एस्तेर 3
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
कहानी की व्याख्या
राजा क्षयर्ष ने हामान नाम के एक आदमी को बहुत बड़ा पद दिया। हामान अगागी था, यानी वह एक ऐसे कुल से आया था जो बहुत पहले से इस्राएल के लोगों का दुश्मन था। राजा ने आज्ञा दी कि सब लोग हामान के सामने झुकें और दण्डवत करें। यह उस समय की एक आम बात थी, जैसे आज कोई सलाम करता है।
पर एक आदमी था जो नहीं झुका। उसका नाम मोर्दकै था। वह एक यहूदी था। दूसरे कर्मचारी उससे रोज़ पूछते, "तू क्यों नहीं झुकता? राजा की आज्ञा है!" मोर्दकै ने कहा कि वह यहूदी है, और शायद इसीलिए वह हामान को वैसा सम्मान नहीं दे सकता जैसा परमेश्वर के लिए रखा गया है।
जब हामान को यह बात पता चली, तो उसका गुस्सा भड़क उठा। पर वह सिर्फ मोर्दकै से बदला लेने पर संतुष्ट नहीं हुआ। उसने सोचा, "मोर्दकै की पूरी जाति को ही मिटा देना चाहिए।" यह सोचकर हैरानी होती है। एक आदमी नहीं झुका, और हामान लाखों लोगों को मारना चाहता है।
हामान ने चिट्ठी डलवाई, यानी लॉटरी की तरह पासा फेंका, यह देखने के लिए कि कौन-सा दिन यहूदियों को मारने के लिए अच्छा होगा। अदार महीने का तेरहवाँ दिन चुना गया। फिर हामान राजा के पास गया और झूठ मिलाकर सच बोला। उसने कहा, "एक जाति है जो अलग रहती है और राजा के कानून नहीं मानती। इन्हें मिटा देना चाहिए।" उसने राजा को दस हज़ार किक्कार चाँदी देने का वादा भी किया, जो बहुत बड़ी रकम थी।
राजा ने बिना सोचे-समझे अपनी मुहर वाली अंगूठी हामान को दे दी। यह अंगूठी बहुत ताकतवर थी, इससे मुहर लगी हुई कोई भी आज्ञा पूरे राज्य में मानी जाती थी। पूरे राज्य में चिट्ठियाँ भेजी गईं कि एक ही दिन में सब यहूदी, बच्चे, बूढ़े, स्त्रियाँ, सब मार डाले जाएँ।
अध्याय का आखिरी वाक्य दिल में चुभता है। राजा और हामान बैठकर दाखमधु पी रहे थे, पर शूशन नगर में घबराहट फैल गई थी।
इसका क्या मतलब है?
यह अध्याय पढ़ते हुए हमारे मन में सवाल उठते हैं। परमेश्वर कहाँ हैं? पूरी एस्तेर की किताब में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता। पर वे छिपे हुए काम कर रहे हैं, यह हम आगे देखेंगे।
यह भी दिखाई देता है कि बुराई कैसे बढ़ती है। हामान का घमंड, फिर गुस्सा, फिर बदला, फिर पूरी जाति को मिटाने की योजना। एक छोटी नाराज़गी से शुरू होकर यह भयानक रूप ले लेती है। और राजा? वह बिना जाँच किए एक फैसला ले लेता है जिससे हज़ारों लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है।
मोर्दकै भी ध्यान देने लायक है। वह डरता नहीं। वह जानता है कि झुकने से उसकी जान बच जाएगी, पर वह अपनी पहचान नहीं छिपाता। वह कहता है, "मैं यहूदी हूँ।"
बड़ी कहानी से जोड़
बाइबल में यह कहानी अकेली नहीं है। परमेश्वर ने अब्राहम से बहुत पहले वादा किया था कि उनके वंश से पूरी दुनिया के लिए आशीष आएगी। और उसी वंश से एक दिन प्रभु यीशु मसीह आने वाले थे। अगर हामान अपनी योजना में जीत जाता, तो यहूदी लोग मिट जाते, और… क्या यीशु का आना रुक जाता?
यह एक बड़ा सवाल है। पर बाइबल हमें बार-बार दिखाती है कि परमेश्वर की योजना नहीं टूटती। शैतान बार-बार कोशिश करता है, फिरौन के ज़रिए, हामान के ज़रिए, हेरोदेस के ज़रिए, पर परमेश्वर अपने वादे को पूरा करते हैं। यीशु आए, क्रूस पर मरे, और जी उठे।
तुम्हारे लिए
मोर्दकै ने अपनी पहचान नहीं छिपाई। आज भी कभी-कभी ऐसा होता है कि स्कूल में या दोस्तों के बीच तुम्हें लगता है, "अगर मैं कहूँगा कि मैं यीशु पर विश्वास करता हूँ, तो लोग हँसेंगे।" ऐसे वक्त क्या करोगे?
तुम्हें ज़ोर से चिल्लाने की ज़रूरत नहीं है। पर तुम भी, मोर्दकै की तरह, चुपचाप पर पक्के तरीके से खड़े रह सकते हो। और याद रखो, जब हालात बहुत उलझे हुए दिखते हैं और परमेश्वर चुप लगते हैं, तब भी वे काम कर रहे होते हैं। सिर्फ हम अभी देख नहीं पाते।
बात करो
अगर तुम मोर्दकै की जगह होते, तो क्या तुम भी नहीं झुकते? या डर से झुक जाते? ईमानदारी से सोचो।
अध्याय के आखिर में राजा और हामान दाखमधु पी रहे हैं, पर शहर में लोग रो रहे हैं। यह पढ़कर तुम्हें कैसा लगता है? क्या आज भी दुनिया में ऐसा होता है?
साथ प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि आप चुप हैं और बुरे लोग जीत रहे हैं। पर आप छिपकर भी काम करते हैं। हमें मोर्दकै जैसा साहस दीजिए कि हम आपके हों और यह बताने से न डरें। और उन बच्चों को भी याद रखिए जो आज भी अपने विश्वास के कारण डर में जी रहे हैं। यीशु के नाम में, आमीन।
एस्तेर 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एस्तेर 3 किस विषय में है?
एस्तेर 3 क्या कहता है?
एस्तेर 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे एस्तेर 3 से क्या सीख सकते हैं?
एस्तेर 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मोर्दकै ने राजा की जान बचाई, और अगले ही पन्ने पर यह लिखा है, "इन बातों के बाद राजा क्षयर्ष ने अगागी हम्मदाता के पुत्र हामान को उन्नति देकर बड़ा किया।" सही करने वाला अनदेखा रह गया, और दूसरा ऊपर चढ़ गया। तेरे साथ भी ऐसा हुआ है? पर राजा की बही में मोर्दकै का नाम लिखा रह गया था। भूला नहीं गया, बस समय नहीं आया था।
हामान अपनी नफरत के लिए जेब खोलने को तैयार था: "मैं राजा का काम करनेवालों के हाथ में राजभण्डार में पहुँचाने के लिये दस हजार किक्कार चाँदी दूँगा।" घृणा सस्ती नहीं होती, वह समय, नींद और मन का चैन माँगती है। जिस व्यक्ति से तुम नाराज़ हो, उस पर तुम रोज़ कितना खर्च कर रहे हो? और क्या वह कीमत चुकाने लायक है?
हामान ने चिट्ठी डाली, और वह गिरी बारहवें महीने पर। यानी ग्यारह महीने का समय बीच में आ गया। हामान ने इसे संयोग समझा, पर उसी अंतराल में एस्तेर रानी बनी, मोर्दकै ने सुना, और राजा की नींद उड़ी।
तेरी ज़िंदगी में भी जो देर लग रही है, वह खाली समय नहीं है। परमेश्वर उसी में तेरा बचाव तैयार कर रहा है।
तब राजा ने अपनी अंगूठी अपने हाथ से उतारकर हम्मदाता अगागी के पुत्र हामान को जो यहूदियों का बैरी था, दे दी।" राजा ने एक बार भी नहीं पूछा कि वह जाति कौन है, उसका दोष क्या है। बस अंगूठी उतार दी। सोचो, तुम अपनी सहमति किन हाथों में सौंप देते हो? किसकी बात पर बिना जाँचे सिर हिला देते हो? कभी एक चुप्पी भी किसी की जान की कीमत बन जाती है।
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