7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 कुरिन्थियों 8

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पौलुस इस अध्याय में कुरिन्थ की कलीसिया को एक और कलीसिया के बारे में बता रहा है, मकिदुनिया की कलीसिया के बारे में। ये लोग बहुत गरीब थे, उन पर बड़ा दुख भी आया था, फिर भी उन्होंने यरूशलेम के गरीब विश्वासियों की मदद के लिए बड़ी उदारता से पैसा दिया। पौलुस कहता है कि उन्होंने अपनी सामर्थ्य से भी बाहर जाकर, यानी जितना उनके पास था उससे भी ज्यादा, खुशी से दिया। यह उनकी अपनी ताकत नहीं थी, यह परमेश्वर का अनुग्रह था, यानी परमेश्वर की ओर से मिला हुआ मुफ्त उपहार जो उनके दिलों में काम कर रहा था।

अब पौलुस कुरिन्थ की कलीसिया को भी प्रोत्साहित करता है कि वे भी यह काम पूरा करें, क्योंकि उन्होंने पहले ही इसकी शुरुआत की थी और इच्छा भी दिखाई थी। पौलुस साफ कहता है कि यह कोई आज्ञा नहीं है। वह बस उनकी प्रेम की सच्चाई परखना चाहता है। और फिर वह एक बहुत गहरी बात कहता है, वह उन्हें याद दिलाता है कि प्रभु यीशु मसीह धनी होकर भी उनके लिए कंगाल, यानी गरीब बन गए, ताकि उसके कंगाल होने से वे धनी हो जाएं।

पौलुस यह भी समझाता है कि दान देने का मतलब यह नहीं कि कोई एक पक्ष चैन से रहे और दूसरा दुख में पड़े। बात बराबरी की है, जिसके पास ज्यादा है वह उसकी मदद करे जिसके पास कम है। वह तीतुस और एक और भाई को कुरिन्थ भेजता है ताकि यह दान का काम ठीक से और ईमानदारी से पूरा हो, ऐसे कि कोई उन पर दोष न लगा सके।

इसका क्या मतलब है?

यह अध्याय पैसे के बारे में है, पर सिर्फ पैसे के बारे में नहीं। यह दिखाता है कि सच्चा प्रेम कैसा दिखता है, जब वह वास्तव में दिल से निकलता है। मकिदुनिया के लोग खुद गरीब थे, फिर भी उन्होंने दिया। यह कोई मजबूरी नहीं थी, यह खुशी से निकला हुआ काम था। पौलुस यह भी साफ करता है कि दान का माप यह नहीं है कि किसने कितना दिया, बल्कि यह कि किसने अपनी क्षमता के अनुसार दिल से दिया। परमेश्वर यह नहीं देखते कि तुम्हारे पास कितना है, वे देखते हैं कि तुमने जो है उसमें से कितना दिया।

एक बड़ी कहानी से जुड़ा सूत्र

आयत 9 इस पूरे अध्याय का दिल है। पौलुस लिखता है कि प्रभु यीशु मसीह धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए, ताकि उनके कंगाल हो जाने से हम धनी हो जाएं। यह पूरी बाइबल की बड़ी कहानी का हिस्सा है। परमेश्वर के पुत्र के पास स्वर्ग में सब कुछ था, फिर भी वे इस दुनिया में आए, गरीब बनकर, ताकि हमें वह मिल सके जो हमारे पास कभी नहीं था, परमेश्वर के साथ रिश्ता। मकिदुनिया के लोगों की उदारता इस बड़े काम की एक छोटी सी झलक है। जब हम दूसरों के लिए कुछ छोड़ते हैं, तो हम असल में यीशु मसीह की कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हें कभी ऐसा महसूस हुआ है कि तुम्हारे पास कुछ भी देने लायक नहीं है? मकिदुनिया के लोगों के पास भी बहुत कम था, फिर भी परमेश्वर ने उनके थोड़े को बड़ा काम बनाया। तुम्हारे पास भी कुछ है, समय, कोई खिलौना, कोई मदद जो तुम किसी को दे सकते हो, या सिर्फ ध्यान से सुनना जब कोई दुखी हो। सवाल यह नहीं कि तुम्हारे पास कितना है, सवाल यह है कि क्या तुम अपने दिल से देते हो, बिना दिखावे के, बिना मजबूरी के। और याद रखो, यीशु मसीह ने पहले दिया, इसलिए हम भी दे सकते हैं।

चर्चा के लिए

मकिदुनिया की कलीसिया गरीब थी, फिर भी उन्होंने खुशी से दिया। तुम्हें क्या लगता है, ऐसा कैसे हो सकता है?

पौलुस कहता है कि यीशु धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए। इसका तुम्हारे लिए क्या मतलब है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु यीशु, आप धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए, ताकि हम आपके साथ जुड़ सकें। हमें ऐसा दिल दें जो मकिदुनिया के लोगों जैसा हो, जो थोड़े में भी खुशी से देता है। हमें सिखाएं कि सच्चा प्रेम क्या है। आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

2 कुरिन्थियों 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 कुरिन्थियों 8 किस विषय में है?
पौलुस इस अध्याय में कुरिन्थ की कलीसिया को एक और कलीसिया के बारे में बता रहा है, मकिदुनिया की कलीसिया के बारे में। ये लोग बहुत गरीब थे, उन पर बड़ा दुख भी आया था, फिर भी उन्होंने यरूशलेम के गरीब विश्वासियों की मदद के लिए बड़ी उदारता से पैसा दिया। पौलुस कहता है कि उन्होंने अपनी सामर्थ्य से भी बाहर जाकर, यानी जितना उनके पास था उससे भी ज्यादा, खुशी से दिया। यह उनकी अपनी ताकत नहीं थी, यह परमेश्वर का अनुग्रह था, यानी परमेश्वर की ओर से मिला हुआ मुफ्त उपहार जो उनके दिलों में काम कर रहा था।
2 कुरिन्थियों 8 क्या कहता है?
पौलुस यह भी समझाता है कि दान देने का मतलब यह नहीं कि कोई एक पक्ष चैन से रहे और दूसरा दुख में पड़े। बात बराबरी की है, जिसके पास ज्यादा है वह उसकी मदद करे जिसके पास कम है। वह तीतुस और एक और भाई को कुरिन्थ भेजता है ताकि यह दान का काम ठीक से और ईमानदारी से पूरा हो, ऐसे कि कोई उन पर दोष न लगा सके।
2 कुरिन्थियों 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
आयत 9 इस पूरे अध्याय का दिल है। पौलुस लिखता है कि प्रभु यीशु मसीह धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए, ताकि उनके कंगाल हो जाने से हम धनी हो जाएं। यह पूरी बाइबल की बड़ी कहानी का हिस्सा है। परमेश्वर के पुत्र के पास स्वर्ग में सब कुछ था, फिर भी वे इस दुनिया में आए, गरीब बनकर, ताकि हमें वह मिल सके जो हमारे पास कभी नहीं था, परमेश्वर के साथ रिश्ता। मकिदुनिया के लोगों की उदारता इस बड़े काम की एक छोटी सी झलक है। जब हम दूसरों के लिए कुछ छोड़ते हैं, तो हम असल में यीशु मसीह की कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
बच्चे 2 कुरिन्थियों 8 से क्या सीख सकते हैं?
मकिदुनिया की कलीसिया गरीब थी, फिर भी उन्होंने खुशी से दिया। तुम्हें क्या लगता है, ऐसा कैसे हो सकता है?
2 कुरिन्थियों 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु यीशु, आप धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए, ताकि हम आपके साथ जुड़ सकें। हमें ऐसा दिल दें जो मकिदुनिया के लोगों जैसा हो, जो थोड़े में भी खुशी से देता है। हमें सिखाएं कि सच्चा प्रेम क्या है। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

पौलुस चंदा इकट्ठा करने वालों की सिफारिश कर रहा है, यानी उन लोगों की जो पैसे के थैले लेकर सफर करते थे। और इन्हीं साधारण भाइयों के बारे में वह लिखता है, "वे कलीसियाओं के दूत और मसीह की महिमा हैं।" जो काम तुझे मामूली लगता है, वफादारी से किया जाए तो उसी में मसीह की महिमा चमकती है। कौन तुझे ऐसा नाम दे सकता है आज?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पौलुस मकिदुनिया की कलीसियाओं के दान को उनकी उपलब्धि नहीं कहता। वह कहता है, "हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है।" जो खुद कंगाल थे, उनके देने में उसने परमेश्वर का हाथ पहचाना। तेरा खुला हाथ भी तेरी बड़ाई नहीं, उसके अनुग्रह की निशानी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

पौलुस चंदा इकट्ठा कर रहा था, और उसने अकेले जाना ठीक न समझा। भाइयों को साथ लिया, हिसाब खुला रखा: "क्योंकि जो बातें भली हैं, उनके लिये हम यत्न करते हैं, केवल प्रभु के सामने ही नहीं, परन्तु मनुष्यों के सामने भी।" "मेरा मन तो साफ है" कहकर हम कई बातें छिपा लेते हैं। पर सच्चाई ऐसी होनी चाहिए जो दिखे भी। तेरे पैसों का हिसाब कोई पूछे, तो तू घबराएगा या शांत रहेगा?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network