7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

इफिसियों 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पौलुस जेल में बैठा है। हाथों में जंजीर, दीवारें ठंडी और सख्त। फिर भी वह कलम उठाता है और इफिसुस के लोगों को चिट्ठी लिखता है। वह कहता है, "जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।" जैसे कोई राजा अपने सैनिकों को बुलाता है, वैसे ही परमेश्वर ने अपने लोगों को बुलाया है। पौलुस कहता है, दीनता से रहो, धीरज रखो, प्रेम से एक दूसरे को सह लो। फिर वह एक तस्वीर बनाता है, एक शरीर की तस्वीर। एक ही देह, एक ही आत्मा, एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही परमेश्वर और पिता। जैसे एक जहाज़ पर एक मल्लाह पाल खींचता है और दूसरा पतवार पकड़ता है, वैसे ही मसीह ने अपने लोगों को अलग-अलग काम दिए हैं। किसी को प्रेरित बनाया, किसी को भविष्यद्वक्ता, किसी को सुसमाचार सुनानेवाला, किसी को रखवाला और उपदेशक। सबका काम अलग, पर मकसद एक, सब मिलकर मसीह की देह को मज़बूत बनाना।

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस चाहता है कि इफिसुस के लोग अब बच्चों जैसे न रहें, जो हर हवा से इधर-उधर उछाले जाते हैं। उसके बदले वे बड़े हों, सच बोलें, प्रेम में बढ़ते जाएँ। फिर वह एक बड़ी तस्वीर देता है, पुराने कपड़े उतारने की। जैसे कोई गंदा, फटा हुआ कोट उतारकर एक साफ नया कोट पहनता है, वैसे ही पुराना स्वभाव उतारकर नया स्वभाव पहनना है, वह स्वभाव जो परमेश्वर के अनुसार सच्चाई और पवित्रता में बना है। यह सिर्फ नियम नहीं है, यह एक असली बदलाव है, अंदर से बाहर तक।

एक सूत्र में बंधी कहानी

क्या यह यीशु से जुड़ा है? हाँ, पूरी तरह। पौलुस कहता है, "वह ऊँचे पर चढ़ा" और नीचे भी उतरा था। यीशु धरती पर आए, हमारे बीच रहे, फिर क्रूस पर मरे और फिर जी उठकर स्वर्ग में चढ़ गए। यह वही यीशु है जो हमें उपहार देता है, ताकि हम अकेले न रहें। परमेश्वर हमेशा से चाहते थे कि उनके लोग एक परिवार की तरह जुड़े रहें, एक शरीर की तरह जिसमें हर हिस्सा दूसरे की मदद करता है। यह कोई नया विचार नहीं, यह शुरू से परमेश्वर की योजना का हिस्सा है।

तुम्हारे लिए

पौलुस कुछ बहुत सीधी बातें भी कहता है। झूठ मत बोलो, सच बोलो, क्योंकि हम एक दूसरे के अंग हैं। क्रोध करो तो ठीक है, पर सूरज डूबने से पहले उसे छोड़ दो। सोचो, सूरज लाल होकर पहाड़ों के पीछे छिप रहा है, और तुम्हारा गुस्सा अब भी दिल में सुलग रहा है। पौलुस कहता है, उसे वहीं जाने दो। मुँह से गंदी बात नहीं, बल्कि ऐसी बात निकले जो दूसरे को मज़बूत करे। और सबसे बड़ी बात, एक दूसरे को माफ करो, जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हें माफ किया है। जब तुम्हारा भाई-बहन तुम्हें चिढ़ाए और तुम्हारा मन कड़वा हो जाए, तब याद करना, परमेश्वर ने पहले तुम्हें माफ किया।

बातचीत करें

क्या तुम्हें कभी किसी को माफ करना बहुत मुश्किल लगा? उस समय क्या हुआ था?

तुम्हारे परिवार या कलीसिया में हर किसी का अलग काम है, जैसे शरीर के अलग अंग। तुम्हारा काम क्या है?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप हमें अलग-अलग बनाकर एक परिवार बनाते हैं। हमें धीरज दीजिए, प्रेम दीजिए, और जब हमारा दिल गुस्से से भर जाए तो हमें जल्दी माफ करना सिखाइए। हमें नया स्वभाव दीजिए, जो आपके जैसा हो। यीशु के नाम में, आमीन।

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इफिसियों 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

इफिसियों 4 किस विषय में है?
पौलुस जेल में बैठा है। हाथों में जंजीर, दीवारें ठंडी और सख्त। फिर भी वह कलम उठाता है और इफिसुस के लोगों को चिट्ठी लिखता है। वह कहता है, "जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।" जैसे कोई राजा अपने सैनिकों को बुलाता है, वैसे ही परमेश्वर ने अपने लोगों को बुलाया है। पौलुस कहता है, दीनता से रहो, धीरज रखो, प्रेम से एक दूसरे को सह लो। फिर वह एक तस्वीर बनाता है, एक शरीर की तस्वीर। एक ही देह, एक ही आत्मा, एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही परमेश्वर और पिता। जैसे एक जहाज़ पर एक मल्लाह पाल खींचता है और दूसरा पतवार पकड़ता है, वैसे ही मसीह ने अपने लोगों को अलग-अलग काम दिए हैं। किसी को प्रेरित बनाया, किसी को भविष्यद्वक्ता, किसी को सुसमाचार सुनानेवाला, किसी को रखवाला और उपदेशक। सबका काम अलग, पर मकसद एक, सब मिलकर मसीह की देह को मज़बूत बनाना।
इफिसियों 4 क्या कहता है?
पौलुस चाहता है कि इफिसुस के लोग अब बच्चों जैसे न रहें, जो हर हवा से इधर-उधर उछाले जाते हैं। उसके बदले वे बड़े हों, सच बोलें, प्रेम में बढ़ते जाएँ। फिर वह एक बड़ी तस्वीर देता है, पुराने कपड़े उतारने की। जैसे कोई गंदा, फटा हुआ कोट उतारकर एक साफ नया कोट पहनता है, वैसे ही पुराना स्वभाव उतारकर नया स्वभाव पहनना है, वह स्वभाव जो परमेश्वर के अनुसार सच्चाई और पवित्रता में बना है। यह सिर्फ नियम नहीं है, यह एक असली बदलाव है, अंदर से बाहर तक।
इफिसियों 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्या यह यीशु से जुड़ा है? हाँ, पूरी तरह। पौलुस कहता है, "वह ऊँचे पर चढ़ा" और नीचे भी उतरा था। यीशु धरती पर आए, हमारे बीच रहे, फिर क्रूस पर मरे और फिर जी उठकर स्वर्ग में चढ़ गए। यह वही यीशु है जो हमें उपहार देता है, ताकि हम अकेले न रहें। परमेश्वर हमेशा से चाहते थे कि उनके लोग एक परिवार की तरह जुड़े रहें, एक शरीर की तरह जिसमें हर हिस्सा दूसरे की मदद करता है। यह कोई नया विचार नहीं, यह शुरू से परमेश्वर की योजना का हिस्सा है।
बच्चे इफिसियों 4 से क्या सीख सकते हैं?
पौलुस कुछ बहुत सीधी बातें भी कहता है। झूठ मत बोलो, सच बोलो, क्योंकि हम एक दूसरे के अंग हैं। क्रोध करो तो ठीक है, पर सूरज डूबने से पहले उसे छोड़ दो। सोचो, सूरज लाल होकर पहाड़ों के पीछे छिप रहा है, और तुम्हारा गुस्सा अब भी दिल में सुलग रहा है। पौलुस कहता है, उसे वहीं जाने दो। मुँह से गंदी बात नहीं, बल्कि ऐसी बात निकले जो दूसरे को मज़बूत करे। और सबसे बड़ी बात, एक दूसरे को माफ करो, जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हें माफ किया है। जब तुम्हारा भाई-बहन तुम्हें चिढ़ाए और तुम्हारा मन कड़वा हो जाए, तब याद करना, परमेश्वर ने पहले तुम्हें माफ किया।
इफिसियों 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें कभी किसी को माफ करना बहुत मुश्किल लगा? उस समय क्या हुआ था?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

और सबका एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर, और सब के मध्य में, और सब में है।" ध्यान दे, पौलुस यह बात कलीसिया की फूट के बीच लिख रहा है। जिस भाई से तेरा मन खिंचा हुआ है, उसी के भीतर भी वही पिता बसा है। उसे ठुकराते समय तू किसे दूर कर रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

हर एक अंग के ठीक-ठीक कार्य करने से" शरीर बढ़ता है। यानी जोड़ भी ज़रूरी है, वह हिस्सा जो दिखता नहीं, बस दो को थामे रखता है। शायद कलीसिया में तुम्हारा काम वही है, किसी को जोड़े रखना, थामे रखना। छोटा लगता है? पर तुम्हारे बिना देह वहीं रुक जाती है। और यह सब बढ़ोतरी एक ही दिशा में है, प्रेम में।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

जीत के बाद राजा लूट का माल अपने लोगों में बाँटता था। मसीह भी ऊँचे पर चढ़ा, पर जीत अपने पास नहीं रखी: "वह ऊँचे पर चढ़ा और बन्धुवाई को बन्दी बनाकर ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।" जो तुझे बाँधे रखता था, अब वही उसका बन्दी है। और तेरे भीतर जो वरदान है, वह उसी विजय का हिस्सा है। उसे दबाकर मत रख।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; बल्कि भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे, इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।"

रुकिए और देखिए, पौलुस केवल यह नहीं कहते कि चोरी छोड़ो। वह उन्हीं हाथों को नया काम देते हैं। जो हाथ लेने के लिए बढ़ते थे, वही अब देने के लिए मेहनत करें।

क्या आपका परिश्रम केवल अपने लिए है, या उसमें किसी ज़रूरतमंद का हिस्सा भी छिपा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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