अय्यूब 25
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
अय्यूब बहुत दुःख में था। उसका शरीर बीमार था, उसके बच्चे मर चुके थे, और उसके दोस्त उसे समझा नहीं पा रहे थे। अब एक दोस्त उठ खड़ा हुआ। उसका नाम था बिल्दद, शूही शहर का रहनेवाला।
बिल्दद ने कुछ ऐसा कहा जो सुनने में बड़ा और गंभीर लगता है। उसने कहा, परमेश्वर राजा हैं, वे सब पर प्रभुता करते हैं, और वे डरावने भी हैं। उसके ऊँचे स्वर्ग में सब कुछ शांत और व्यवस्थित है। उसकी सेनाएँ इतनी बड़ी हैं कि कोई उन्हें गिन नहीं सकता। और उसका प्रकाश हर जगह पहुँचता है, कोई भी उससे छिप नहीं सकता।
फिर बिल्दद ने एक कठिन सवाल पूछा। क्या कोई इंसान परमेश्वर के सामने सच में भला ठहर सकता है? क्या कोई माँ से जन्मा हुआ व्यक्ति पूरी तरह शुद्ध हो सकता है?
बिल्दद ने आकाश की ओर इशारा किया। उसने कहा, देखो, चाँद भी परमेश्वर की दृष्टि में अंधेरा जैसा लगता है। तारे भी, जो रात में इतने चमकीले दिखते हैं, उसके सामने साफ नहीं ठहरते।
तो फिर इंसान की क्या बिसात? बिल्दद ने अय्यूब से कहा कि मनुष्य तो एक कीड़े के समान है, एक छोटे केंचुए के समान। इतना छोटा, इतना कमजोर।
इसका क्या अर्थ है?
बिल्दद की बातों में कुछ सच्चाई है। परमेश्वर सचमुच महान हैं। वे इतने ऊँचे और पवित्र हैं कि सूरज, चाँद और तारे भी उनके सामने छोटे पड़ जाते हैं। यह सच है कि कोई इंसान अपने आप से परमेश्वर जैसा पवित्र नहीं बन सकता।
पर बिल्दद ने एक गलती की। उसने अय्यूब को यह याद दिलाने के बजाय कि परमेश्वर प्रेम करते हैं, उसे सिर्फ डरा दिया। उसने अय्यूब की तुलना एक कीड़े से की, मानो अय्यूब की कोई कीमत ही न हो। क्या तुम्हें लगता है यह सही बात थी? एक दुखी दोस्त को क्या ऐसी बातें कहनी चाहिए?
बिल्दद ने परमेश्वर की महानता तो बताई, पर उनके प्रेम को भूल गया। वह केवल आधी सच्चाई बोल रहा था।
सीधा सूत्र
बिल्दद ने पूछा, मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी कैसे ठहर सकता है। यह सवाल बहुत बड़ा है। और इसका जवाब बहुत बाद में आता है, जब यीशु मसीह इस दुनिया में आते हैं।
यीशु ही वह रास्ता हैं जिससे हम परमेश्वर के सामने शुद्ध ठहर सकते हैं। हम अपनी ताकत से शुद्ध नहीं बन सकते, जैसे बिल्दद ने सही कहा। पर यीशु ने अपने प्राण देकर हमारे लिए रास्ता बना दिया। परमेश्वर केवल डरावने राजा नहीं हैं, वे एक पिता भी हैं जिन्होंने अपने बेटे को भेजा ताकि हम उनके पास आ सकें।
तुम्हारे लिए
जब तुम कभी किसी दोस्त को दुःख में देखो, तो याद रखना कि उसे डराने वाली बातों की नहीं, प्रेम भरी बातों की ज़रूरत है। उसे याद दिलाओ कि परमेश्वर सिर्फ महान और ऊँचे नहीं हैं, वे पास आकर गले भी लगाते हैं।
और जब तुम खुद परमेश्वर की महानता के बारे में सोचो, रात को आकाश में तारे देखो और सोचो कि परमेश्वर इससे भी बड़े हैं, तो डरो मत। बल्कि यह सोचो कि यही महान परमेश्वर तुमसे प्रेम करते हैं और तुम्हें जानते हैं।
बातचीत के लिए
क्या तुम्हें लगता है बिल्दद ने अय्यूब को सही तरीके से सांत्वना दी? क्यों या क्यों नहीं?
जब तुम रात को आसमान में तारे देखते हो, तो तुम्हारे मन में क्या विचार आते हैं?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, आप सचमुच महान हैं, आपसे बड़ा कोई नहीं। फिर भी आप हमसे प्रेम करते हैं और हमारे पास आते हैं। धन्यवाद कि यीशु मसीह के द्वारा हम आपके पास आ सकते हैं। हमें सिखाइए कि जब हमारे दोस्त दुःखी हों, तो हम उन्हें डराने वाली नहीं, बल्कि प्रेम भरी बातें कहें। आमीन।
अय्यूब 25 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
अय्यूब 25 किस विषय में है?
अय्यूब 25 क्या कहता है?
अय्यूब 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे अय्यूब 25 से क्या सीख सकते हैं?
अय्यूब 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तब शूही बिलदद ने कहा," और यही उसका आखिरी बार बोलना है। सिर्फ छह आयतें, फिर हमेशा की चुप्पी। तीनों दोस्तों के शब्द चुक गए, क्योंकि उनके पास सही बातें तो थीं, पर टूटे हुए आदमी के लिए दिल नहीं था। तुम्हारी बातें भी सोचो, किसी के घाव पर मरहम हैं, या बस सही जवाब?
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