2 कुरिन्थियों 8
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस इस अध्याय में पैसों की बात करते हैं। यह अजीब लग सकता है, पवित्रशास्त्र में इतना सीधा-सीधा पैसों का विषय। मामला यह है: यरूशलेम की कलीसिया में गरीब विश्वासी भाई-बहन कठिनाई में थे, और पौलुस दूसरी कलीसियाओं से उनके लिए दान इकट्ठा कर रहे थे। मकिदुनिया के विश्वासी, जो खुद बहुत गरीब थे और सताव में जी रहे थे, उन्होंने अपनी सामर्थ्य से भी अधिक दिया। पौलुस लिखते हैं कि उन्होंने पहले "प्रभु को" अपने आपको दे दिया, और फिर पैसा तो अपने आप पीछे आया।
अब पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया से कहते हैं कि वे भी वही काम पूरा करें जो उन्होंने शुरू किया था। लेकिन ध्यान दें कैसे पौलुस यह बात कहते हैं। वे कहते हैं, "मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं" कहता। वे किसी को मजबूर नहीं कर रहे। इसके बजाय, वे उन्हें यीशु मसीह की ओर इशारा करते हैं: "वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।" यही असली आधार है, यीशु का उदाहरण, ना कोई नियम।
फिर पौलुस बहुत व्यावहारिक हो जाते हैं। वे कहते हैं कि दान का मूल्य दिल की तैयारी में है, ना कि रकम की बड़ाई में। जिसके पास कम है, उससे कम की उम्मीद है। वे बराबरी की बात करते हैं, आज तुम्हारी बढ़ती किसी और की कमी में काम आए, कल शायद उलटा हो। और अंत में पौलुस बताते हैं कि उन्होंने तीतुस और दो अन्य भाइयों को भेजा है ताकि यह दान ईमानदारी से, पारदर्शिता से इकट्ठा और पहुँचाया जाए, "कि इस उदारता के काम के विषय में कोई हम पर दोष न लगाने पाए।"
What Does This Mean?
यह अध्याय सिर्फ चंदे के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है कि सुसमाचार किसी इंसान को भीतर से कैसे बदल देता है। मकिदुनिया के लोगों के पास पैसा नहीं था, लेकिन उनके पास कुछ और था, एक दिल जो पहले से ही यीशु मसीह को दिया जा चुका था। और जब दिल दिया जाता है, तो हाथ भी खुल जाते हैं। यह क्रम बहुत जरूरी है। पहले समर्पण, फिर उदारता। उल्टा क्रम काम नहीं करता, कोई भी सिर्फ उदार होने की कोशिश से मसीही नहीं बन जाता।
पौलुस यह भी साफ करते हैं कि सच्चा प्यार सच्चाई की परख से गुजरता है। वे लिखते हैं कि यह "प्रेम की सच्चाई को परखने" के लिए कहा जा रहा है। यानी शब्द काफी नहीं हैं। अगर तुम कहते हो कि तुम्हें किसी की परवाह है, पर तुम्हारे पास से कुछ नहीं निकलता, तो वह प्यार कहीं अधूरा रह जाता है। यह असुविधाजनक सच है, लेकिन पौलुस इसे नरम नहीं करते।
और यह भी ध्यान देने की बात है कि पौलुस पैसों के मामले में कितने सावधान हैं। वे तीन गवाहों को भेजते हैं, वे पारदर्शिता चाहते हैं, वे नहीं चाहते कि कोई शक भी करे। विश्वास सिर्फ भावनाओं की बात नहीं है, यह ईमानदार व्यवहार में भी दिखना चाहिए।
The Common Thread
इस पूरे अध्याय का केंद्र वह एक वाक्य है, आयत 9। यीशु मसीह धनी थे, स्वर्ग की महिमा में, परमेश्वर के साथ पूरी संगति में। फिर भी वे कंगाल बन गए, मनुष्य बनकर, दुख उठाकर, क्रूस पर मरकर। और यह उन्होंने क्यों किया? "ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।" यह पूरे सुसमाचार का सार है। परमेश्वर ने अपने आपको खाली किया ताकि हम भरे जा सकें।
मकिदुनिया के विश्वासियों की उदारता कोई अलग कहानी नहीं है, यह उस बड़ी कहानी की एक छोटी झलक है। जो लोग खुद पा चुके हैं कि यीशु मसीह ने उनके लिए अपने आपको दिया, वे खुद भी देना सीख जाते हैं। यह कोई नियम थोप कर नहीं होता, यह भीतर से बदलाव के रूप में आता है। और निर्गमन 16:18 का हवाला भी इसी बड़ी कहानी में फिट होता है, मन्ना के दिनों में परमेश्वर ने हर एक की जरूरत के अनुसार दिया, ना कम ना ज्यादा। परमेश्वर का चरित्र नहीं बदला, वे आज भी बराबरी और पर्याप्तता के परमेश्वर हैं।
For You
तुम्हारी उम्र में पैसा शायद इतना बड़ा मुद्दा नहीं लगता, लेकिन कुछ और चीजें हैं जो उसी जगह पर बैठती हैं, तुम्हारा समय, तुम्हारी ऊर्जा, तुम्हारा ध्यान। सवाल यह नहीं है कि तुम्हारे पास कितना है। सवाल यह है कि तुमने अपना दिल पहले किसे दिया है। अगर यीशु मसीह के पास सच में जगह है तुम्हारी जिंदगी में, तो यह अपने आप दिखेगा, किसी दोस्त के लिए समय निकालने में, किसी जरूरतमंद के लिए कुछ छोड़ने में, बिना इस उम्मीद के कि कोई देख रहा है।
पौलुस यह नहीं कहते कि तुम अपनी हद से बाहर जाकर सब कुछ दे दो और खुद खाली रह जाओ। वे बराबरी की बात करते हैं, ना किसी को चैन ना किसी को क्लेश। यह एक अच्छा संतुलन है, अपने संसाधनों के हिसाब से देना, पर पूरे दिल से। शायद यह पूछने लायक सवाल है, क्या मेरी उदारता उस हद तक जाती है जो मुझे असल में महसूस हो, या मैं सिर्फ वही देता हूँ जो बिना किसी कीमत के दिया जा सके।
Talk About It
मकिदुनिया के विश्वासियों ने "सामर्थ्य से भी बाहर" दिया। तुम्हारी जिंदगी में उदारता कैसी दिखती है, क्या वह तुम्हें कभी असल में कुछ खोने देती है?
पौलुस कहते हैं कि प्यार सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि परखने में सच निकलता है। कोई एक ऐसा रिश्ता या स्थिति सोचो जहाँ तुम्हारा प्यार सिर्फ शब्दों तक सीमित रह गया हो।
Praying Together
प्रभु यीशु, आप धनी होकर भी हमारे लिए कंगाल बन गए। हम इसे अक्सर भूल जाते हैं, या सिर्फ शब्दों में मान लेते हैं। हमें ऐसा दिल दीजिए जो पहले आपको दिया गया हो, ताकि हमारे हाथ भी खुलते जाएं। हमें दिखाइए कि हमारी उदारता कहाँ अधूरी रह गई है, और हमें साहस दीजिए कि हम सच में कुछ दे सकें, अपनी सामर्थ्य के अनुसार, या उससे भी बाहर। आमीन।
2 कुरिन्थियों 8 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 कुरिन्थियों 8 किस विषय में है?
2 कुरिन्थियों 8 क्या कहता है?
2 कुरिन्थियों 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर 2 कुरिन्थियों 8 से क्या सीख सकते हैं?
2 कुरिन्थियों 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तीतुस को पौलुस ने समझाया था, पर लिखा है, "उसने तो हमारा समझाना मान लिया, परन्तु आप ही बहुत उत्साही होकर अपनी इच्छा से तुम्हारे पास गया।" कहने से पहले ही उसका मन तैयार था। सोचो, तुम्हारी सेवा किस से चलती है, किसी के कहने से या भीतर के प्रेम से? दोनों में काम तो होता है, पर खुशी सिर्फ एक में मिलती है।
पौलुस चंदा इकट्ठा करने वालों की सिफारिश कर रहा है, यानी उन लोगों की जो पैसे के थैले लेकर सफर करते थे। और इन्हीं साधारण भाइयों के बारे में वह लिखता है, "वे कलीसियाओं के दूत और मसीह की महिमा हैं।" जो काम तुझे मामूली लगता है, वफादारी से किया जाए तो उसी में मसीह की महिमा चमकती है। कौन तुझे ऐसा नाम दे सकता है आज?
पौलुस मकिदुनिया की कलीसियाओं के दान को उनकी उपलब्धि नहीं कहता। वह कहता है, "हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है।" जो खुद कंगाल थे, उनके देने में उसने परमेश्वर का हाथ पहचाना। तेरा खुला हाथ भी तेरी बड़ाई नहीं, उसके अनुग्रह की निशानी है।
पौलुस चंदा इकट्ठा कर रहा था, और उसने अकेले जाना ठीक न समझा। भाइयों को साथ लिया, हिसाब खुला रखा: "क्योंकि जो बातें भली हैं, उनके लिये हम यत्न करते हैं, केवल प्रभु के सामने ही नहीं, परन्तु मनुष्यों के सामने भी।" "मेरा मन तो साफ है" कहकर हम कई बातें छिपा लेते हैं। पर सच्चाई ऐसी होनी चाहिए जो दिखे भी। तेरे पैसों का हिसाब कोई पूछे, तो तू घबराएगा या शांत रहेगा?
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