कुलुस्सियों 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस उन लोगों को पत्र लिख रहे हैं जिनसे वे कभी मिले भी नहीं। कुलुस्से शहर की कलीसिया, और लौदीकिया शहर की कलीसिया, ये उनके व्यक्तिगत परिचित नहीं हैं। फिर भी पौलुस कहते हैं कि वे उनके लिए बहुत परिश्रम करते हैं, ताकि उनके मन प्रोत्साहित हों और वे प्रेम से एक दूसरे से जुड़े रहें। पौलुस चाहते हैं कि वे परमेश्वर के भेद को पहचानें, यानी वह रहस्य जो पहले छिपा हुआ था पर अब खुल गया है, और वह भेद है मसीह स्वयं। उन्हीं में बुद्धि और ज्ञान के सारे भंडार छिपे हुए हैं।
फिर पौलुस चेतावनी देते हैं। कोई तुम्हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे। कुलुस्से में कुछ लोग सिखा रहे थे कि विश्वास काफी नहीं है, कि कुछ और नियम मानने चाहिए, कुछ खास दिन मनाने चाहिए, कुछ खास चीजें खाने या न खाने का हिसाब रखना चाहिए। पौलुस कहते हैं, ये सब आनेवाली बातों की छाया मात्र हैं, पर असली वस्तु तो मसीह है। एक छाया देखकर कोई सोचता है कि उसे पेड़ मिल गया, पर छाया तो पेड़ नहीं है। मसीह में परमेश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है, यानी परमेश्वर पूरी तरह से मसीह में मौजूद हैं। इसलिए मसीह ही काफी हैं।
पौलुस याद दिलाते हैं कि बपतिस्मे में विश्वासी मसीह के साथ गाड़े गए और उन्हीं के साथ जिलाए गए। जो पाप की सूची, वह नियमों का लेख जो लोगों के विरुद्ध खड़ा था, उसे परमेश्वर ने क्रूस पर कीलों से जड़कर मिटा डाला। इसलिए अब कोई यह अधिकार नहीं रखता कि खाने-पीने, पर्व, या सब्त के विषय में किसी का फैसला करे। ये सब छाया थीं, मूल वस्तु तो मसीह में मिल चुकी है।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय एक गहरी बात कहता है, जो शायद तुमने पहले न सोची हो: क्या हमें अच्छे मसीही बनने के लिए ढेर सारे नियम मानने पड़ते हैं? पौलुस का जवाब चौंकाने वाला है। नहीं, कहते हैं वे। मसीह में ही सब कुछ पूरा हो चुका है। जब कोई सोचता है कि परमेश्वर के करीब आने के लिए उसे अपने बल पर कुछ और जोड़ना होगा, तो वह असल में मसीह की परिपूर्णता को कम आँक रहा है।
यह सच में एक मुश्किल विचार है, और शायद तुम खुद भी सोचते हो, "पर क्या नियम बुरे हैं?" पौलुस यह नहीं कह रहे कि नियम बुरे हैं। वे कह रहे हैं कि नियम पालने से अपने आप शारीरिक लालसाओं पर काबू नहीं आता, और नियम कभी भी मसीह की जगह नहीं ले सकते। यह प्रश्न आज भी खुला रहता है: हम कैसे पहचानें कि कोई नियम सहायक है और कब हम नियमों को मसीह से बड़ा बना बैठते हैं? पौलुस इसका पूरा हल नहीं देते, पर वे एक दिशा जरूर देते हैं।
समान सूत्र
यह पूरा अध्याय मसीह की ओर इशारा करता है। पुराने नियम में खतना एक चिन्ह था कि कोई परमेश्वर की प्रजा का हिस्सा है। पौलुस कहते हैं कि अब विश्वासियों का "खतना" मसीह में हुआ है, हाथ से नहीं परन्तु आत्मा से, जब पापमय पुरानी देह उतार दी गई। यह वही बड़ी कहानी है जो पूरी बाइबल में चलती है, परमेश्वर अपने लोगों को अपने पास खींचते हैं, न बाहरी चिन्हों से, बल्कि मसीह के साथ जुड़ने से। मसीह मरे और जी उठे, और जो उन पर विश्वास करता है, वह भी उनके साथ मर चुका है और जी उठा है। यह कोई छाया नहीं, यह असली बात है।
तुम्हारे लिए
कभी-कभी तुम भी सोचते होगे कि परमेश्वर को खुश करने के लिए तुम्हें बहुत कुछ "सही" करना होगा, सही तरीके से प्रार्थना करना, सही चीजें छोड़ना, सही व्यवहार दिखाना। यह अध्याय तुम्हें राहत देता है। तुम्हें मसीह में जड़ पकड़नी है, जैसे एक पेड़ अपनी जड़ें ज़मीन में गहरी करता है। इसका मतलब है मसीह के साथ समय बिताना, उनकी बातें सुनना, उन पर भरोसा करना, न कि नियमों की एक सूची पूरी करना। जब तुम्हारे दोस्त कहें कि "यह करना ज़रूरी है वरना परमेश्वर नाराज़ होंगे," तो याद रखना, मसीह ही काफी हैं।
बात करें
अगर मसीह में परमेश्वर की सारी परिपूर्णता है, तो फिर हमें किसी और चीज़ की तलाश क्यों करनी पड़ती है?
क्या तुम कभी सोचते हो कि कोई नियम तुम्हें परमेश्वर के करीब ला रहा है, या असल में वह सिर्फ एक छाया है? इसमें फर्क कैसे पता चले?
साथ में प्रार्थना
हे प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप में ही सब कुछ पूरा है। हमें नियमों में उलझने के बजाय आप में जड़ पकड़ना सिखाइए। जब हम भ्रमित हों कि सही क्या है, तो हमें अपनी ओर खींचिए, क्योंकि आप ही काफी हैं। आमीन।
कुलुस्सियों 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
कुलुस्सियों 2 किस विषय में है?
कुलुस्सियों 2 क्या कहता है?
कुलुस्सियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे कुलुस्सियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
कुलुस्सियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस अभी अभी कह चुका था कि मसीह में "ज्ञान और बुद्धि के सारे भण्डार छिपे हुए हैं," और फिर तुरन्त चेतावनी देता है, "यह मैं इसलिए कहता हूँ कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे।" धोखा हमेशा भद्दा नहीं लगता, वह मीठा लगता है, समझदार लगता है। बचाव तर्क नहीं, मसीह की गहरी पहचान है। जिसे तू सचमुच जानता है, उसकी नकल तुझे धोखा नहीं दे पाएगी।
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