6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 राजाओं 20

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा हिजकिय्याह बीमार पड़ गए थे, इतने बीमार कि मरने पर थे। भविष्यद्वक्ता यशायाह उनके पास गए और परमेश्वर का यह कठोर वचन सुनाया, "अपने घराने के विषय जो आज्ञा देनी हो वह दे, क्योंकि तू नहीं बचेगा, मर जाएगा।" सोचिए, कैसा लगा होगा यह सुनना। हिजकिय्याह ने दीवार की ओर मुँह फेरा और रोते हुए प्रार्थना की। उन्होंने याद दिलाया कि वे सच्चाई और खरे मन से परमेश्वर के सामने चलते रहे हैं।

और परमेश्वर ने सुना। यशायाह आँगन से बाहर भी नहीं निकले थे कि परमेश्वर का वचन फिर आया, "मैंने तेरी प्रार्थना सुनी और तेरे आँसू देखे हैं।" परमेश्वर ने हिजकिय्याह को चंगा करने, उनकी आयु पन्द्रह वर्ष बढ़ाने और नगर को अश्शूर के राजा से बचाने का वादा किया। चिन्ह के रूप में परमेश्वर ने धूपघड़ी की छाया को दस अंश पीछे लौटा दिया, एक ऐसा चमत्कार जो सूरज की साधारण चाल से बाहर था।

कहानी यहीं नहीं रुकती। बाबेल के राजा ने हिजकिय्याह की बीमारी की चर्चा सुनकर दूत भेजे। हिजकिय्याह ने खुश होकर उन्हें अपना सारा खजाना, सोना, चाँदी, हथियार, सब कुछ दिखा दिया। जब यशायाह ने पूछा कि उन्होंने क्या देखा, तो हिजकिय्याह ने सच बताया, "जो कुछ मेरे भवन में है, वह सब उन्होंने देखा।" इस पर यशायाह ने भविष्यवाणी की कि एक दिन यही सब बाबेल को उठा ले जाया जाएगा, और हिजकिय्याह के वंशजों में से कुछ वहाँ बन्दी बनकर रहेंगे। हिजकिय्याह का उत्तर अजीब है, "यहोवा का वचन जो तूने कहा है, वह भला ही है," क्योंकि उनके दिनों में शान्ति बनी रहेगी।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय एक ही व्यक्ति के दो बिल्कुल अलग पहलू दिखाता है। एक ओर हिजकिय्याह है जो रोता है, प्रार्थना करता है, सच्चाई से परमेश्वर के सामने खड़ा होता है, और परमेश्वर उसकी सुनते हैं। दूसरी ओर वही हिजकिय्याह है जो अपनी दौलत दिखाने में इतना खुश हो जाता है कि भूल जाता है यह दौलत परमेश्वर की ओर से है, न कि दिखावे के लिए। बड़े विश्वासी लोग भी कभी बहुत गहरी प्रार्थना करते हैं और कभी घमंड में फिसल जाते हैं। बाइबल यह बात छिपाती नहीं।

और ध्यान दीजिए, हिजकिय्याह का आखिरी जवाब थोड़ा अटपटा लगता है। परमेश्वर उन्हें बता रहे हैं कि आगे चलकर बहुत बुरा होगा, और हिजकिय्याह कहते हैं यह तो भला है, क्योंकि मेरे अपने दिनों में शान्ति रहेगी। क्या यह सही सोच है? पाठ खुद इस पर कुछ नहीं कहता, यह हमें सोचने के लिए छोड़ देता है।

एक बड़ी कड़ी

परमेश्वर ने हिजकिय्याह से कहा कि वे दाऊद के निमित्त नगर की रक्षा करेंगे। यह वही वादा है जो परमेश्वर ने बहुत पहले दाऊद से किया था, कि उनके घराने में से एक राजा सदा राज करेगा। यह वादा, जिसे वाचा कहा जाता है, यानी परमेश्वर की ओर से दी गई पक्की प्रतिज्ञा, आगे चलकर यीशु मसीह में पूरा हुआ। हिजकिय्याह के आँसुओं पर परमेश्वर का ध्यान देना हमें यह भी दिखाता है कि परमेश्वर दुखी और रोते हुए लोगों से दूर नहीं रहते, वे सुनते हैं।

आपके लिए

कभी-कभी आप भी किसी बात से इतने डर जाते हैं या दुखी हो जाते हैं कि रोना आ जाता है। हिजकिय्याह की तरह अपना चेहरा परमेश्वर की ओर फेरना सीखिए, छिपाइए मत, सच बोलिए। लेकिन यह भी याद रखिए कि जब कोई चीज़ आपको अच्छी लगे, कोई तारीफ, कोई उपलब्धि, तो उसे दिखाने की जल्दी में यह मत भूलना कि वह परमेश्वर की देन है। सच्चाई से जीना सिर्फ संकट में नहीं, खुशी में भी जरूरी है।

बात करें

अगर परमेश्वर ने आपको भी हिजकिय्याह जैसा चिन्ह दिया होता, तो आपको कैसा लगता?

हिजकिय्याह का आखिरी जवाब आपको कैसा लगता है, क्या आप उनसे सहमत हैं या नहीं?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, जब हम डरते हैं या रोते हैं, तो हमें अपनी ओर फेरना सिखाइए। हमें सच्चाई से आपके सामने चलना सिखाइए, न केवल दुख में बल्कि खुशी में भी। धन्यवाद कि आप आँसू देखते हैं और प्रार्थना सुनते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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2 राजाओं 20 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 राजाओं 20 किस विषय में है?
राजा हिजकिय्याह बीमार पड़ गए थे, इतने बीमार कि मरने पर थे। भविष्यद्वक्ता यशायाह उनके पास गए और परमेश्वर का यह कठोर वचन सुनाया, "अपने घराने के विषय जो आज्ञा देनी हो वह दे, क्योंकि तू नहीं बचेगा, मर जाएगा।" सोचिए, कैसा लगा होगा यह सुनना। हिजकिय्याह ने दीवार की ओर मुँह फेरा और रोते हुए प्रार्थना की। उन्होंने याद दिलाया कि वे सच्चाई और खरे मन से परमेश्वर के सामने चलते रहे हैं।
2 राजाओं 20 क्या कहता है?
कहानी यहीं नहीं रुकती। बाबेल के राजा ने हिजकिय्याह की बीमारी की चर्चा सुनकर दूत भेजे। हिजकिय्याह ने खुश होकर उन्हें अपना सारा खजाना, सोना, चाँदी, हथियार, सब कुछ दिखा दिया। जब यशायाह ने पूछा कि उन्होंने क्या देखा, तो हिजकिय्याह ने सच बताया, "जो कुछ मेरे भवन में है, वह सब उन्होंने देखा।" इस पर यशायाह ने भविष्यवाणी की कि एक दिन यही सब बाबेल को उठा ले जाया जाएगा, और हिजकिय्याह के वंशजों में से कुछ वहाँ बन्दी बनकर रहेंगे। हिजकिय्याह का उत्तर अजीब है, "यहोवा का वचन जो तूने कहा है, वह भला ही है," क्योंकि उनके दिनों में शान्ति बनी रहेगी।
2 राजाओं 20 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
और ध्यान दीजिए, हिजकिय्याह का आखिरी जवाब थोड़ा अटपटा लगता है। परमेश्वर उन्हें बता रहे हैं कि आगे चलकर बहुत बुरा होगा, और हिजकिय्याह कहते हैं यह तो भला है, क्योंकि मेरे अपने दिनों में शान्ति रहेगी। क्या यह सही सोच है? पाठ खुद इस पर कुछ नहीं कहता, यह हमें सोचने के लिए छोड़ देता है।
बच्चे 2 राजाओं 20 से क्या सीख सकते हैं?
कभी-कभी आप भी किसी बात से इतने डर जाते हैं या दुखी हो जाते हैं कि रोना आ जाता है। हिजकिय्याह की तरह अपना चेहरा परमेश्वर की ओर फेरना सीखिए, छिपाइए मत, सच बोलिए। लेकिन यह भी याद रखिए कि जब कोई चीज़ आपको अच्छी लगे, कोई तारीफ, कोई उपलब्धि, तो उसे दिखाने की जल्दी में यह मत भूलना कि वह परमेश्वर की देन है। सच्चाई से जीना सिर्फ संकट में नहीं, खुशी में भी जरूरी है।
2 राजाओं 20 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हिजकिय्याह का आखिरी जवाब आपको कैसा लगता है, क्या आप उनसे सहमत हैं या नहीं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

यशायाह अभी अभी कह चुका था कि सब कुछ बाबेल ले जाया जाएगा, यहाँ तक कि तेरे बेटे भी। और हिजकिय्याह कहता है, "यहोवा का वचन जो तूने कहा है, वह अच्छा है।" क्योंकि मन में उसने जोड़ लिया, मेरे दिनों में तो शान्ति रहेगी। बस इतना ही। क्या तेरी चिंता भी सिर्फ़ तेरे अपने दिनों तक है? जो तेरे बाद आएँगे, उनके लिए तू आज क्या बो रहा है?

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