7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

योना 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

योना की कहानी का यह आखिरी अध्याय है, और यह शायद सबसे अजीब हिस्सा है। सोचिए, नीनवे शहर के लोगों ने परमेश्वर की बात सुनी, अपने बुरे कामों से पछताए, और परमेश्वर ने उन्हें माफ कर दिया। यह तो खुशी की बात होनी चाहिए थी। पर योना खुश नहीं है। वह गुस्से से भरा हुआ है।

योना परमेश्वर से शिकायत करता है: "मुझे तो पहले से पता था कि आप ऐसे ही हैं! इसीलिए तो मैं भाग गया था। आप बहुत दयालु हैं, बहुत जल्दी माफ कर देते हैं।" यह अजीब शिकायत है, है ना? कोई भी परमेश्वर की दया के बारे में शिकायत क्यों करेगा? पर योना करता है। वह इतना निराश है कि कहता है, "मुझे मार डालिए। जीने से अच्छा तो मरना है।"

परमेश्वर उसे डाँटते नहीं। वे बस एक शांत सवाल पूछते हैं: "क्या तेरा गुस्सा सही है?"

योना जवाब नहीं देता। वह शहर के बाहर जाकर एक छप्पर बनाकर बैठ जाता है। शायद उसे उम्मीद है कि परमेश्वर अपना मन बदल लेंगे और शहर को फिर भी नाश कर देंगे। धूप बहुत तेज है। तब परमेश्वर एक रेंड़ का पेड़ उगाते हैं, जो योना के सिर पर छाया करता है। योना बहुत खुश हो जाता है, एक पेड़ के लिए।

अगले दिन सुबह परमेश्वर एक कीड़ा भेजते हैं जो पेड़ को काट देता है। पेड़ सूख जाता है। फिर गरम पूर्वी हवा चलती है, धूप योना के सिर पर पड़ती है, और वह फिर से कहता है, "मुझे मार डालिए।"

परमेश्वर फिर पूछते हैं: "क्या पेड़ के लिए गुस्सा करना सही है?" योना कहता है, "हाँ, बिल्कुल सही है!"

और तब परमेश्वर वह बात कहते हैं जो पूरी किताब का दिल है: "तू एक पेड़ के लिए इतना दुखी है, जिसे तूने उगाया भी नहीं। तो फिर मैं नीनवे के लिए दुखी क्यों न होऊँ? वहाँ एक लाख बीस हजार से भी ज्यादा लोग हैं, और बहुत से जानवर भी।"

किताब यहीं खत्म हो जाती है। योना का जवाब नहीं लिखा है।

इसका क्या मतलब है?

यह अंत जान-बूझकर खुला छोड़ा गया है। परमेश्वर का सवाल हवा में लटका रहता है, ताकि हम खुद सोचें: अगर मैं योना की जगह होता, तो क्या कहता?

योना की समस्या यह है कि वह चाहता था कि परमेश्वर की दया सिर्फ उसके अपने लोगों के लिए हो, दुश्मनों के लिए नहीं। नीनवे के लोग इस्राएल के दुश्मन थे। योना को लगता था वे इस लायक नहीं हैं कि परमेश्वर उन्हें माफ करें।

पर परमेश्वर कहते हैं: मैं सबसे प्यार करता हूँ। यहाँ तक कि उन लोगों से भी जिन्हें तू पसंद नहीं करता। यहाँ तक कि जानवरों से भी।

यह बात योना को समझ नहीं आती। और शायद परमेश्वर हमसे भी वही सवाल पूछ रहे हैं जो योना से पूछा था: "क्या तेरा गुस्सा सही है?"

जोड़ने वाला धागा

योना की कहानी यीशु मसीह की तरफ इशारा करती है। यीशु ने खुद कहा था कि योना का चिन्ह उनकी तरफ इशारा करता है। पर एक बड़ा फर्क है: योना नाराज था कि दुश्मन बच गए। यीशु क्रूस पर टँगे हुए अपने दुश्मनों के लिए प्रार्थना कर रहे थे: "हे पिता, इन्हें माफ कर दीजिए।"

योना नीनवे के लिए मरना नहीं चाहता था। यीशु पूरी दुनिया के लिए, हर देश के लोगों के लिए, मरने आए।

परमेश्वर की दया इतनी बड़ी है कि वह हमारे नक्शे में नहीं समाती। वह "अच्छे लोगों" और "बुरे लोगों" की हमारी सूची को मानती ही नहीं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारी कक्षा में कोई ऐसा है जिसे तुम पसंद नहीं करते? कोई जिसने तुम्हें दुख पहुँचाया है? यह सोचना बहुत मुश्किल है कि परमेश्वर उससे भी उतना ही प्यार करते हैं जितना तुमसे।

योना छप्पर में बैठकर इंतजार कर रहा था कि नीनवे को सजा मिले। कभी-कभी हम भी अंदर से यही चाहते हैं कि जिसने हमें चोट पहुँचाई, उसे बुरा हो। यह भावना सच्ची है, इसे परमेश्वर से छिपाओ मत। योना ने भी नहीं छिपाया, उसने सीधे परमेश्वर को बताया।

पर फिर परमेश्वर का सवाल सुनो: "क्या तेरा गुस्सा सही है?" यह सवाल तुम्हारे लिए भी है। शायद परमेश्वर तुम्हें उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना करना सिखाना चाहते हैं जिसे तुम पसंद नहीं करते।

इस पर बात करो

अगर तुम इस किताब का अगला अध्याय लिखते, तो योना क्या जवाब देता? क्यों?

क्या कभी ऐसा हुआ है कि तुम चाहते थे किसी को सजा मिले, पर उसे माफ कर दिया गया? तुम्हें कैसा लगा?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप हम सबसे प्यार करते हैं, यहाँ तक कि उनसे भी जिन्हें हम पसंद नहीं करते। कभी-कभी हमारा दिल योना जैसा हो जाता है, छोटा और नाराज। हमें अपने जैसा बड़ा दिल दीजिए। हमें उन लोगों के लिए प्रार्थना करना सिखाइए जिन्होंने हमें दुख दिया है। यीशु के नाम से, आमीन।

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योना 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

योना 4 किस विषय में है?
योना की कहानी का यह आखिरी अध्याय है, और यह शायद सबसे अजीब हिस्सा है। सोचिए, नीनवे शहर के लोगों ने परमेश्वर की बात सुनी, अपने बुरे कामों से पछताए, और परमेश्वर ने उन्हें माफ कर दिया। यह तो खुशी की बात होनी चाहिए थी। पर योना खुश नहीं है। वह गुस्से से भरा हुआ है।
योना 4 क्या कहता है?
अगले दिन सुबह परमेश्वर एक कीड़ा भेजते हैं जो पेड़ को काट देता है। पेड़ सूख जाता है। फिर गरम पूर्वी हवा चलती है, धूप योना के सिर पर पड़ती है, और वह फिर से कहता है, "मुझे मार डालिए।"
योना 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
योना की समस्या यह है कि वह चाहता था कि परमेश्वर की दया सिर्फ उसके अपने लोगों के लिए हो, दुश्मनों के लिए नहीं। नीनवे के लोग इस्राएल के दुश्मन थे। योना को लगता था वे इस लायक नहीं हैं कि परमेश्वर उन्हें माफ करें।
बच्चे योना 4 से क्या सीख सकते हैं?
योना नीनवे के लिए मरना नहीं चाहता था। यीशु पूरी दुनिया के लिए, हर देश के लोगों के लिए, मरने आए।
योना 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पर फिर परमेश्वर का सवाल सुनो: "क्या तेरा गुस्सा सही है?" यह सवाल तुम्हारे लिए भी है। शायद परमेश्वर तुम्हें उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना करना सिखाना चाहते हैं जिसे तुम पसंद नहीं करते।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

योना कहता है, "इसलिए अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।" ध्यान दे, यह निराशा हार के कारण नहीं थी। नीनवे बच गया था, और यही उसे असहनीय लगा। परमेश्वर की दया उसके दुश्मनों तक पहुँची, और वह जीना ही नहीं चाहता था। तुझे किसकी क्षमा खटकती है? जिस व्यक्ति को तू माफ़ होते नहीं देखना चाहता, उसी के लिए शायद परमेश्वर तुझसे बात कर रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

योना नीनवे पर दया देखकर क्रोधित हुआ, पर एक पेड़ की छाया पाकर "बहुत आनन्दित हुआ।" पूरी किताब में वह पहली बार खुश होता है, और वजह है उसके सिर पर पड़ी ठंडी छाया, न कि बचाए गए हज़ारों लोग।

सोचो, तुम्हें आखिरी बार किस बात से इतनी खुशी हुई? अपनी सुविधा से, या किसी और पर मिली दया से?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

योना नगर के भीतर जाकर लोगों के साथ रोया नहीं, वह बाहर बैठ गया। "वहाँ उसने अपने लिए एक छप्पर बनाया, और उसकी छाया में बैठकर देखता रहा कि नगर का क्या होगा।" अपने लिए छाया, और दूसरों के लिए विनाश की प्रतीक्षा। कहीं तुम भी किसी के गिरने का इंतज़ार तो नहीं कर रहे, आराम से बैठकर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

योना गुस्से में है, और परमेश्वर उसे डाँटता नहीं। वह बस पूछता है, "क्या तेरा क्रोध करना उचित है?" एक सवाल, जो योना को अपने ही दिल के भीतर झाँकने पर मजबूर करता है। सोचो, तुम्हारे गुस्से के बीच भी परमेश्वर तुमसे बात करना छोड़ता नहीं। वह पूछता है, ताकि तुम खुद देख सको कि तुम किस पर नाराज़ हो, और क्यों।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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