याकूब 5
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
याकूब की चिट्ठी का यह आखिरी हिस्सा पहले उन धनवान लोगों से बात करता है, जिन्होंने अपने मजदूरों को ठीक मजदूरी नहीं दी। याकूब कहते हैं कि उनका सोना-चांदी सड़ चुका है, उनके कपड़ों को कीड़े खा गए हैं। यह असल में पैसे या कपड़ों की बात नहीं है, बल्कि इस बात की है कि जो कुछ वे जमा करके बैठे थे, वही अब उनके खिलाफ गवाही देगा, क्योंकि उन्होंने मजदूरों का हक मार लिया। खेत काटने वालों की दुहाई परमेश्वर, यानी सेनाओं के प्रभु, तक पहुँच गई है। याकूब यह भी कहते हैं कि इन धनवानों ने धर्मी व्यक्ति को दोषी ठहराकर मार डाला, और वह उनका सामना भी नहीं करता। पढ़ते हुए सवाल उठता है, ऐसा अन्याय क्यों इतने लंबे समय तक चलता रहता है? याकूब कोई आसान जवाब नहीं देते, वे सिर्फ कहते हैं कि परमेश्वर ने दुहाई सुन ली है, भले नतीजा अभी न दिखे।
फिर याकूब अपने भाइयों से, यानी विश्वासी लोगों से, बात करने लगते हैं। वे कहते हैं, धीरज धरो, जैसे किसान बारिश की प्रतीक्षा करता है। प्रभु का आगमन निकट है, इसलिए एक दूसरे पर दोष मत लगाओ। भविष्यवक्ताओं को याद करो, जिन्होंने दुःख सहा और धीरज रखा। अय्यूब का नाम भी आता है, जिसने बहुत कुछ खोया, पर अंत में परमेश्वर की करुणा और दया देखी।
आखिर में याकूब सिखाते हैं कि शपथ न खाई जाए, बल्कि हाँ का मतलब हाँ और नहीं का मतलब नहीं हो। दुःख में प्रार्थना करो, खुशी में गीत गाओ। बीमार हो तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाओ, वे तेल मलकर प्रार्थना करें। एक दूसरे के सामने अपने पाप मान लो, और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो। एलिय्याह का उदाहरण दिया जाता है, जिसकी प्रार्थना से बारिश रुकी और फिर से बरसी। और आखिर में यह वादा है, जो कोई भटके हुए को वापस लाए, वह एक जीवन को मृत्यु से बचाता है।
इसका मतलब क्या है?
याकूब यहाँ बहुत सीधी बात करते हैं। वे दिखाते हैं कि हम पैसे और चीज़ों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वह हमारे विश्वास से जुड़ा हुआ है। जिन धनवानों की बात हो रही है, उन्होंने सोचा कि उनका धन ही उनकी सुरक्षा है। पर याकूब कहते हैं कि यही धन उनकी गवाही बन जाएगा, क्योंकि उन्होंने दूसरों के साथ अन्याय किया।
फिर वे मुड़ते हैं और विश्वासियों से कहते हैं, तुम्हें भी अन्याय सहना पड़ सकता है, इसलिए धीरज रखो। यह कोई सुस्त इंतज़ार नहीं है, बल्कि किसान जैसा भरोसा, जो जानता है कि बीज बोया गया है और फल एक दिन आएगा, भले अभी कुछ दिखे नहीं। बाइबल यह मुश्किल सवाल खुला छोड़ देती है कि परमेश्वर कब और कैसे इसे ठीक करेंगे। हमें सिर्फ भरोसा रखने को कहा जाता है।
याकूब यह भी मान लेते हैं कि जीवन में दुःख, बीमारी और गलतियाँ आती हैं। इसलिए वे प्रार्थना, पाप स्वीकार करने और एक दूसरे की देखभाल की बात करते हैं। यह कोई नियमों की सूची नहीं है, बल्कि एक तस्वीर है कि कैसे लोग साथ में विश्वास में जीते हैं, जब चीज़ें अच्छी हों और जब बुरी हों।
मुख्य सूत्र
याकूब बार-बार परमेश्वर के आने की, यानी प्रभु के आगमन की बात करते हैं। यह वादा पूरी बाइबल में चलता है, परमेश्वर एक दिन सब कुछ ठीक करेंगे, हर अन्याय का हिसाब होगा। यीशु मसीह ने यही वादा दिया था कि वे लौटेंगे। याकूब के पाठक इस वादे को पकड़कर धीरज रख सकते हैं, ठीक जैसे भविष्यवक्ता और अय्यूब ने रखा।
एलिय्याह की प्रार्थना की कहानी भी दिखाती है कि परमेश्वर सुनते हैं, तब भी जब हम उनके जैसे साधारण और कमजोर इंसान हों। और आखिरी वादा सबसे खूबसूरत है, जो भटक गया है, उसे वापस लाया जा सकता है। यही यीशु मसीह पूरी ज़िंदगी करते रहे, भटके हुओं को ढूँढना और घर लाना।
तुम्हारे लिए
शायद तुमने कभी किसी को झूठा वादा करते सुना हो, या खुद किया हो। याकूब कहते हैं, तुम्हारी हाँ, हाँ हो और तुम्हारी नहीं, नहीं हो। इसका मतलब है कि तुम्हारी बात पर भरोसा किया जा सके, बिना कसम खाए। जब कोई तुम्हारा दोस्त गलत काम करे, याद रखो कि उसे वापस लाना, उसे शर्मिंदा करने से बेहतर है। और जब तुम दुःखी या बीमार हो, तो अकेले मत रहो, किसी को बताओ और साथ में प्रार्थना करो। स्कूल में या घर में जब कोई गलती करे, दोष लगाने से पहले सोचो, क्या मैं उसे वापस ला सकता हूँ? यही याकूब चाहते हैं, कि हम एक दूसरे को उठाएँ, न कि गिराएँ।
चर्चा करें
याकूब कहते हैं कि धीरज किसान जैसा होना चाहिए। इस धीरज और सिर्फ इंतज़ार करने में क्या फर्क है?
क्या तुम्हें लगता है कि अपने पाप मानना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना आसान है या कठिन? क्यों?
साथ में प्रार्थना
प्रभु, हमें धीरज दीजिए जब इंतज़ार लंबा लगे। हमें सच बोलने वाला बनाइए, जिस पर भरोसा किया जा सके। जब हम भटक जाएँ, हमें वापस लाइए, और हमें भी ऐसा दिल दीजिए जो दूसरों को खोजने निकले। आमीन।
याकूब 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
याकूब 5 किस विषय में है?
याकूब 5 क्या कहता है?
याकूब 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे याकूब 5 से क्या सीख सकते हैं?
याकूब 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हे धनवानों, सुन लो; तुम अपने आनेवाले क्लेशों पर चिल्ला चिल्लाकर रोओ।"
ध्यान दे, याकूब उन्हें रोने को कहता है, उस दुःख के लिए जो अभी आया ही नहीं। जो कुछ उन्होंने जोड़कर रखा था, वह उन्हें एक दिन भी नहीं बचा पाएगा।
तेरी सुरक्षा किसमें टिकी है? जो चीज़ कल काम नहीं आएगी, उस पर आज अपना दिल लगाना सबसे महँगा सौदा है।
विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठाकर खड़ा करेगा।" ध्यान दो, बीमार आदमी खुद प्रार्थना नहीं कर पा रहा, वह सिर्फ बुलाता है और दूसरे उसके लिए प्रार्थना करते हैं। कभी कभी तुम्हारे पास विश्वास करने की ताकत नहीं बचती। तब किसी को बुला लेना शर्म नहीं, यही आज्ञाकारिता है। तुम अकेले उठने के लिए नहीं बने हो।
फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फली।" ध्यान दे, एलिय्याह कोई स्वर्गदूत नहीं था, वह हमारे जैसा ही दुःख-सुख भोगने वाला इंसान था। बारिश आसमान से आई, पर शुरुआत घुटनों पर हुई। तेरे जीवन की जो ज़मीन सालों से सूखी पड़ी है, वह भी फिर से फल दे सकती है। क्या तू प्रार्थना करना छोड़ तो नहीं बैठा?
देखो, किसान पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ, प्रथम और अन्तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है।"
किसान बीज बो तो सकता है, पर बारिश नहीं करा सकता। उसका धीरज इसी बात में है कि वह आकाश की ओर देखता रहता है। तेरे हाथ में भी सब कुछ नहीं है। जो तू नहीं कर सकता, उसे परमेश्वर के हाथ में छोड़ना ही धीरज है, हार नहीं।
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