6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 राजाओं 19

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा हिजकिय्याह के सामने एक बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी थी। अश्शूर का राजा सन्हेरीब अपनी सेना लेकर आया था और उसके सेनापति रबशाके ने यरूशलेम को धमकी दी थी। उसने कहा कि कोई भी देवता अश्शूर के राजा से नहीं बचा सका, तो इस्राएल का परमेश्वर यहोवा भी नहीं बचा पाएगा। यह सुनकर हिजकिय्याह ने अपने वस्त्र फाड़े और टाट ओढ़ लिया, यह दुख और विनम्रता दिखाने का तरीका था। वह सीधे यहोवा के भवन गया और उसने भविष्यद्वक्ता यशायाह के पास अपने लोगों को भेजकर प्रार्थना माँगी।

जब सन्हेरीब ने फिर से एक पत्री भेजी जिसमें वही धमकी और घमंड भरी बातें थीं, तो हिजकिय्याह ने कुछ खास किया। वह उस पत्री को लेकर यहोवा के भवन में गया और उसे यहोवा के सामने फैला दिया। फिर उसने खुलकर प्रार्थना की, यह मानते हुए कि यहोवा ही स्वर्ग और पृथ्वी के रचयिता हैं और वे ही सच्चे परमेश्वर हैं, न कि लकड़ी और पत्थर के बनाए हुए देवता जिन पर अश्शूर के राजा भरोसा करते थे।

यहोवा ने यशायाह के द्वारा जवाब भेजा। उसने कहा कि सन्हेरीब का घमंड यहोवा के विरुद्ध था, और यहोवा उसे सज़ा देंगे। यरूशलेम बच जाएगा, क्योंकि यहोवा अपने नाम की और अपने दास दाऊद की खातिर इस नगर की रक्षा करेंगे। उसी रात यहोवा के दूत ने अश्शूर की छावनी में एक बड़ी संख्या में सैनिकों को मार डाला। सुबह जब बाकी लोग उठे तो उन्होंने शव ही शव देखे। सन्हेरीब लौट गया और बाद में अपने ही बेटों के हाथों अपने देवता के मंदिर में मारा गया।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि हिजकिय्याह ने अपने डर को कहाँ ले जाकर रखा, वह घबराया नहीं रहा, बल्कि उस डर को लेकर यहोवा के सामने गया। हमें यह सोचना अच्छा लगता है कि बड़े विश्वासी लोग कभी नहीं डरते, पर हिजकिय्याह डरा था। फर्क यह था कि उसने अपना डर परमेश्वर के सामने खोलकर रख दिया, जैसे उसने वह पत्री सचमुच फैला दी।

सन्हेरीब की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने यहोवा की तुलना लकड़ी और पत्थर के देवताओं से की। वह नहीं समझा कि इस्राएल का परमेश्वर जीवित हैं, वे सुनते हैं, देखते हैं, और बोलते हैं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि घमंड और धमकी से कोई परमेश्वर को हिला नहीं सकता।

बड़ी कड़ी

यहोवा ने कहा कि वे अपने दास दाऊद की खातिर यरूशलेम को बचाएँगे। यह एक पुरानी प्रतिज्ञा, यानी वादे की ओर इशारा है, जो परमेश्वर ने दाऊद से किया था, कि उसके घराने में से एक राजा सदा राज करेगा। वर्षों बाद उसी घराने में यीशु मसीह का जन्म हुआ। जिस तरह यहोवा ने उस रात यरूशलेम को बचाया, उसी तरह बाद में उन्होंने अपने पुत्र यीशु मसीह के द्वारा पूरी दुनिया को बचाने का काम किया। यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर अपने वादों को निभाते हैं, भले ही हालात कितने भी डरावने क्यों न दिखें।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हें किसी का धमकाना, मज़ाक उड़ाना या डराना अनुभव हुआ हो। हिजकिय्याह ने जो किया वह तुम भी कर सकते हो, अपनी चिंता और डर को शब्दों में कहकर परमेश्वर के सामने रख दो, चाहे प्रार्थना में ज़ोर से बोलकर या लिखकर। तुम्हें यह दिखावा नहीं करना पड़ता कि तुम्हें डर नहीं लगता। असली सवाल यह है कि तुम अपना डर कहाँ लेकर जाते हो।

बात करें

अगर तुम हिजकिय्याह की जगह होते और वह डरावनी पत्री तुम्हें मिलती, तो तुम सबसे पहले क्या करते?

क्यों लगता है कि सन्हेरीब ने यह सोचा कि इस्राएल का परमेश्वर बाकी देवताओं जैसा ही है? तुम्हें क्या लगता है, आजकल लोग परमेश्वर के बारे में ऐसी कौन सी गलतफहमियाँ रखते हैं?

साथ में प्रार्थना

हे यहोवा, आप जीवित परमेश्वर हैं, आप सुनते हैं और देखते हैं। जब हम डरते हैं और कोई हमें धमकाता है, तो हमें याद दिलाइए कि हम अपना डर आपके सामने खुलकर रख सकते हैं। धन्यवाद कि आप अपने वादों को नहीं भूलते और यीशु मसीह के द्वारा हमें बचाने का रास्ता बनाया। आमीन।

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2 राजाओं 19 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 राजाओं 19 किस विषय में है?
राजा हिजकिय्याह के सामने एक बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी थी। अश्शूर का राजा सन्हेरीब अपनी सेना लेकर आया था और उसके सेनापति रबशाके ने यरूशलेम को धमकी दी थी। उसने कहा कि कोई भी देवता अश्शूर के राजा से नहीं बचा सका, तो इस्राएल का परमेश्वर यहोवा भी नहीं बचा पाएगा। यह सुनकर हिजकिय्याह ने अपने वस्त्र फाड़े और टाट ओढ़ लिया, यह दुख और विनम्रता दिखाने का तरीका था। वह सीधे यहोवा के भवन गया और उसने भविष्यद्वक्ता यशायाह के पास अपने लोगों को भेजकर प्रार्थना माँगी।
2 राजाओं 19 क्या कहता है?
यहोवा ने यशायाह के द्वारा जवाब भेजा। उसने कहा कि सन्हेरीब का घमंड यहोवा के विरुद्ध था, और यहोवा उसे सज़ा देंगे। यरूशलेम बच जाएगा, क्योंकि यहोवा अपने नाम की और अपने दास दाऊद की खातिर इस नगर की रक्षा करेंगे। उसी रात यहोवा के दूत ने अश्शूर की छावनी में एक बड़ी संख्या में सैनिकों को मार डाला। सुबह जब बाकी लोग उठे तो उन्होंने शव ही शव देखे। सन्हेरीब लौट गया और बाद में अपने ही बेटों के हाथों अपने देवता के मंदिर में मारा गया।
2 राजाओं 19 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सन्हेरीब की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने यहोवा की तुलना लकड़ी और पत्थर के देवताओं से की। वह नहीं समझा कि इस्राएल का परमेश्वर जीवित हैं, वे सुनते हैं, देखते हैं, और बोलते हैं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि घमंड और धमकी से कोई परमेश्वर को हिला नहीं सकता।
बच्चे 2 राजाओं 19 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम्हें किसी का धमकाना, मज़ाक उड़ाना या डराना अनुभव हुआ हो। हिजकिय्याह ने जो किया वह तुम भी कर सकते हो, अपनी चिंता और डर को शब्दों में कहकर परमेश्वर के सामने रख दो, चाहे प्रार्थना में ज़ोर से बोलकर या लिखकर। तुम्हें यह दिखावा नहीं करना पड़ता कि तुम्हें डर नहीं लगता। असली सवाल यह है कि तुम अपना डर कहाँ लेकर जाते हो।
2 राजाओं 19 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्यों लगता है कि सन्हेरीब ने यह सोचा कि इस्राएल का परमेश्वर बाकी देवताओं जैसा ही है? तुम्हें क्या लगता है, आजकल लोग परमेश्वर के बारे में ऐसी कौन सी गलतफहमियाँ रखते हैं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

धमकी भरी वह चिट्ठी सुनकर हिजकिय्याह पहले सेनापतियों के पास नहीं गया। "यह सुनकर हिजकिय्याह राजा ने अपने वस्त्र फाड़े, और टाट ओढ़कर यहोवा के भवन में गया।" फटे कपड़े कोई कमजोरी नहीं, वे सच्चाई थे। उसने अपना डर छिपाया नहीं, उसे परमेश्वर के सामने ले गया। तेरी बुरी खबर तुझे सबसे पहले कहाँ ले जाती है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

सन्हेरीब की सेना ने खेत उजाड़ दिए थे, नगर घिरे थे, और तब परमेश्वर ने कहा, "यहूदा के घराने के बचे हुए लोग फिर जड़ पकड़ेंगे और फूले फलेंगे।" ध्यान दे, पहले जड़, फिर फल। तेरे जीवन का यह मौसम शायद ऊपर से खाली दिखे, पर नीचे कुछ हो रहा है। परमेश्वर उजड़े हुए को फिर से जड़ देता है, और जड़ पकड़ी हुई चीज़ें एक दिन फल लाती ही हैं।

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