7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 31

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यशायाह के इस अध्याय में परमेश्वर अपने लोगों से एक कठोर परन्तु सच्ची बात कहते हैं। यहूदा के लोग डरे हुए थे, क्योंकि अश्शूर नाम की बड़ी ताकत उन पर हमला करने वाली थी। डर के मारे उन्होंने क्या किया? उन्होंने मिस्र देश से मदद माँगी। मिस्र के पास बहुत घोड़े और रथ थे, और यहूदा के लोगों को लगा कि यही उन्हें बचा लेंगे। परमेश्वर कहते हैं, "हाय उन पर जो सहायता पाने के लिये मिस्र को जाते हैं और घोड़ों का आसरा करते हैं… पर इस्राएल के पवित्र की ओर दृष्टि नहीं करते।" यानी उन्होंने पहले हथियारों की ओर देखा, परमेश्वर की ओर नहीं।

परमेश्वर याद दिलाते हैं कि मिस्री लोग परमेश्वर नहीं, बस इंसान हैं, और उनके घोड़े भी माँस ही हैं, आत्मा नहीं। जब परमेश्वर अपना हाथ बढ़ाएँगे, तो सहायता करने वाला और सहायता चाहने वाला, दोनों गिर जाएँगे। फिर एक चित्र आता है, एक शेर जो अपने शिकार पर गुर्राता है और चरवाहों की भीड़ से भी नहीं डरता। ठीक उसी तरह सेनाओं का यहोवा सिय्योन पर्वत, यानी यरूशलेम की रक्षा करने के लिए स्वयं उतरेंगे, बिना डरे। वे पंख फैलाए चिड़िया की तरह अपने शहर को ढाँक लेंगे और बचाएँगे। फिर परमेश्वर बुलाते हैं, "जिसके विरुद्ध तुम ने भारी बलवा किया है, उसी की ओर फिरो।" और वादा करते हैं कि अश्शूर गिरेगा, उसकी तलवार मनुष्य की नहीं होगी, बल्कि स्वयं परमेश्वर की शक्ति से वह हार जाएगा।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर के लोग डर के समय क्या करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। यहूदा ने पहले हथियारों की ओर देखा, फिर परमेश्वर की ओर। यही गलती थी। परमेश्वर नाराज़ नहीं इसलिए हैं कि उन्होंने मदद ढूँढ़ी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने परमेश्वर को भुला दिया और भरोसा किसी और चीज़ पर रखा। और फिर भी, गौर करो, परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। वे शेर की तरह अपने शहर के लिए लड़ने आते हैं, चिड़िया की तरह उसे ढाँकने आते हैं। यह अजीब लगता है ना? लोग बलवा करते हैं, फिर भी परमेश्वर बचाने आते हैं। यह परमेश्वर का प्रेम है जो सज़ा से भी बड़ा है, पर उसमें एक बुलावा भी छिपा है, "उसी की ओर फिरो।"

The Common Thread

यह "फिरो" वाला शब्द बाइबल में एक बहुत बड़ा शब्द है, इसे मन फिराव या पश्चाताप कहा जाता है, यानी गलत रास्ते से मुड़कर परमेश्वर की ओर लौटना। परमेश्वर हर बार अपने लोगों को यही मौका देते हैं, चाहे वे कितनी भी बार भटकें। यशायाह में जो शेर और चिड़िया के चित्र हैं, वे दिखाते हैं कि परमेश्वर की रक्षा घोड़ों और तलवारों जैसी नहीं होती, वह अलग ही होती है। बहुत बाद में, यीशु मसीह भी इसी तरह आए, बिना सेना, बिना हथियार, फिर भी उन्होंने सबसे बड़ी लड़ाई जीती, पाप और मृत्यु के विरुद्ध। यशायाह हमें सिखाता है कि सच्ची रक्षा हमेशा परमेश्वर से ही आती है, चाहे वह कैसी भी दिखे।

For You

तुम भी कई बार डरते होगे, परीक्षा से, दोस्तों की बातों से, या किसी मुश्किल घर की बात से। सोचो, जब तुम डरते हो, तो सबसे पहले किस की ओर देखते हो? शायद किसी दोस्त की मदद की ओर, या अपनी खुद की चतुराई की ओर, या फिर परमेश्वर की ओर? यह गलत नहीं कि तुम मदद माँगो, पर यशायाह हमें सिखाता है कि पहली नज़र परमेश्वर की ओर होनी चाहिए। और अगर तुमने कभी परमेश्वर को भुला दिया हो, याद रखो, वे अब भी बुलाते हैं, "मेरी ओर फिरो।"

Talk About It

तुम्हें लगता है कि यहूदा के लोगों ने मिस्र से मदद माँगी, यह गलत क्यों था, जब वे सचमुच डरे हुए थे?

परमेश्वर शेर और चिड़िया दोनों जैसे दिखाए गए हैं, ये दोनों चित्र मिलकर परमेश्वर के बारे में क्या बताते हैं?

Praying Together

प्रभु, कई बार हम डर जाते हैं और अपनी ताकत या दूसरों की मदद पर भरोसा करने लगते हैं। हमें याद दिलाइए कि आप ही हमारे पवित्र और सच्चे सहायक हैं। जब हम भटक जाएँ, हमें अपनी ओर फिराइए, और हमें अपनी सुरक्षा में ढाँक लीजिए, जैसे एक चिड़िया अपने पंखों तले अपने बच्चों को ढाँकती है। आमीन।

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यशायाह 31 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 31 किस विषय में है?
यशायाह के इस अध्याय में परमेश्वर अपने लोगों से एक कठोर परन्तु सच्ची बात कहते हैं। यहूदा के लोग डरे हुए थे, क्योंकि अश्शूर नाम की बड़ी ताकत उन पर हमला करने वाली थी। डर के मारे उन्होंने क्या किया? उन्होंने मिस्र देश से मदद माँगी। मिस्र के पास बहुत घोड़े और रथ थे, और यहूदा के लोगों को लगा कि यही उन्हें बचा लेंगे। परमेश्वर कहते हैं, "हाय उन पर जो सहायता पाने के लिये मिस्र को जाते हैं और घोड़ों का आसरा करते हैं.
यशायाह 31 क्या कहता है?
परमेश्वर याद दिलाते हैं कि मिस्री लोग परमेश्वर नहीं, बस इंसान हैं, और उनके घोड़े भी माँस ही हैं, आत्मा नहीं। जब परमेश्वर अपना हाथ बढ़ाएँगे, तो सहायता करने वाला और सहायता चाहने वाला, दोनों गिर जाएँगे। फिर एक चित्र आता है, एक शेर जो अपने शिकार पर गुर्राता है और चरवाहों की भीड़ से भी नहीं डरता। ठीक उसी तरह सेनाओं का यहोवा सिय्योन पर्वत, यानी यरूशलेम की रक्षा करने के लिए स्वयं उतरेंगे, बिना डरे। वे पंख फैलाए चिड़िया की तरह अपने शहर को ढाँक लेंगे और बचाएँगे। फिर परमेश्वर बुलाते हैं, "जिसके विरुद्ध तुम ने भारी बलवा किया है, उसी की ओर फिरो।" और वादा करते हैं कि अश्शूर गिरेगा, उसकी तलवार मनुष्य की नहीं होगी, बल्कि स्वयं परमेश्वर की शक्ति से वह हार जाएगा।
यशायाह 31 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर के लोग डर के समय क्या करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। यहूदा ने पहले हथियारों की ओर देखा, फिर परमेश्वर की ओर। यही गलती थी। परमेश्वर नाराज़ नहीं इसलिए हैं कि उन्होंने मदद ढूँढ़ी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने परमेश्वर को भुला दिया और भरोसा किसी और चीज़ पर रखा। और फिर भी, गौर करो, परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। वे शेर की तरह अपने शहर के लिए लड़ने आते हैं, चिड़िया की तरह उसे ढाँकने आते हैं।
बच्चे यशायाह 31 से क्या सीख सकते हैं?
यह "फिरो" वाला शब्द बाइबल में एक बहुत बड़ा शब्द है, इसे मन फिराव या पश्चाताप कहा जाता है, यानी गलत रास्ते से मुड़कर परमेश्वर की ओर लौटना। परमेश्वर हर बार अपने लोगों को यही मौका देते हैं, चाहे वे कितनी भी बार भटकें। यशायाह में जो शेर और चिड़िया के चित्र हैं, वे दिखाते हैं कि परमेश्वर की रक्षा घोड़ों और तलवारों जैसी नहीं होती, वह अलग ही होती है। बहुत बाद में, यीशु मसीह भी इसी तरह आए, बिना सेना, बिना हथियार, फिर भी उन्होंने सबसे बड़ी लड़ाई जीती, पाप और मृत्यु के विरुद्ध। यशायाह हमें सिखाता है कि सच्ची रक्षा हमेशा परमेश्वर से ही आती है, चाहे वह कैसी भी दिखे।
यशायाह 31 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी कई बार डरते होगे, परीक्षा से, दोस्तों की बातों से, या किसी मुश्किल घर की बात से। सोचो, जब तुम डरते हो, तो सबसे पहले किस की ओर देखते हो? शायद किसी दोस्त की मदद की ओर, या अपनी खुद की चतुराई की ओर, या फिर परमेश्वर की ओर? यह गलत नहीं कि तुम मदद माँगो, पर यशायाह हमें सिखाता है कि पहली नज़र परमेश्वर की ओर होनी चाहिए। और अगर तुमने कभी परमेश्वर को भुला दिया हो, याद रखो, वे अब भी बुलाते हैं, "मेरी ओर फिरो।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

हे इस्राएलियों, जिसके विरुद्ध तुमने बड़ा बलवा किया है उसकी ओर फिरो।"

इस्राएल मदद के लिए मिस्र भागा था, परमेश्वर को छोड़कर घोड़ों और रथों पर भरोसा किया। और फिर भी बुलावा यही है: उसी के पास लौट आओ जिसे तुमने ठुकराया।

सोच, तू किससे मुँह मोड़कर आया है? वही तुझे पुकार रहा है। लौटने की जगह कोई और नहीं, वही है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

अश्शूर की ताकत के पीछे भी कोई "चट्टान" थी, कोई भरोसा, कोई सहारा। पर यशायाह कहता है, "उसकी चट्टान भी भय के मारे जाती रहेगी।" जिस पर तू टिका है, क्या वह डरने पर टिक पाएगा? यहोवा की आग सिय्योन में है, वही आग शत्रु को भस्म करती है और अपनों को शुद्ध। सोच, तेरी चट्टान कौन है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

यशायाह यहूदा से कह रहा है कि वे मिस्र के घोड़ों पर भरोसा छोड़ें। और फिर यह वचन आता है: "क्योंकि उस समय तुम में से हर एक अपनी चाँदी और सोने की मूरतों को जिन्हें तुम्हारे हाथों ने पाप करने के लिये बनाया है, फेंक देगा।"

गौर कर, मूरतें अपने ही हाथों से बनी थीं। जिस चीज़ पर तू टिका है, कहीं वह तेरी ही बनाई हुई तो नहीं? फेंकने का दिन आता है। आज ही क्यों नहीं?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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