नहूम 1
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
नहूम एक भविष्यवक्ता थे। उन्हें परमेश्वर ने एक बहुत बड़े और शक्तिशाली शहर के बारे में एक संदेश दिया, जिसका नाम था नीनवे। नीनवे अश्शूर देश की राजधानी थी। अश्शूर के लोग बहुत क्रूर थे। वे दूसरे देशों पर हमला करते, लोगों को गुलाम बनाते, और परमेश्वर की प्रजा इस्राएल को सताते थे।
क्या तुम्हें याद है योना की कहानी? योना भी इसी नीनवे शहर गए थे, और तब लोगों ने पश्चाताप किया था। पर अब, बहुत साल बाद, नीनवे फिर से बुरी हो गई थी। और नहूम को परमेश्वर ने कहा कि अब उसका न्याय होगा।
नहूम पहले परमेश्वर के बारे में बताते हैं। वे कहते हैं कि परमेश्वर जलन रखनेवाले हैं, यानी वे अपने लोगों से इतना प्रेम करते हैं कि जब कोई उन्हें दुख देता है, तो चुप नहीं रहते। परमेश्वर देर से क्रोध करते हैं। इसका मतलब है कि वे धीरज रखते हैं, बहुत मौका देते हैं। पर वे बुराई को हमेशा के लिए बर्दाश्त नहीं करते।
फिर नहूम एक तस्वीर खींचते हैं जो लगभग डरावनी है। परमेश्वर जब आते हैं, तो बवंडर उनके पैरों तले धूल की तरह है। बड़ी-बड़ी नदियाँ सूख जाती हैं। पहाड़ काँपते हैं। कौन उनके सामने खड़ा रह सकता है?
लेकिन ठीक बीच में, पद 7 में, सब कुछ बदल जाता है। नहूम लिखते हैं: "यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" वही परमेश्वर जो शत्रुओं के लिए तूफान की तरह हैं, अपने बच्चों के लिए एक मजबूत किला हैं।
अंत में नहूम यहूदा के लोगों से कहते हैं: देखो, पहाड़ों पर एक दूत आ रहा है, जो शुभ समाचार लाता है! नीनवे का जूआ, यानी वह भारी बोझ जो अश्शूर ने इस्राएल पर रखा था, अब टूटेगा।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें परमेश्वर के दो पक्ष दिखाता है, और दोनों सच हैं। परमेश्वर पवित्र और न्यायी हैं। वे बुराई को नज़रअंदाज़ नहीं करते। जो लोग दूसरों को दुख देते हैं और परमेश्वर के विरुद्ध योजनाएँ बनाते हैं, उन्हें एक दिन जवाब देना होगा।
पर वही परमेश्वर भले भी हैं। जो लोग उनके पास शरण लेते हैं, उन्हें वे जानते हैं। "सुधि रखते हैं" का मतलब है, वे भूलते नहीं। तुम उनके लिए एक नंबर नहीं हो, तुम उनके बच्चे हो।
शायद तुम सोचो: पर परमेश्वर इतने कठोर क्यों लगते हैं? यह कठिन सवाल है। मुझे लगता है कि जब हम बुराई को सच में समझें, यानी कितना दर्द अश्शूरियों ने दूसरों को दिया, तब हमें समझ आता है कि अगर परमेश्वर कुछ न करते, तो वे भले नहीं होते।
The Common Thread
पद 15 में एक अनमोल वाक्य है: "पहाड़ों पर शुभ समाचार का सुनानेवाला आ रहा है!" यही वचन नए नियम में फिर आता है, रोमियों 10:15 में। वहाँ पौलुस कहते हैं कि यीशु मसीह के बारे में सुनाना ही असली शुभ समाचार है।
नहूम के समय में शुभ समाचार यह था कि अश्शूर का जूआ टूटेगा। पर एक और भी बड़ा जूआ है, जो हम सब पर है, पाप का जूआ। यीशु मसीह वह असली दूत हैं जो पहाड़ पर आए, और क्रूस पर उन्होंने वह जूआ तोड़ा। अब हम आज़ाद हो सकते हैं।
For You
पद 7 को एक बार फिर पढ़ो। संकट के दिन में परमेश्वर एक दृढ़ गढ़ हैं। सोचो, तुम्हारे "संकट के दिन" कौन से हैं? शायद स्कूल में कोई तुम्हें चिढ़ाता है। शायद घर में कुछ मुश्किल चल रहा है। शायद तुम्हें रात को डर लगता है।
एक गढ़ ऐसी जगह है जहाँ तुम भाग कर छिप सकते हो। परमेश्वर कहते हैं: मेरे पास आओ। यह तुम प्रार्थना में कर सकते हो। ज़रूरी नहीं कि तुम्हें बड़े शब्द आते हों। बस कहो: "प्रभु, मैं आपके पास आ रहा हूँ।" वे तुम्हारी सुधि रखते हैं।
और एक बात। अगर परमेश्वर बुराई से नफरत करते हैं, तो हमें भी झूठ, धमकाना, और दूसरों को दुख देना हल्के में नहीं लेना चाहिए। हम खुद भी छोटे "अश्शूर" बन सकते हैं। पर परमेश्वर के पास क्षमा है, अगर हम उनके पास लौटें।
Talk About It
पद 2 में परमेश्वर बदला लेनेवाले हैं, और पद 7 में वे भले हैं। ये दोनों बातें एक साथ कैसे सच हो सकती हैं?
"संकट के दिन में परमेश्वर एक दृढ़ गढ़ हैं।" तुम्हारे जीवन में ऐसा कौन सा संकट है जहाँ तुम्हें उनकी शरण चाहिए?
Praying Together
प्रभु परमेश्वर, आप भले हैं। आप बुराई से नफरत करते हैं, पर अपने बच्चों की सुधि रखते हैं। जब मुझे डर लगे या कुछ मुश्किल हो, मुझे याद दिलाइए कि आप मेरे गढ़ हैं। यीशु मसीह के लिए धन्यवाद, जो शुभ समाचार लेकर आए। आमीन।
नहूम 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहूम 1 किस विषय में है?
नहूम 1 क्या कहता है?
नहूम 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे नहूम 1 से क्या सीख सकते हैं?
नहूम 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
अश्शूर की सेना उस समय अजेय लगती थी, उसके सामने कोई टिक नहीं पाता था। पर परमेश्वर कहता है, "चाहे वे पूरी शक्ति में हों और बहुत भी हों, तौभी वे काटे जाएँगे।" जो आज तुझे कुचल रहा है, उसकी भी एक समय-सीमा परमेश्वर ने तय कर रखी है। और यहूदा से कहा गया, "मैंने तुझे दुःख दिया है, परन्तु अब तुझे और दुःख न दूँगा।" तेरा दुःख अनन्त नहीं है।
नहूम की किताब नीनवे पर आती आग से भरी है, बादल, आँधी, पिघलते पहाड़। और उसी गर्जन के बीच अचानक यह पंक्ति आती है: "यहोवा भला है, संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" ध्यान दे, वह भीड़ को नहीं, तुझे जानता है। जो उसकी ओट में दुबका है, उसका नाम उसे याद है। तेरा तूफान भी उसकी भलाई को नहीं मिटा सका।
नीनवे ने सोचा था कि उसकी क्रूरता का हिसाब कोई नहीं रख रहा। पर नहूम कहता है, "यहोवा जलन रखनेवाला और बदला लेनेवाला परमेश्वर है।" यह जलन ठंडी नहीं, यह प्रेम की आग है, अपने लोगों के लिए। जो तुझे कुचलते हैं, वह उन्हें भूलता नहीं। तेरे आँसू उसके सामने दर्ज हैं। सवाल यह है, क्या तू हिसाब उसके हाथ में छोड़ पाएगा?
वह समुद्र को घुड़कता और उसे सुखा देता है, और सब महानदों को सुखा डालता है।" बाशान, कर्मेल, लबानोन, ये उस समय की सबसे हरी-भरी जगहें थीं। जिन पर लोग भरोसा करते थे कि ये कभी नहीं मुरझाएँगी, वे परमेश्वर की एक घुड़की से कुम्हला जाती हैं। तेरे जीवन में भी कोई ऐसा सहारा है जिसे तू अटल समझ बैठा है? नीनवे ने भी यही सोचा था।
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