7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

निर्गमन 24

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वे हारून, नादाब, अबीहू और इस्राएल के सत्तर पुरनियों के साथ पहाड़ पर आएँ, लेकिन केवल मूसा ही परमेश्वर के बिलकुल पास आ सकते थे। बाकी लोग दूर से ही झुककर दण्डवत करेंगे। सबसे पहले मूसा ने लोगों को परमेश्वर की सब बातें सुनाईं, और लोगों ने एक साथ कहा कि वे वह सब मानेंगे जो यहोवा ने कहा है। मूसा ने ये सब बातें लिख लीं। फिर उन्होंने एक वेदी बनाई और बारह खम्भे खड़े किए, एक-एक इस्राएल के हर गोत्र के लिए। जवानों ने बलिदान चढ़ाए। मूसा ने पशुओं का आधा लहू वेदी पर छिड़का और आधा कटोरों में रखा। वाचा की किताब पढ़ी गई, यानी वह किताब जिसमें परमेश्वर और इस्राएल के बीच का समझौता लिखा था। लोगों ने फिर कहा कि वे मानेंगे और आज्ञा का पालन करेंगे। तब मूसा ने बचा हुआ लहू लोगों पर छिड़कते हुए कहा कि यह वाचा का लहू है।

इसके बाद मूसा, हारून, नादाब, अबीहू और सत्तर पुरनिए पहाड़ पर गए और उन्होंने परमेश्वर का दर्शन किया। उनके पैरों तले मानो नीलमणि जैसा साफ फर्श था, आकाश जितना स्वच्छ। परमेश्वर ने उन पर हाथ नहीं बढ़ाया, और वे खाने-पीने भी बैठे। फिर परमेश्वर ने मूसा को और ऊपर बुलाया ताकि वे पत्थर की पटियाएँ और व्यवस्था पाएँ। मूसा अपने सेवक यहोशू के साथ चढ़ गए। बादल ने पहाड़ को ढक लिया, और परमेश्वर का तेज वहाँ छः दिन तक रहा। सातवें दिन परमेश्वर ने मूसा को बादल में से बुलाया। लोगों को दूर से यह तेज जलती हुई आग जैसा दिखाई देता था। मूसा चालीस दिन और चालीस रात पहाड़ पर रहे।

What Does This Mean?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर और उनके लोगों के बीच एक वाचा बनी, यानी एक गंभीर वादा जो दोनों तरफ से निभाया जाना था। यह केवल कागज़ पर लिखा वादा नहीं था, इसे लहू से पक्का किया गया। लहू जीवन की निशानी है, और जब मूसा ने वह आधा लहू लोगों पर छिड़का, तो यह दिखाया कि परमेश्वर और इस्राएल अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ गए हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लोगों ने दो बार कहा, "हम मानेंगे", लेकिन बाद की कहानी में पता चलता है कि यह वादा निभाना कितना मुश्किल था। यह हमें ईमानदार बनाता है, वादा करना आसान है, उसे निभाना कठिन।

सबसे चकित करने वाली बात है कि पुरनियों ने परमेश्वर को देखा और फिर भी जीवित रहे, बल्कि खाया-पिया। यह कुछ ऐसा है जो आमतौर पर नहीं होता था, क्योंकि परमेश्वर की पवित्रता और मनुष्य का पाप आमतौर पर साथ नहीं रह सकते। यहाँ परमेश्वर स्वयं यह संभव बनाते हैं। यह बताता है कि परमेश्वर पास आना चाहते हैं, दूर रहना नहीं।

The Common Thread

यह वाचा का लहू हमें बहुत आगे की ओर इशारा करता है। जब यीशु मसीह ने अपने चेलों के साथ आखिरी बार भोजन किया, तब उन्होंने प्याले के बारे में कहा कि यह उनका लहू है, जो नई वाचा का लहू है। मूसा के समय लहू जानवरों का था, और वाचा बार-बार टूट जाती थी। यीशु ने अपना ही लहू दिया, एक बार के लिए, ताकि परमेश्वर और लोगों के बीच का रिश्ता पक्का हो जाए। जो पुरनियों के साथ पहाड़ पर हुआ, कि वे परमेश्वर के पास आए और जीवित रहे, वह भी एक झलक है उस दिन की जब परमेश्वर अपने लोगों के साथ पूरी तरह और सीधे रहेंगे।

For You

शायद तुमने भी कभी कोई वादा किया हो जो बाद में निभाना मुश्किल लगा। इस्राएल के लोगों के साथ भी ऐसा हुआ। इससे यह नहीं दिखता कि वादा करना गलत था, बल्कि यह कि हमें अपनी ताकत पर नहीं, परमेश्वर की मदद पर भरोसा रखना चाहिए। जब तुम परमेश्वर से कोई वादा करते हो, चर्च में, प्रार्थना में, या अपने दिल में, तो याद रखना कि परमेश्वर खुद चाहते हैं कि तुम उनके पास आओ, जैसे उन्होंने पुरनियों को अपने पास बुलाया।

Talk About It

लोगों ने कहा "हम मानेंगे", लेकिन क्या तुम्हें लगता है कि यह कहना आसान था या कठिन? क्यों?

पुरनियों ने परमेश्वर को देखा और डरे नहीं। तुम्हें क्या लगता है, उस पल में उनके मन में क्या चल रहा होगा?

Praying Together

हे परमेश्वर, आप अपने लोगों के पास आना चाहते हैं, जैसे आप पहाड़ पर मूसा और पुरनियों के पास आए। धन्यवाद कि यीशु मसीह ने अपना लहू दिया ताकि हम भी आपके पास आ सकें। हमें सिखाइए कि जो वादे हम आपसे करें, उन्हें निभाने के लिए आप ही पर भरोसा रखें। आमीन।

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निर्गमन 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

निर्गमन 24 किस विषय में है?
परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वे हारून, नादाब, अबीहू और इस्राएल के सत्तर पुरनियों के साथ पहाड़ पर आएँ, लेकिन केवल मूसा ही परमेश्वर के बिलकुल पास आ सकते थे। बाकी लोग दूर से ही झुककर दण्डवत करेंगे। सबसे पहले मूसा ने लोगों को परमेश्वर की सब बातें सुनाईं, और लोगों ने एक साथ कहा कि वे वह सब मानेंगे जो यहोवा ने कहा है। मूसा ने ये सब बातें लिख लीं। फिर उन्होंने एक वेदी बनाई और बारह खम्भे खड़े किए, एक-एक इस्राएल के हर गोत्र के लिए। जवानों ने बलिदान चढ़ाए। मूसा ने पशुओं का आधा लहू वेदी पर छिड़का और आधा कटोरों में रखा। वाचा की किताब पढ़ी गई, यानी वह किताब जिसमें परमेश्वर और इस्राएल के बीच का समझौता लिखा था। लोगों ने फिर कहा कि वे मानेंगे और आज्ञा का पालन करेंगे। तब मूसा ने बचा हुआ लहू लोगों पर छिड़कते हुए कहा कि यह वाचा का लहू है।
निर्गमन 24 क्या कहता है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर और उनके लोगों के बीच एक वाचा बनी, यानी एक गंभीर वादा जो दोनों तरफ से निभाया जाना था। यह केवल कागज़ पर लिखा वादा नहीं था, इसे लहू से पक्का किया गया। लहू जीवन की निशानी है, और जब मूसा ने वह आधा लहू लोगों पर छिड़का, तो यह दिखाया कि परमेश्वर और इस्राएल अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ गए हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लोगों ने दो बार कहा, "हम मानेंगे", लेकिन बाद की कहानी में पता चलता है कि यह वादा निभाना कितना मुश्किल था। यह हमें ईमानदार बनाता है, वादा करना आसान है, उसे निभाना कठिन।
निर्गमन 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह वाचा का लहू हमें बहुत आगे की ओर इशारा करता है। जब यीशु मसीह ने अपने चेलों के साथ आखिरी बार भोजन किया, तब उन्होंने प्याले के बारे में कहा कि यह उनका लहू है, जो नई वाचा का लहू है। मूसा के समय लहू जानवरों का था, और वाचा बार-बार टूट जाती थी। यीशु ने अपना ही लहू दिया, एक बार के लिए, ताकि परमेश्वर और लोगों के बीच का रिश्ता पक्का हो जाए। जो पुरनियों के साथ पहाड़ पर हुआ, कि वे परमेश्वर के पास आए और जीवित रहे, वह भी एक झलक है उस दिन की जब परमेश्वर अपने लोगों के साथ पूरी तरह और सीधे रहेंगे।
बच्चे निर्गमन 24 से क्या सीख सकते हैं?
लोगों ने कहा "हम मानेंगे", लेकिन क्या तुम्हें लगता है कि यह कहना आसान था या कठिन? क्यों?
निर्गमन 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आप अपने लोगों के पास आना चाहते हैं, जैसे आप पहाड़ पर मूसा और पुरनियों के पास आए। धन्यवाद कि यीशु मसीह ने अपना लहू दिया ताकि हम भी आपके पास आ सकें। हमें सिखाइए कि जो वादे हम आपसे करें, उन्हें निभाने के लिए आप ही पर भरोसा रखें। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

तब मूसा बादल के बीच में प्रवेश करके पर्वत पर चढ़ गया, और मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहा।" बादल के भीतर सब कुछ धुंधला था, फिर भी मूसा भीतर गया। परमेश्वर के पास जाने का रास्ता हमेशा साफ दिखाई नहीं देता। कभी वह धुंध से होकर जाता है, जहाँ आगे का कुछ नहीं सूझता। तू भी उस धुंध में रुका है? कदम बढ़ा, वह वहीं है।

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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