व्यवस्थाविवरण 11
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्यवस्थाविवरण अध्याय 11 की बाइबल व्याख्या
The Explanation
मूसा इस्राएल के लोगों से बात कर रहे हैं, ठीक उस समय जब वे वादा किए गए देश में प्रवेश करने वाले थे। मूसा कहते हैं, याद रखो, तुमने अपनी आँखों से देखा कि परमेश्वर ने मिस्र में क्या किया, कैसे उन्होंने फ़िरौन की सेना को लाल समुद्र में डुबो दिया, और जंगल में तुम्हारे साथ क्या हुआ। यहाँ तक कि दातान और अबीराम का भी ज़िक्र आता है, दो लोग जिन्होंने मूसा के विरुद्ध विद्रोह किया था, और ज़मीन ने उन्हें निगल लिया। मूसा कहते हैं, यह तुम्हारे बच्चों से नहीं कह रहा, क्योंकि तुमने खुद यह सब देखा है।
फिर मूसा उस नए देश के बारे में बताते हैं जहाँ वे जाने वाले हैं। मिस्र में नील नदी का पानी पैरों से खींचकर खेतों में लाना पड़ता था। पर यह नया देश पहाड़ों और घाटियों का देश है, जो आकाश की वर्षा से सिंचता है। इसका मतलब है कि वहाँ की खेती सीधे परमेश्वर की देखभाल पर निर्भर करेगी। मूसा कहते हैं कि अगर लोग परमेश्वर यहोवा से प्रेम करेंगे और उनकी आज्ञाएँ मानेंगे, तो वे सही समय पर वर्षा देंगे, अनाज, अंगूर का रस और तेल भरपूर मिलेगा। लेकिन अगर उनके मन भटक गए और वे दूसरे देवताओं की पूजा करने लगे, तो परमेश्वर का क्रोध भड़केगा, आकाश बंद हो जाएगा, और भूमि फसल नहीं देगी।
मूसा चाहते हैं कि यह बात हर जगह याद रहे। घर में, रास्ते पर चलते हुए, लेटते और उठते हुए, बच्चों को सिखाते हुए। यहाँ तक कि घर के चौखट पर और दरवाज़ों पर लिखा जाए। अध्याय के अंत में मूसा एक तस्वीर खींचते हैं, गिरिज्जीम पर्वत से आशीष सुनाई जाएगी और एबाल पर्वत से श्राप। आशीष और श्राप दोनों सामने रखे गए हैं, और चुनाव लोगों के हाथ में है।
What Does This Mean?
यह अध्याय एक बड़ी बात कहता है, याद रखना ही विश्वास का हिस्सा है। जो पीढ़ी मिस्र से निकली थी, उसने परमेश्वर के काम अपनी आँखों से देखे थे। पर अब एक नई ज़िंदगी शुरू होने वाली थी, एक नए देश में, जहाँ चीज़ें आसान नहीं थीं। वहाँ की खेती मिस्र जैसी पक्की नहीं थी, वहाँ बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था। मूसा यह नहीं छुपाते कि यह जोखिम भरा जीवन होगा। परमेश्वर उन्हें सुरक्षा का वादा नहीं देते कि कुछ भी गलत नहीं होगा, बल्कि वे कहते हैं कि अगर तुम मुझसे जुड़े रहोगे, तो मैं तुम्हारी देखभाल करूँगा।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि परमेश्वर मजबूरी से प्रेम नहीं माँगते। वे आशीष और श्राप दोनों सामने रखते हैं और चुनाव इंसान पर छोड़ देते हैं। क्या यह अजीब नहीं लगता कि परमेश्वर, जो इतना शक्तिशाली है, फिर भी इंसान को चुनने की आज़ादी देता है? यह सवाल आज भी खुला रहता है, और शायद इसका जवाब पूरी तरह कभी नहीं मिलेगा।
The Common Thread
यह "वादा किया हुआ देश" सिर्फ एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं था, यह परमेश्वर की उस वाचा यानी करार का हिस्सा था जो उन्होंने अब्राहम से बहुत पहले बाँधा था। परमेश्वर अपनी बात पर टिके रहते हैं, भले ही लोग डगमगाएँ। बाद में, जब इस्राएल बार-बार इस आशीष और श्राप के रास्ते पर चूकते रहे, तब परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने वह आज्ञाकारिता दिखाई जो इस्राएल कभी पूरी तरह नहीं दिखा सका, और उन्होंने अपने प्राण देकर हमें उस श्राप से मुक्त किया जो हमारे गलत चुनावों की वजह से हम पर आ सकता था।
For You
तुम भी हर दिन चुनाव करते हो, स्कूल में सच बोलना या झूठ बोलना, दोस्तों के साथ ईमानदार रहना या नहीं। यह अध्याय कहता है कि यह चुनाव छोटा नहीं है, यह असर डालता है। परमेश्वर चाहते हैं कि तुम उनकी बातें सिर्फ चर्च में नहीं, बल्कि घर में, रास्ते पर, सोते और जागते समय याद रखो। इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें दीवारों पर आयतें लिखनी हैं, बल्कि यह कि परमेश्वर का वचन तुम्हारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बने।
Talk About It
अगर परमेश्वर इतने ताकतवर हैं, तो उन्होंने लोगों को खुद चुनने की आज़ादी क्यों दी, आशीष चुनने की या श्राप चुनने की?
मूसा कहते हैं कि परमेश्वर की बातें घर में, रास्ते में, हर जगह याद रखी जाएँ। तुम्हारी ज़िंदगी में कौन सी जगह है जहाँ परमेश्वर को याद रखना सबसे मुश्किल लगता है?
Praying Together
हे परमेश्वर, आपने इस्राएल को आशीष और श्राप दोनों दिखाए, और आज भी आप हमें चुनने की आज़ादी देते हैं। हमें ऐसा मन दीजिए जो आपसे प्रेम करे, न डर से, बल्कि इसलिए कि हम जानते हैं आप भले हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
व्यवस्थाविवरण 11 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
व्यवस्थाविवरण 11 किस विषय में है?
व्यवस्थाविवरण 11 क्या कहता है?
व्यवस्थाविवरण 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे व्यवस्थाविवरण 11 से क्या सीख सकते हैं?
व्यवस्थाविवरण 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
इसलिए जो विधियाँ और नियम मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ उन सब के मानने में चौकसी करना।" मूसा यह उस देश की दहलीज़ पर कहता है जो मुफ़्त में मिलने वाला था। ज़मीन तोहफ़ा थी, पर उसमें रहना चौकसी माँगता था। तेरी ज़िंदगी भी अनुग्रह है। सवाल यह है कि क्या तू उसे लापरवाही से जी रहा है? ध्यान रखना डर की नहीं, प्रेम की निशानी है।
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