7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 44

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यशायाह 44 में परमेश्वर अपने लोगों, याकूब और इस्राएल से बात करते हैं। वे कहते हैं, "मत डर!" यह कोई खाली शब्द नहीं है। इस्राएल के लोग डरे हुए थे, क्योंकि वे बंधुआई में थे, दूर देश में, अपने घर से दूर। परमेश्वर उन्हें याद दिलाते हैं कि उन्होंने ही उन्हें गर्भ से बनाया है, और वे उनकी सहायता करेंगे। वे वादा करते हैं कि सूखी भूमि पर जल बहाएँगे, और अपनी आत्मा उनकी संतान पर उंडेलेंगे।

फिर परमेश्वर कुछ अजीब सा करते हैं, वे मूर्तियों का मजाक उड़ाते हैं। एक आदमी पेड़ काटता है, उसका आधा हिस्सा जलाकर खाना पकाता है और खुद को गर्म करता है, और बाकी बचे हुए हिस्से से एक मूर्ति बनाकर उसके सामने झुककर कहता है, "मुझे बचा ले, तू मेरा देवता है!" यशायाह यहाँ लगभग हँसी उड़ा रहे हैं, यह कितना अजीब है कि कोई अपनी ही बनाई हुई लकड़ी से खाना भी बनाए और उसी को भगवान भी माने।

अध्याय के अंत में परमेश्वर फिर से याकूब को बुलाते हैं, "मैं तुझको न भूलूँगा।" वे कहते हैं कि उन्होंने उनके पाप बादल की तरह मिटा दिए हैं। फिर आकाश, पहाड़, और जंगल को गाने के लिए बुलाया जाता है, क्योंकि परमेश्वर ने याकूब को छुड़ाया है। और आखिर में परमेश्वर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, वे भविष्य में एक राजा कुस्रू का नाम लेते हैं, जो यरूशलेम को फिर से बसाएगा, भले ही यह भविष्यवाणी बहुत पहले लिखी गई हो।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें बताता है कि परमेश्वर से बड़ा कोई नहीं है। वे कहते हैं, "मैं सबसे पहला हूँ, और मैं ही अन्त तक रहूँगा।" मूर्तियाँ इंसान बनाता है, पर परमेश्वर ने इंसान को बनाया है। यह उल्टा नहीं हो सकता। एक मूर्ति देख नहीं सकती, बोल नहीं सकती, बचा नहीं सकती, पर परमेश्वर देखते हैं, बोलते हैं, और छुड़ाते हैं।

सबसे गहरी बात शायद वह है जो परमेश्वर याकूब के बारे में कहते हैं, "तू मेरा दास है, मैंने तुझे रचा है… मैं तुझको न भूलूँगा।" यह एक वादा है जो टूटता नहीं, भले ही याकूब खुद कई बार भटक गया था और मूर्तियों की तरफ मुड़ गया था। परमेश्वर उसे याद दिलाते हैं कि वे नहीं भूलते, भले ही इंसान भूल जाए।

The Common Thread

परमेश्वर यहाँ कहते हैं कि वे अपने पापों को "काली घटा के समान" मिटा देते हैं। यह वाचा की भाषा है, यानी वह पक्का वादा जो परमेश्वर अपने लोगों से बाँधते हैं। यही वाचा आगे चलकर यीशु मसीह में पूरी होती है, जिनके द्वारा हमारे पाप सच में और पूरी तरह मिटाए जाते हैं। जो कुस्रू राजा के बारे में भविष्यवाणी यहाँ लिखी है, वह दिखाती है कि परमेश्वर इतिहास से पहले ही जानते हैं क्या होगा। वही परमेश्वर बाद में यीशु के आने की भविष्यवाणी भी सदियों पहले करवाते हैं। यह वही परमेश्वर हैं जो कहते हैं, "मैं पहला और अन्तिम हूँ", और यीशु स्वयं को भी यही कहते हुए दिखाते हैं।

For You

कभी-कभी हम भी कुछ ऐसा बना लेते हैं जिस पर हम भरोसा रखने लगते हैं, शायद कोई खेल, कोई दोस्त की राय, या यह ख्याल कि हम खुद ही सब संभाल सकते हैं। ये चीजें मूर्तियों जैसी नहीं दिखतीं, पर काम वैसा ही कर सकती हैं, हमारा ध्यान परमेश्वर से हटाकर किसी और चीज़ पर टिका देना। यह अध्याय पूछता है, तुम किस पर भरोसा रखते हो जब डर लगता है?

अच्छी बात यह है कि परमेश्वर ने वादा किया है कि वे भूलते नहीं। जब तुम गलती करते हो, तुम उनके पास लौट सकते हो, ठीक जैसे परमेश्वर याकूब को कहते हैं, "मेरी ओर फिर लौट आ।"

Talk About It

तुम्हें क्या लगता है, वह आदमी जो लकड़ी से मूर्ति बनाता है, उसे यह समझ क्यों नहीं आता कि वह कितनी अजीब बात कर रहा है?

क्या कोई ऐसी चीज़ है जिस पर तुम कभी-कभी परमेश्वर से ज्यादा भरोसा कर बैठते हो?

Praying Together

प्रभु, आप ही पहले हैं और आप ही अन्त तक रहेंगे। धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं भूलते। हमें सिखाइए कि हम किसी और चीज़ पर नहीं, केवल आप पर भरोसा रखें। आमीन।

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यशायाह 44 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 44 किस विषय में है?
यशायाह 44 में परमेश्वर अपने लोगों, याकूब और इस्राएल से बात करते हैं। वे कहते हैं, "मत डर!" यह कोई खाली शब्द नहीं है। इस्राएल के लोग डरे हुए थे, क्योंकि वे बंधुआई में थे, दूर देश में, अपने घर से दूर। परमेश्वर उन्हें याद दिलाते हैं कि उन्होंने ही उन्हें गर्भ से बनाया है, और वे उनकी सहायता करेंगे। वे वादा करते हैं कि सूखी भूमि पर जल बहाएँगे, और अपनी आत्मा उनकी संतान पर उंडेलेंगे।
यशायाह 44 क्या कहता है?
अध्याय के अंत में परमेश्वर फिर से याकूब को बुलाते हैं, "मैं तुझको न भूलूँगा।" वे कहते हैं कि उन्होंने उनके पाप बादल की तरह मिटा दिए हैं। फिर आकाश, पहाड़, और जंगल को गाने के लिए बुलाया जाता है, क्योंकि परमेश्वर ने याकूब को छुड़ाया है। और आखिर में परमेश्वर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, वे भविष्य में एक राजा कुस्रू का नाम लेते हैं, जो यरूशलेम को फिर से बसाएगा, भले ही यह भविष्यवाणी बहुत पहले लिखी गई हो।
यशायाह 44 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सबसे गहरी बात शायद वह है जो परमेश्वर याकूब के बारे में कहते हैं, "तू मेरा दास है, मैंने तुझे रचा है... मैं तुझको न भूलूँगा।" यह एक वादा है जो टूटता नहीं, भले ही याकूब खुद कई बार भटक गया था और मूर्तियों की तरफ मुड़ गया था। परमेश्वर उसे याद दिलाते हैं कि वे नहीं भूलते, भले ही इंसान भूल जाए।
बच्चे यशायाह 44 से क्या सीख सकते हैं?
कभी-कभी हम भी कुछ ऐसा बना लेते हैं जिस पर हम भरोसा रखने लगते हैं, शायद कोई खेल, कोई दोस्त की राय, या यह ख्याल कि हम खुद ही सब संभाल सकते हैं। ये चीजें मूर्तियों जैसी नहीं दिखतीं, पर काम वैसा ही कर सकती हैं, हमारा ध्यान परमेश्वर से हटाकर किसी और चीज़ पर टिका देना। यह अध्याय पूछता है, तुम किस पर भरोसा रखते हो जब डर लगता है?
यशायाह 44 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें क्या लगता है, वह आदमी जो लकड़ी से मूर्ति बनाता है, उसे यह समझ क्यों नहीं आता कि वह कितनी अजीब बात कर रहा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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