1 शमूएल 26
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
शाऊल राजा था, पर उसके दिल में डर और जलन भर गई थी। उसे पता चला कि दाऊद हकीला नामक पहाड़ी पर छिपा है। वह तीन हज़ार चुने हुए सैनिकों को लेकर उसे खोजने निकल पड़ा। दाऊद को पता चल गया कि शाऊल आ रहा है, इसलिए उसने भेदिए भेजकर जाँच करवाई।
रात को दाऊद और उसका साथी अबीशै चुपचाप शाऊल की छावनी में घुस गए। वहाँ शाऊल गहरी नींद में पड़ा था, उसका भाला उसके सिरहाने ज़मीन में गड़ा था। अब्नेर और बाकी सैनिक भी सो रहे थे, क्योंकि परमेश्वर की ओर से उन पर भारी नींद छा गई थी। अबीशै ने फुसफुसाते हुए कहा, “आज परमेश्वर ने तेरे दुश्मन को तेरे हाथ में दे दिया है, मुझे बस एक बार मारने दे।” पर दाऊद ने मना कर दिया। उसने कहा कि शाऊल यहोवा का अभिषिक्त है, यानी वह जिसे परमेश्वर ने खुद राजा बनने के लिए चुना और तेल से अभिषेक करवाया था। उस पर हाथ उठाना दाऊद के लिए सोचने लायक भी नहीं था।
दाऊद ने भाला और पानी की सुराही उठा ली और वहाँ से निकल गया। दूर एक पहाड़ी की चोटी पर खड़े होकर उसने ज़ोर से पुकारा और अब्नेर को शर्मिंदा किया कि वह अपने राजा की रखवाली ठीक से नहीं कर पाया। शाऊल ने दाऊद की आवाज़ पहचान ली। दाऊद ने उससे पूछा कि आखिर उसने क्या गलती की है कि राजा उसके पीछे पड़ा है। शाऊल ने मान लिया, “मैंने पाप किया है, मेरा बेटा दाऊद लौट आ।” उसने दाऊद को आशीष भी दी, पर फिर वह अपने घर लौट गया, और दाऊद भी अपने रास्ते चला गया।
What Does This Mean?
यह कहानी दिखाती है कि दाऊद के पास मौका था शाऊल को हमेशा के लिए खत्म करने का। किसी को पता नहीं चलता। पर दाऊद ने खुद को रोका। उसने अपने हाथों से बदला लेने के बजाय परमेश्वर पर भरोसा रखा। उसने कहा, “यहोवा ही उसको मारेगा, या वह अपनी मृत्यु से मरेगा, या लड़ाई में मर जाएगा।” दाऊद ने फैसला परमेश्वर पर छोड़ दिया।
यह आसान नहीं था। शाऊल ने दाऊद को बेवजह सालों तक जंगलों में भटकाया, उसे मारने की कोशिश की। दाऊद के पास पूरा हक था गुस्सा होने का। फिर भी उसने सही काम चुना, भले ही उसका मन बदला लेने को कर रहा हो। यह सवाल हमें भी परेशान कर सकता है, क्या सच में हमेशा सही चीज़ करना ही सही है, भले ही कोई देख न रहा हो? दाऊद के लिए जवाब हाँ था, क्योंकि वह जानता था कि परमेश्वर देख रहे हैं।
The Common Thread
शाऊल का अभिषिक्त होना, यानी तेल से चुना जाना, एक बड़ी बात की तरफ इशारा करता है। बाइबल में आगे चलकर एक और अभिषिक्त राजा आने वाला था, जिसे हम मसीह कहते हैं, यानी वह जिसे परमेश्वर ने चुना। यीशु मसीह को भी लोगों ने सताया, पकड़ने की कोशिश की, जबकि वे निर्दोष थे। जैसे दाऊद ने अपना बदला परमेश्वर के हाथ में छोड़ दिया, वैसे ही यीशु ने भी क्रूस पर अपने साथ हुई बुराई का बदला नहीं लिया, बल्कि परमेश्वर के न्याय पर भरोसा रखा। यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर का समय और हमारा समय हमेशा एक जैसा नहीं होता, पर वे धर्मी और सच्चे बने रहने वालों को कभी भूलते नहीं।
For You
शायद तुम्हारे पास भी कभी मौका आएगा किसी से बदला लेने का, किसी ऐसे से जिसने तुम्हें दुखी किया है। स्कूल में, घर में, दोस्तों के बीच। उस वक्त याद रखना कि दाऊद ने मौका होते हुए भी सही चुना। इसका मतलब यह नहीं कि गलत बात को नज़रअंदाज़ कर दो, दाऊद ने शाऊल से साफ-साफ कहा कि उसने गलत किया है। पर उसने बदला लेने की बजाय सच बोलना चुना। यह हिम्मत माँगता है, और यह भरोसा भी कि परमेश्वर न्याय करने वाले हैं।
Talk About It
अगर तुम्हें मौका मिले किसी को चोट पहुँचाने का, जो पहले तुम्हें चोट पहुँचा चुका हो, तो तुम क्या करोगे?
दाऊद ने परमेश्वर पर भरोसा रखा कि वे ही न्याय करेंगे। क्या तुम्हारे लिए किसी बात पर परमेश्वर पर भरोसा रखना मुश्किल होता है?
Praying Together
हे प्रभु, दाऊद ने आप पर भरोसा रखा जब उसके पास बदला लेने का मौका था। हमें भी वैसा ही साहस और सब्र दें। जब कोई हमारे साथ गलत करे, तो हमें सिखाएँ कि अपने हाथों से बदला न लें, बल्कि आप पर भरोसा रखें। आमीन।
1 शमूएल 26 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 शमूएल 26 किस विषय में है?
1 शमूएल 26 क्या कहता है?
1 शमूएल 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 शमूएल 26 से क्या सीख सकते हैं?
1 शमूएल 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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