7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 2

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बार एक पत्नी थी जो अपने पति को भूल गई। उसका पति उससे बहुत प्रेम करता था। पर वह हर दिन दूसरे लोगों के पीछे भागती थी। वह कहती थी, "मेरी रोटी, मेरा पानी, मेरा तेल, यह सब मुझे मेरे यारों से मिलता है।" पर यह सच नहीं था।

यहोशेा नबी के द्वारा परमेश्वर यही कहानी सुनाते हैं। इस्राएल के लोग परमेश्वर को भूल गए थे। वे बाल नाम के झूठे देवता की पूजा करने लगे थे। पर वह अन्न, नया दाखमधु, ऊन और तेल, यह सब परमेश्वर ही देते थे। लोग यह भूल गए थे।

परमेश्वर बहुत दुखी होते हैं। वे कहते हैं, "मैं उसके रास्ते में काँटे लगाऊँगा।" वे चाहते हैं कि इस्राएल अपने झूठे यारों के पीछे भागते भागते थक जाए, और उन्हें कभी न पाए। फिर वह सोचे, "मैं अपने पहले पति के पास लौट जाऊँगी, क्योंकि तब मेरा जीवन अच्छा था।"

क्या आप सोच सकते हैं? परमेश्वर सजा देते हैं, पर सजा का मकसद क्या है? कि इस्राएल घर लौट आए।

फिर कुछ अद्भुत होता है। परमेश्वर कहते हैं, "मैं उसे जंगल में ले जाऊँगा, और वहाँ उससे प्रेम की बातें कहूँगा।" जंगल एक सूखी, खाली जगह है। पर वहीं परमेश्वर अपनी पत्नी को फिर से पा लेंगे। वहीं वे उसे अंगूर के बाग देंगे। वहीं वह फिर से खुशी से गाएगी, जैसे जवानी के दिनों में गाती थी।

इसका अर्थ क्या है?

यह कहानी सिखाती है कि परमेश्वर सिर्फ एक नियम बनाने वाला नहीं है। वे एक पति की तरह हैं जो अपनी पत्नी से सच्चा प्रेम करते हैं। जब हम उन्हें भूल जाते हैं और दूसरी चीज़ों के पीछे भागते हैं, पैसा, खिलौने, या अपनी मनमानी, तब परमेश्वर का दिल दुखता है। पर वे हमें छोड़ते नहीं। वे हमें वापस बुलाते हैं।

परमेश्वर कहते हैं, "उस दिन तू मुझे पति कहेगी।" वे चाहते हैं कि हम फिर से उन्हें पहचानें और उनके पास लौट आएं। यही उनका असली दिल है।

सामान्य सूत्र

यह वादा यीशु मसीह में पूरा होता है। पौलुस प्रेरित और पतरस प्रेरित बाद में यही बात कहते हैं, "जो पहले मेरी प्रजा नहीं थी, वह अब मेरी प्रजा है।" यह लोअम्मी और लोरुहामा की बात है, जिसका मतलब है "मेरी प्रजा नहीं" और "जिस पर दया नहीं।" पर यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर हर उस व्यक्ति को अपना बनाते हैं जो उनके पास लौट आता है, चाहे वह कितना भी दूर भटक गया हो।

यीशु मसीह हमें ढूँढ़ने आए, जैसे एक चरवाहा खोई हुई भेड़ को ढूँढ़ता है। वे हमें जंगल से नहीं, बल्कि पाप से बाहर निकालकर घर ले आते हैं।

आपके लिए

क्या कभी आपने परमेश्वर को भुला दिया, क्योंकि कोई और चीज़ ज्यादा अच्छी लगी? शायद कोई खिलौना, कोई खेल, या अपनी ज़िद? यह ठीक वैसा ही है जैसा इस्राएल ने किया।

आज आप परमेश्वर से कह सकते हैं, "मैं वापस आपके पास आता हूँ।" वे आपको दूर नहीं धकेलेंगे। वे आपको गले लगाएंगे, जैसे एक पिता अपने खोए बच्चे को गले लगाता है।

बात करें

अगर परमेश्वर एक प्रेमी पति की तरह हैं, तो इस्राएल का व्यवहार आपको कैसा लगता है?

आपके जीवन में कौन सी चीज़ें कभी-कभी परमेश्वर से ज्यादा ज़रूरी लगने लगती हैं?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं छोड़ते, चाहे हम कितनी भी बार आपको भूल जाएं। हमें अपने पास वापस बुलाइए। हमें सिखाइए कि हर अच्छी चीज़ आप ही से आती है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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होशे 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 2 किस विषय में है?
एक बार एक पत्नी थी जो अपने पति को भूल गई। उसका पति उससे बहुत प्रेम करता था। पर वह हर दिन दूसरे लोगों के पीछे भागती थी। वह कहती थी, "मेरी रोटी, मेरा पानी, मेरा तेल, यह सब मुझे मेरे यारों से मिलता है।" पर यह सच नहीं था।
होशे 2 क्या कहता है?
क्या आप सोच सकते हैं? परमेश्वर सजा देते हैं, पर सजा का मकसद क्या है? कि इस्राएल घर लौट आए।
होशे 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर कहते हैं, "उस दिन तू मुझे पति कहेगी।" वे चाहते हैं कि हम फिर से उन्हें पहचानें और उनके पास लौट आएं। यही उनका असली दिल है।
बच्चे होशे 2 से क्या सीख सकते हैं?
क्या कभी आपने परमेश्वर को भुला दिया, क्योंकि कोई और चीज़ ज्यादा अच्छी लगी? शायद कोई खिलौना, कोई खेल, या अपनी ज़िद? यह ठीक वैसा ही है जैसा इस्राएल ने किया।
होशे 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
आपके जीवन में कौन सी चीज़ें कभी-कभी परमेश्वर से ज्यादा ज़रूरी लगने लगती हैं?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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