी गलतियों को परमेश्वर से छिपाएँ नहीं। दाऊद ने बाद में इन्हीं दिनों के बारे में गीत लिखे, जहाँ उसने अपना डर परमेश्वर के सामने खोलकर रखा। हम भी अपने डर को छिपाने के बजाय परमेश्वर के सामने ला सकते हैं, चाहे वह डर स्कूल का हो, दोस्ती का हो, या घर की किसी बात का।
बात करें
क्या तुम्हें लगता है दाऊद का झूठ बोलना समझ में आने वाली बात थी, या फिर भी गलत था? दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं क्या?
दोएग वहाँ खड़ा देख रहा था, और आगे यह बात मुसीबत लाएगी। क्या तुमने कभी देखा है कि एक छोटी सी बात बाद में बड़ी बन जाती है?
आराधना
प्रभु, आप जानते हैं जब हम डरते हैं। दाऊद की तरह हम भी कभी-कभी गलत रास्ता चुन लेते हैं। हमें सच बोलने की हिम्मत दीजिए, और हमें यह भरोसा दीजिए कि हम अपने डर के साथ आपके पास आ सकते हैं। हमें यीशु मसीह की तरह बनने में मदद कीजिए, जो सच्चे और भरोसेमंद हैं। आमीन।
1 शमूएल 21 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 शमूएल 21 किस विषय में है?
1 शमूएल 21 क्या कहता है?
1 शमूएल 21 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 शमूएल 21 से क्या सीख सकते हैं?
1 शमूएल 21 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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