6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 3

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

परमेश्वर इस्राएल के लोगों से बोलते हैं। वे कहते हैं, "मैंने तुम्हें मिस्र देश से निकाला। सारी पृथ्वी के परिवारों में से मैंने केवल तुम्हीं को चुना है।" यह बहुत बड़ी बात है। पर फिर परमेश्वर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, "इसलिए मैं तुम्हारे पापों का दण्ड दूँगा।" क्योंकि जिसे परमेश्वर चुनते हैं, उससे वे सच्चाई की भी आशा रखते हैं।

फिर परमेश्वर कुछ सवाल पूछते हैं, जैसे कोई पहेली सुलझाई जा रही हो। क्या दो आदमी बिना सहमत हुए साथ चल सकते हैं? नहीं। क्या सिंह बिना शिकार पकड़े दहाड़ेगा? नहीं। क्या चिड़िया बिना फंदे के फँसेगी? नहीं। हर बात का एक कारण होता है। कुछ भी यूँ ही नहीं होता।

फिर परमेश्वर कहते हैं, क्या किसी शहर में तुरही बजे और लोग न काँपें? नहीं, तुरही की आवाज़ सुनकर हर कोई डर जाता है, क्योंकि खतरा आ रहा है। परमेश्वर कहते हैं, वैसे ही जब कोई विपत्ति आती है, तो वह परमेश्वर के बिना नहीं आती। और जब परमेश्वर कुछ करने वाले होते हैं, तो पहले वे अपने भविष्यद्वक्ताओं को बताते हैं, जैसे कोई मित्र अपने मित्र को भेद बताता है।

सिंह गरजा है। कौन नहीं डरेगा? परमेश्वर बोले हैं। कौन चुप रह सकता है?

अब परमेश्वर सामरिया नगर की ओर इशारा करते हैं। वे कहते हैं, देखो वहाँ कितना शोर है, कितना अन्याय है। लोगों ने अपने घरों में डकैती और उपद्रव से इकट्ठा किया हुआ धन भर रखा है। वे ईमानदारी से काम करना जानते ही नहीं।

इसलिए परमेश्वर चेतावनी देते हैं, एक शत्रु आएगा, जो देश को घेर लेगा, उनका बल तोड़ देगा, उनके भवन लूट लिए जाएँगे। जैसे चरवाहा सिंह के मुँह से भेड़ की सिर्फ दो टाँगें या कान का एक टुकड़ा बचा पाता है, वैसे ही थोड़े से लोग बचेंगे, वे भी बड़ी मुश्किल से।

बेतेल में जहाँ लोग मूर्तियों की वेदियों पर चढ़ावा चढ़ाते थे, वे वेदियाँ भी टूट जाएँगी। जाड़े के घर, गर्मी के घर, हाथी दाँत से सजे सुंदर महल, सब गिरा दिए जाएँगे।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी हमें बताती है कि परमेश्वर की आँखों से कुछ भी छिपा नहीं रहता। जब लोग दूसरों को ठगते हैं, जब वे चोरी और अन्याय से धन जमा करते हैं, तो परमेश्वर यह देखते हैं। वे चुप नहीं बैठते। सिंह के गरजने जैसे परमेश्वर का बोलना भी गंभीर और सच्चा है।

पर एक और बात भी यहाँ छिपी है। परमेश्वर ने पहले ही अपने भविष्यद्वक्ताओं को यह बता दिया, ताकि लोग चेत जाएँ और बदल जाएँ। परमेश्वर चाहते हैं कि कोई भी बिना चेतावनी के दण्ड न पाए। वे पहले प्यार से बुलाते हैं, फिर चेतावनी देते हैं।

समान सूत्र

परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा अपना मर्म प्रगट किया, जैसे कोई मित्र अपने मित्र को भेद बताता है। बाद में यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु मसीह अपने चेलों से कहते हैं, "मैं तुम्हें मित्र कहता हूँ, क्योंकि जो कुछ मैंने अपने पिता से सुना, वह सब मैंने तुम्हें बता दिया है।" परमेश्वर हमेशा से अपने लोगों के साथ भेद बाँटने वाले परमेश्वर रहे हैं। वे चाहते हैं कि हम उनके करीब आएँ, उनकी बात सुनें, और उनसे प्रेम करें।

तुम्हारे लिए

जब तुम कुछ गलत करते हो, चोरी करते हो, झूठ बोलते हो, या किसी को धोखा देते हो, तो याद रखना कि परमेश्वर देखते हैं। पर यह डराने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि तुम सच्चाई से जीना सीखो। जब तुम्हें पता चले कि कुछ गलत है, तो उसे छिपाओ मत। परमेश्वर से माफी माँगो और सही काम करो। परमेश्वर तुम्हारी बात सुनने को तैयार हैं।

बात करो

क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर हमेशा देखते हैं जब हम कुछ गलत करते हैं?

सिंह के गरजने की तरह परमेश्वर का बोलना कैसा होगा, क्या तुम्हें डर लगेगा या भरोसा होगा?

एक साथ प्रार्थना

हे प्रभु परमेश्वर, आप हमें देखते हैं, और आप हमसे प्रेम करते हैं। हमें सच्चाई से जीना सिखाइए। जब हम गलत करें, तो हमें माफी माँगने का साहस दीजिए। धन्यवाद कि आप हमें पहले ही चेतावनी देते हैं, ताकि हम आपके पास लौट आएँ। आमीन।

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आमोस 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 3 किस विषय में है?
परमेश्वर इस्राएल के लोगों से बोलते हैं। वे कहते हैं, "मैंने तुम्हें मिस्र देश से निकाला। सारी पृथ्वी के परिवारों में से मैंने केवल तुम्हीं को चुना है।" यह बहुत बड़ी बात है। पर फिर परमेश्वर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, "इसलिए मैं तुम्हारे पापों का दण्ड दूँगा।" क्योंकि जिसे परमेश्वर चुनते हैं, उससे वे सच्चाई की भी आशा रखते हैं।
आमोस 3 क्या कहता है?
सिंह गरजा है। कौन नहीं डरेगा? परमेश्वर बोले हैं। कौन चुप रह सकता है?
आमोस 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बेतेल में जहाँ लोग मूर्तियों की वेदियों पर चढ़ावा चढ़ाते थे, वे वेदियाँ भी टूट जाएँगी। जाड़े के घर, गर्मी के घर, हाथी दाँत से सजे सुंदर महल, सब गिरा दिए जाएँगे।
बच्चे आमोस 3 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा अपना मर्म प्रगट किया, जैसे कोई मित्र अपने मित्र को भेद बताता है। बाद में यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु मसीह अपने चेलों से कहते हैं, "मैं तुम्हें मित्र कहता हूँ, क्योंकि जो कुछ मैंने अपने पिता से सुना, वह सब मैंने तुम्हें बता दिया है।" परमेश्वर हमेशा से अपने लोगों के साथ भेद बाँटने वाले परमेश्वर रहे हैं। वे चाहते हैं कि हम उनके करीब आएँ, उनकी बात सुनें, और उनसे प्रेम करें।
आमोस 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
सिंह के गरजने की तरह परमेश्वर का बोलना कैसा होगा, क्या तुम्हें डर लगेगा या भरोसा होगा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

सुनो, और याकूब के घराने के विरुद्ध साक्षी दो, प्रभु यहोवा, सेनाओं के परमेश्वर की यही वाणी है।" परमेश्वर चुपचाप दंड नहीं देता। वह पहले गवाह बुलाता है, पहले चेतावनी देता है, ताकि लौटने का समय मिले। यह प्रेम है, कठोर सुनाई देने वाला प्रेम। सोचो, तुम्हारे घर की दीवारें आज तुम्हारे बारे में क्या साक्षी देंगी?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

आमोस एक के बाद एक सवाल पूछता है, और हर सवाल का जवाब साफ है। शेर बिना शिकार के नहीं दहाड़ता, नरसिंगा बिना खतरे के नहीं फूँका जाता। "क्या यहोवा के बिना भेजे किसी नगर में विपत्ति पड़ेगी?" तेरे जीवन में जो हिल रहा है, वह उसके हाथ से बाहर नहीं है। पर ध्यान दे, नरसिंगा अंत नहीं, चेतावनी है। वह पहले बोलता है, ताकि तू लौट आए।

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