6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

उत्पत्ति 23

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

उत्पत्ति 23 की व्याख्या

स्पष्टीकरण

अब्राहम की पत्नी सारा एक सौ सताईस वर्ष की थीं। वे कनान देश के किर्यतअर्बा में, जिसे हेब्रोन भी कहते हैं, चल बसीं। अब्राहम बहुत दुखी हुए। वे सारा के शव के पास गए और रोए।

फिर अब्राहम उठे और उस देश के लोगों के पास गए, जिन्हें हित्ती कहा जाता था। उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारे बीच परदेशी हूँ। मुझे दफनाने के लिए भूमि चाहिए।" यह सुनकर क्या तुम सोच सकते हो कि अब्राहम को कैसा लगा होगा? अपनी प्रिय पत्नी को दफनाने के लिए अपनी जमीन भी नहीं थी।

हित्तियों ने कहा, "हमारे प्रभु, आप तो हमारे बीच बड़े प्रधान हैं। आप जो चाहें वह कब्र ले लें।" पर अब्राहम चाहते थे कि यह भूमि उनकी अपनी हो जाए, केवल उधार नहीं। इसलिए उन्होंने एप्रोन नाम के एक आदमी की गुफा माँगी, जो मकपेला नाम की जगह में थी।

एप्रोन सब लोगों के सामने बैठा था। उसने कहा, "मैं तो आपको वह भूमि और गुफा मुफ्त में दे देता हूँ।" पर अब्राहम ने दण्डवत् करके कहा, "नहीं, मैं इसका पूरा दाम दूँगा।" एप्रोन ने कहा, "भूमि का दाम चार सौ शेकेल रूपा है, पर यह कुछ भी नहीं है।" अब्राहम ने तुरंत चार सौ शेकेल तौल दिए, ठीक उतने जितने व्यापारी लिया करते थे।

इस तरह वह गुफा, उसके आसपास की भूमि और पेड़, सब अब्राहम के हो गए। सब हित्तियों के सामने यह पक्का हुआ। अब्राहम ने अपनी पत्नी सारा को उसी गुफा में मिट्टी दी। अब वह भूमि सचमुच अब्राहम की अपनी थी।

इसका क्या अर्थ है?

सोचो, अब्राहम के पास परमेश्वर की बड़ी प्रतिज्ञा थी, कि यह पूरा देश एक दिन उनके वंश का होगा। पर अभी तक उनके पास अपनी एक इंच भूमि भी नहीं थी। जब सारा मर गईं, तब अब्राहम को पहली बार कनान देश में एक टुकड़ा जमीन मिली, वह भी दफनाने के लिए।

यह कोई बड़ा महल नहीं था, न कोई खेत। बस एक गुफा थी, जहाँ मुर्दों को रखा जाता था। फिर भी अब्राहम ने इसे पूरा दाम देकर खरीदा, ताकि यह सचमुच उनकी हो। वे जल्दबाज़ी में मुफ्त की भूमि नहीं लेना चाहते थे। वे धीरज से, ईमानदारी से काम करना चाहते थे, भले ही उनका दिल दुख से भरा था।

समान सूत्र

परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था कि कनान देश उनके वंश को दिया जाएगा। यह गुफा उस बड़े वादे की पहली छोटी शुरुआत थी, पहला कदम। अब्राहम को पूरा देश देखने को नहीं मिला, पर उन्हें एक गुफा मिली। यह दिखाता है कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाएँ धीरे-धीरे, कदम-कदम करके पूरी करते हैं। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपना सबसे बड़ा वादा पूरा किया, जब उन्होंने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। जैसे अब्राहम दुख में भी परमेश्वर पर भरोसा रखते थे, वैसे ही हम भी भरोसा रख सकते हैं कि परमेश्वर अपनी हर बात पूरी करते हैं, चाहे हमें अभी पूरी तस्वीर न दिखे।

तुम्हारे लिए

जब तुम्हारा दिल दुखी होता है, जैसे अब्राहम का दुखी था, तब भी तुम ईमानदार और धीरजवान रह सकते हो। अब्राहम ने जल्दबाज़ी नहीं की और न ही किसी से मुफ्त की चीज़ लेकर बेईमानी की। अगली बार जब कोई तुम्हें कुछ मुफ्त देना चाहे, पर तुम जानते हो कि सही तरीका कुछ और है, तो अब्राहम को याद करना। और जब तुम्हें दुख हो, तो परमेश्वर से बात करना, जैसे अब्राहम ने भरोसा रखा था कि परमेश्वर उनका ध्यान रखेंगे।

आपस में बात करें

जब अब्राहम का दिल दुख से भरा था, तब भी उन्होंने ईमानदारी से काम क्यों किया?

क्या तुम्हें लगता है कि छोटी गुफा परमेश्वर के बड़े वादे से जुड़ी थी? कैसे?

एक साथ प्रार्थना

हे प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप अपनी प्रतिज्ञाएँ कभी नहीं भूलते। जब हमारा दिल दुखी हो, तब हमें धीरज और ईमानदारी से चलना सिखाइए। हमें याद दिलाइए कि आप हर कदम पर हमारे साथ हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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उत्पत्ति 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

उत्पत्ति 23 किस विषय में है?
अब्राहम की पत्नी सारा एक सौ सताईस वर्ष की थीं। वे कनान देश के किर्यतअर्बा में, जिसे हेब्रोन भी कहते हैं, चल बसीं। अब्राहम बहुत दुखी हुए। वे सारा के शव के पास गए और रोए।
उत्पत्ति 23 क्या कहता है?
हित्तियों ने कहा, "हमारे प्रभु, आप तो हमारे बीच बड़े प्रधान हैं। आप जो चाहें वह कब्र ले लें।" पर अब्राहम चाहते थे कि यह भूमि उनकी अपनी हो जाए, केवल उधार नहीं। इसलिए उन्होंने एप्रोन नाम के एक आदमी की गुफा माँगी, जो मकपेला नाम की जगह में थी।
उत्पत्ति 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
इस तरह वह गुफा, उसके आसपास की भूमि और पेड़, सब अब्राहम के हो गए। सब हित्तियों के सामने यह पक्का हुआ। अब्राहम ने अपनी पत्नी सारा को उसी गुफा में मिट्टी दी। अब वह भूमि सचमुच अब्राहम की अपनी थी।
बच्चे उत्पत्ति 23 से क्या सीख सकते हैं?
यह कोई बड़ा महल नहीं था, न कोई खेत। बस एक गुफा थी, जहाँ मुर्दों को रखा जाता था। फिर भी अब्राहम ने इसे पूरा दाम देकर खरीदा, ताकि यह सचमुच उनकी हो। वे जल्दबाज़ी में मुफ्त की भूमि नहीं लेना चाहते थे। वे धीरज से, ईमानदारी से काम करना चाहते थे, भले ही उनका दिल दुख से भरा था।
उत्पत्ति 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम्हारा दिल दुखी होता है, जैसे अब्राहम का दुखी था, तब भी तुम ईमानदार और धीरजवान रह सकते हो। अब्राहम ने जल्दबाज़ी नहीं की और न ही किसी से मुफ्त की चीज़ लेकर बेईमानी की। अगली बार जब कोई तुम्हें कुछ मुफ्त देना चाहे, पर तुम जानते हो कि सही तरीका कुछ और है, तो अब्राहम को याद करना। और जब तुम्हें दुख हो, तो परमेश्वर से बात करना, जैसे अब्राहम ने भरोसा रखा था कि परमेश्वर उनका ध्यान रखेंगे।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

सारा की मृत्यु के बाद अब्राहम के पास पूरे कनान में एक गज ज़मीन भी नहीं थी। एप्रोन ने खेत मुफ़्त देने की बात कही, पर अब्राहम ने कहा, "मैं उस खेत का दाम दूँगा।" जिस देश का वादा परमेश्वर ने उसे किया था, उसी में उसने कब्र के लिए पूरी कीमत चुकाई। वादा उसकी आँखों के सामने पूरा नहीं हुआ, फिर भी उसने विश्वास के साथ गाड़ा। तेरे जीवन में भी कुछ ऐसा है जिसका फल तू शायद न देखे, पर क्या तू फिर भी बोता रहेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

वह खेत मैं तुझे देता हूँ, और उसमें की गुफा भी मैं तुझको देता हूँ।" एप्रोन का यह उपहार अब्राहम ने नहीं लिया, उसने पूरे दाम चुकाए। जिस पूरे देश की प्रतिज्ञा परमेश्वर ने उसे दी थी, उसमें जीते जी उसके हिस्से आई सिर्फ़ एक कब्र। फिर भी वह भरोसा करता रहा। कभी कभी परमेश्वर के वादे पर तेरा पहला कदम एक कब्र के पास ही रखा जाता है।

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