6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

दानिय्येल 11

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

दानिय्येल 11 थोड़ा कठिन अध्याय है, क्योंकि इसमें बहुत सारे राजाओं की बात होती है, उत्तर के राजा, दक्षिण के राजा, और उनकी लड़ाइयाँ, योजनाएँ और धोखे। एक स्वर्गदूत दानिय्येल को बताता है कि आनेवाले समय में क्या होगा, फारस के राज्य में राजा उठेंगे, फिर एक पराक्रमी राजा आएगा जिसका राज्य टूटकर चार भागों में बँट जाएगा। उसके बाद दक्षिण और उत्तर के राजा बार बार आपस में लड़ते हैं, कभी विवाह से शान्ति बनाने की कोशिश करते हैं, कभी एक दूसरे को धोखा देते हैं। कुछ राजा घमंडी होकर अपने आपको बहुत बड़ा समझते हैं, और अंत में एक ऐसा राजा आता है जो मंदिर को अपवित्र करता है और परमेश्वर के विरुद्ध भी बड़ी बड़ी बातें बोलता है। फिर भी अध्याय के बीच में परमेश्वर के भक्त लोगों की भी बात होती है, वे लोग जो दुःख सहते हैं, पर जो परमेश्वर को जानते हैं, वे हियाव रखते हैं। अंत में यह सब कुछ परमेश्वर के ठहराए हुए समय में खत्म हो जाता है।

What Does This Mean?

यह अध्याय पढ़ते समय शायद तुम्हें लगे, इतने सारे नाम रहित राजा और लड़ाइयाँ, इसका मतलब क्या है? पर असली बात यह है, यह दर्शन दानिय्येल को उसके जीने से बहुत पहले दिया गया था, और जो कुछ यहाँ लिखा है, वह बाद में वाकई इतिहास में हुआ। इससे पता चलता है कि परमेश्वर केवल आज को नहीं देखते, वे आनेवाला कल भी जानते हैं। राजा अपनी योजनाएँ बनाते हैं, एक दूसरे को धोखा देते हैं, युद्ध छेड़ते हैं, पर उनकी शक्ति और उनका समय परमेश्वर के हाथ में है। आयत 27 में साफ लिखा है, झूठ बोलने और बुरी योजना बनाने के बाद भी, “इन सब बातों का अन्त नियत ही समय में होनेवाला है।” इतिहास अंधी दौड़ नहीं है, उसके पीछे एक योजना है।

The Common Thread

बाइबल में बार बार एक वाचा की बात आती है, यानी परमेश्वर का वह ठोस वादा जो वे अपने लोगों से करते हैं। इस अध्याय में भी “पवित्र वाचा” शब्द आता है, और कुछ राजा उसी वाचा को तोड़ने की कोशिश करते हैं, मंदिर को अपवित्र करते हैं, परमेश्वर के लोगों को सताते हैं। फिर भी परमेश्वर अपनी वाचा नहीं भूलते। यह पूरी किताब दानिय्येल दिखाती है कि दुनिया के बड़े बड़े राज्य आते हैं और चले जाते हैं, पर परमेश्वर का राज्य टिका रहता है। बाद में जब यीशु मसीह आए, तब उन्होंने भी कहा कि वे ही अंत में सब कुछ ठीक करेंगे। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि इतिहास का असली राजा कोई इंसान नहीं, परमेश्वर खुद हैं, और वे ही अंतिम शब्द बोलते हैं।

For You

शायद तुम्हारी ज़िंदगी में भी कभी ऐसा लगे कि चारों ओर सब कुछ उलझा हुआ है, स्कूल में झगड़े, घर में तनाव, दुनिया की खबरों में युद्ध और अन्याय। यह अध्याय झूठा दिलासा नहीं देता कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा, बल्कि यह ईमानदारी से कहता है कि दुःख और धोखा सच में होंगे। पर साथ ही यह कहता है, जो परमेश्वर को जानते हैं वे हियाव बाँधेंगे। इसका मतलब यह नहीं कि सब आसान हो जाएगा, बल्कि यह कि तुम अकेले नहीं हो। जब तुम्हें लगे कि किसी ने तुम्हारे साथ चिकनी चुपड़ी बातें करके धोखा दिया, या जब दुनिया में कुछ गलत होता दिखे, तो याद रखना, परमेश्वर यह सब देख रहे हैं और उनका समय तय है।

Talk About It

क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर सच में आज की दुनिया की हर घटना को भी जानते और देखते हैं? क्यों या क्यों नहीं?

इस अध्याय में बहुत से राजा झूठ और धोखे से जीतने की कोशिश करते हैं। क्या तुम्हें कभी ऐसा अनुभव हुआ है जब सच बोलना मुश्किल था?

Praying Together

हे परमेश्वर, आप इतिहास के हर मोड़ को जानते हैं, जब दुनिया उलझी हुई लगे, तब हमें याद दिलाना कि आप अब भी राजा हैं। हमें हियाव दीजिए जब सच बोलना मुश्किल हो, और सिखाइए कि आपको जानने का मतलब क्या है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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दानिय्येल 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

दानिय्येल 11 किस विषय में है?
दानिय्येल 11 थोड़ा कठिन अध्याय है, क्योंकि इसमें बहुत सारे राजाओं की बात होती है, उत्तर के राजा, दक्षिण के राजा, और उनकी लड़ाइयाँ, योजनाएँ और धोखे। एक स्वर्गदूत दानिय्येल को बताता है कि आनेवाले समय में क्या होगा, फारस के राज्य में राजा उठेंगे, फिर एक पराक्रमी राजा आएगा जिसका राज्य टूटकर चार भागों में बँट जाएगा। उसके बाद दक्षिण और उत्तर के राजा बार बार आपस में लड़ते हैं, कभी विवाह से शान्ति बनाने की कोशिश करते हैं, कभी एक दूसरे को धोखा देते हैं। कुछ राजा घमंडी होकर अपने आपको बहुत बड़ा समझते हैं, और अंत में एक ऐसा राजा आता है जो मंदिर को अपवित्र करता है और परमेश्वर के विरुद्ध भी बड़ी बड़ी बातें बोलता है। फिर भी अध्याय के बीच में परमेश्वर के भक्त लोगों की भी बात होती है, वे लोग जो दुःख सहते हैं, पर जो परमेश्वर को जानते हैं, वे हियाव रखते हैं। अंत में यह सब कुछ परमेश्वर के ठहराए हुए समय में खत्म हो जाता है।
दानिय्येल 11 क्या कहता है?
यह अध्याय पढ़ते समय शायद तुम्हें लगे, इतने सारे नाम रहित राजा और लड़ाइयाँ, इसका मतलब क्या है? पर असली बात यह है, यह दर्शन दानिय्येल को उसके जीने से बहुत पहले दिया गया था, और जो कुछ यहाँ लिखा है, वह बाद में वाकई इतिहास में हुआ। इससे पता चलता है कि परमेश्वर केवल आज को नहीं देखते, वे आनेवाला कल भी जानते हैं। राजा अपनी योजनाएँ बनाते हैं, एक दूसरे को धोखा देते हैं, युद्ध छेड़ते हैं, पर उनकी शक्ति और उनका समय परमेश्वर के हाथ में है। आयत 27 में साफ लिखा है, झूठ बोलने और बुरी योजना बनाने के बाद भी, “इन सब बातों का अन्त नियत ही समय में होनेवाला है।” इतिहास अंधी दौड़ नहीं है, उसके पीछे एक योजना है।
दानिय्येल 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बाइबल में बार बार एक वाचा की बात आती है, यानी परमेश्वर का वह ठोस वादा जो वे अपने लोगों से करते हैं। इस अध्याय में भी “पवित्र वाचा” शब्द आता है, और कुछ राजा उसी वाचा को तोड़ने की कोशिश करते हैं, मंदिर को अपवित्र करते हैं, परमेश्वर के लोगों को सताते हैं। फिर भी परमेश्वर अपनी वाचा नहीं भूलते। यह पूरी किताब दानिय्येल दिखाती है कि दुनिया के बड़े बड़े राज्य आते हैं और चले जाते हैं, पर परमेश्वर का राज्य टिका रहता है। बाद में जब यीशु मसीह आए, तब उन्होंने भी कहा कि वे ही अंत में सब कुछ ठीक करेंगे। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि इतिहास का असली राजा कोई इंसान नहीं, परमेश्वर खुद हैं, और वे ही अंतिम शब्द बोलते हैं।
बच्चे दानिय्येल 11 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम्हारी ज़िंदगी में भी कभी ऐसा लगे कि चारों ओर सब कुछ उलझा हुआ है, स्कूल में झगड़े, घर में तनाव, दुनिया की खबरों में युद्ध और अन्याय। यह अध्याय झूठा दिलासा नहीं देता कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा, बल्कि यह ईमानदारी से कहता है कि दुःख और धोखा सच में होंगे। पर साथ ही यह कहता है, जो परमेश्वर को जानते हैं वे हियाव बाँधेंगे। इसका मतलब यह नहीं कि सब आसान हो जाएगा, बल्कि यह कि तुम अकेले नहीं हो। जब तुम्हें लगे कि किसी ने तुम्हारे साथ चिकनी चुपड़ी बातें करके धोखा दिया, या जब दुनिया में कुछ गलत होता दिखे, तो याद रखना, परमेश्वर यह सब देख रहे हैं और उनका समय तय है।
दानिय्येल 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर सच में आज की दुनिया की हर घटना को भी जानते और देखते हैं? क्यों या क्यों नहीं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

दक्षिण का राजा हार गया, पर हथियारों की कमी से नहीं। उसके पास "अत्यन्त बड़ी और सामर्थी सेना" थी। वह गिरा इसलिए कि "लोग उसके विरुद्ध कल्पना करेंगे।" अपनों की फुसफुसाहट ने वह कर दिया जो दुश्मन की तलवार न कर सकी। आज भी सबसे गहरा घाव बाहर से नहीं, अपनी मेज़ पर बैठे किसी से आता है। तू किसके भरोसे खड़ा है, अपनी सेना के या परमेश्वर के?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 31

दुश्मन की योजना में सबसे बड़ी चोट यह थी कि वे "नित्य होमबलि को बन्द करेंगे।" मन्दिर की दीवारें नहीं गिरीं, बस रोज़ की भेंट रुक गई। शैतान आज भी यही करता है। वह तेरा विश्वास एक झटके में नहीं तोड़ता, वह तेरी रोज़ की प्रार्थना को धीरे धीरे छुड़वा देता है। सोच, तेरी वह छोटी सी दैनिक भेंट कब से बन्द पड़ी है?

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