एस्तेर 9
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एस्तेर की पुस्तक का यह नौवाँ अध्याय एक बहुत ही खास दिन के बारे में बताता है। अदार महीने का तेरहवाँ दिन। यही वह दिन था जिसे हामान ने चुना था, यहूदियों को मिटा देने के लिए। पर देखो, कैसे सब कुछ उलट गया।
जिस दिन यहूदियों के दुश्मन उन पर हमला करने वाले थे, उसी दिन यहूदी खुद इकट्ठे हुए और अपनी रक्षा करने के लिए खड़े हो गए। सिर्फ यही नहीं, प्रान्तों के हाकिम और अधिपति भी उनकी मदद करने लगे। क्यों? क्योंकि मोर्दकै अब राजा के महल में बहुत बड़ा आदमी बन चुका था। उसकी कीर्ति सब जगह फैल गई थी, और लोगों के मन में उसका डर बैठ गया था।
शूशन नगर में यहूदियों ने पाँच सौ लोगों को मार डाला, और हामान के दसों बेटों को भी। ध्यान से पढ़ो, बाइबल एक बात बार-बार दोहराती है: उन्होंने धन को नहीं लूटा। यह ज़रूरी है। यह लड़ाई पैसे के लिए नहीं थी, बल्कि जान बचाने के लिए थी।
राजा ने एस्तेर से पूछा कि वह और क्या चाहती है। एस्तेर ने एक कठिन बात माँगी, कि शूशन में एक दिन और यह करने की आज्ञा दी जाए, और हामान के बेटों के शव खम्भे पर लटकाए जाएँ। यह पढ़ने में हमें अजीब लग सकता है। पर उस समय ऐसा करने से लोगों को यह साफ दिख जाता था कि बुराई की योजना का अंत क्या होता है।
पूरे राज्य में यहूदियों ने कुल पचहत्तर हज़ार दुश्मनों को हराया। और फिर, चौदहवें दिन उन्होंने विश्राम किया, भोज किया, और खुशी मनाई।
मोर्दकै ने चिट्ठियाँ लिखकर सब यहूदियों को एक आज्ञा भेजी: हर साल इन दो दिनों को याद रखो। इनका नाम रखा गया "पूरीम", उस "पूर" शब्द से जिसका मतलब है "चिट्ठी" या "पासा"। हामान ने पासा फेंककर वह दिन चुना था जिस दिन यहूदी मरने वाले थे, पर परमेश्वर ने वही दिन खुशी का दिन बना दिया। पूरीम के दिन आज भी यहूदी लोग मनाते हैं, इतने सालों बाद भी।
इसका क्या मतलब है?
एस्तेर की पूरी किताब में एक अजीब बात है: परमेश्वर का नाम कहीं भी नहीं आता। एक बार भी नहीं। फिर भी, उनका हाथ हर पन्ने पर दिखाई देता है। जो दिन मौत का दिन होना था, वह जीवन का दिन बन गया। जो योजना यहूदियों को मिटाने की थी, वह हामान के अपने सिर पर पलट आई।
बाइबल कहती है कि "शोक आनन्द से, और विलाप खुशी से बदला गया।" यह छोटा-सा वाक्य पूरी किताब का सार है। परमेश्वर चुपचाप काम करते हैं, पर वे काम करते हैं।
यहाँ एक बात है जो सोचने लायक है: लड़ाई और मौत के बारे में पढ़ना कठिन लगता है। और ईमानदारी से कहूँ, बाइबल भी इसे छिपाती नहीं। यह असली दुनिया है, जहाँ बुराई असली है, और बचाव की भी कीमत होती है।
जोड़ने वाला धागा
हामान अगागी वंश का था, यानी अमालेकियों में से। ये वही लोग थे जो सदियों से परमेश्वर के लोगों के दुश्मन थे। उनकी योजना थी कि परमेश्वर के वादे का वंश ही मिटा दिया जाए। अगर सारे यहूदी मर जाते, तो यीशु मसीह कैसे आते? क्योंकि यीशु यहूदी वंश में ही जन्म लेने वाले थे।
इसलिए एस्तेर 9 सिर्फ एक जीत की कहानी नहीं है। यह उस बड़ी कहानी का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर अपने वादे को बचाते हैं। पूरीम की खुशी उस बड़ी खुशी की तरफ इशारा करती है, जब यीशु आकर मृत्यु को ही हरा देंगे। जैसे यहाँ मौत का दिन खुशी का दिन बना, वैसे ही क्रूस पर, जो दिन सबसे अंधेरा लगा, वही दिन हमारे बचाव का दिन बन गया।
तुम्हारे लिए
कभी-कभी तुम्हें लगता है कि परमेश्वर चुप हैं। जब स्कूल में कुछ गलत होता है, जब कोई तुम्हें दुख देता है, जब कोई बात समझ नहीं आती। एस्तेर की कहानी तुम्हें कुछ बताती है: परमेश्वर काम कर रहे हैं, चाहे तुम उन्हें देखो या नहीं।
तुम भी मोर्दकै या एस्तेर जैसे बन सकते हो। सही समय पर सही जगह पर खड़े होकर, सच बोलकर, दूसरों की मदद करके। और जब परमेश्वर तुम्हारे जीवन में कुछ अच्छा करते हैं, उसे भूलो मत। यहूदियों ने पूरीम बनाया याद रखने के लिए। तुम भी अपनी डायरी में या मन में उन दिनों को याद रखो जब परमेश्वर ने तुम्हारी मदद की।
बात करो
अगर तुम्हें एस्तेर की जगह होना पड़ता, तो क्या तुम भी राजा के सामने जाकर बात करने की हिम्मत करते? क्यों या क्यों नहीं?
एस्तेर की किताब में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता, फिर भी उनका हाथ हर जगह दिखता है। तुम्हारे अपने जीवन में कहाँ लगता है कि परमेश्वर चुपचाप काम कर रहे हैं?
मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप तब भी काम करते हैं जब हम आपको देख नहीं पाते। धन्यवाद कि आपने एस्तेर और मोर्दकै के द्वारा अपने लोगों को बचाया, और यीशु के द्वारा हमें भी बचाया। हमें भी हिम्मत दीजिए कि सही समय पर सही बात कह सकें। आमीन।
एस्तेर 9 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एस्तेर 9 किस विषय में है?
एस्तेर 9 क्या कहता है?
एस्तेर 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे एस्तेर 9 से क्या सीख सकते हैं?
एस्तेर 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शूशन के यहूदियों को एक दिन ज़्यादा लड़ना पड़ा, इसलिए उनका विश्राम भी एक दिन बाद आया। उन्होंने "विश्राम करके भोज और आनन्द का दिन ठहराया।" आनन्द लड़ाई के बीच नहीं, थमने के बाद आया। तुम्हारी लड़ाई शायद दूसरों से लंबी खिंच रही हो, पर तुम्हारा विश्राम रद्द नहीं हुआ, बस उसका दिन अलग है।
पर्मशता, अरीसै, अरीदै और वैजाता।" ऐसे नाम जिन्हें हम पढ़ते हुए फटाफट पार कर जाते हैं। पर सोचो, हामान ने पूरी जाति का नाम मिटाने की ठानी थी, और अंत में इतिहास में उसके ही बेटों के नाम बस इसी एक कारण से लिखे रह गए, कि वे गिर गए। नफरत जो विरासत में देते हैं, वह बच्चों तक पहुँचती है। तुम अपने पीछे क्या छोड़ रहे हो?
पूरीम का यह पर्व केवल एक जीत का उत्सव नहीं था। एस्तेर 9:31 में लिखा है कि उन्होंने "उपवास और विलाप" के दिनों को भी याद रखने की ठान ली। खुशी के बीच वे उन आँसुओं को नहीं भूले जो कभी बहे थे। तुम्हारे जीवन में भी शायद कोई ऐसा समय था जब तुम रोए थे। उसे मिटाओ मत। वही तो गवाही है कि परमेश्वर ने तुम्हें कहाँ से निकाला।
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