7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

अय्यूब 31

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

अय्यूब बहुत दुख से गुजर चुका है। उसके दोस्तों ने कहा कि उसके साथ जो बुरा हुआ, वह इसलिए हुआ क्योंकि उसने कोई गुप्त पाप किया होगा। अय्यूब 31 में अय्यूब इसका जवाब देता है, पर धमकी से नहीं, बल्कि एक लंबी, ईमानदार सूची से। वह अपने पूरे जीवन को परमेश्वर के सामने रखता है और कहता है, अगर मैंने यह किया हो, तो मुझे यह सज़ा मिले।

वह कहता है कि उसने अपनी आँखों के साथ वाचा बाँधी है, यानी एक ठोस वादा किया है कि वह किसी स्त्री को गलत तरीके से नहीं देखेगा। वह कहता है कि उसने कभी किसी को धोखा नहीं दिया, अपने नौकरों के साथ अन्याय नहीं किया, क्योंकि वे भी उसी परमेश्वर के बनाए हुए हैं जिसने उसे भी गर्भ में रचा। वह कहता है कि उसने कभी किसी गरीब या विधवा को खाली हाथ नहीं भेजा, बल्कि उन्हें कपड़े और भोजन दिया। उसने सोने पर भरोसा नहीं किया, सूरज और चाँद को देवता मानकर पूजा नहीं की, अपने दुश्मन के गिरने पर हँसा नहीं, और अपने पाप को छिपाया नहीं जैसे आदम ने छिपाया था।

आखिर में अय्यूब कहता है कि वह चाहता है कि कोई उसकी बात सुने। वह चाहता है कि परमेश्वर खुद उसका न्याय करें। वह इतना निश्चिंत है कि वह कहता है, यह मेरा दस्तखत है, मुझे कोई डर नहीं। इस अध्याय के आखिरी शब्दों के साथ अय्यूब के वचन पूरे हो जाते हैं।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि अय्यूब अपने बारे में झूठा गर्व नहीं कर रहा। वह यह नहीं कह रहा कि मैं पापरहित हूँ। वह कह रहा है, मेरे दुख का कारण कोई छिपा हुआ पाप नहीं है, जैसा मेरे दोस्तों ने सोचा। यह एक बड़ा फर्क है। अय्यूब जानता था कि परमेश्वर उसकी हर चाल देखते हैं, उसके पग-पग को गिनते हैं। इसलिए वह झूठ नहीं बोल सकता था, न परमेश्वर के सामने।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अय्यूब का धर्म केवल पूजा या बलिदान में नहीं दिखता, बल्कि उसके रोज़ के व्यवहार में, गरीबों के साथ, नौकरों के साथ, अपनी आँखों और मन को काबू में रखने में। यह दिखाता है कि सच्चा विश्वास जीवन के हर कोने को छूता है, न कि केवल मंदिर या चर्च का एक घंटा।

The Common Thread

अय्यूब चाहता था कि कोई उसकी बात सुने, कोई उसका पक्ष रखे, कोई उसके और परमेश्वर के बीच खड़ा हो। यह एक बड़ी चाह है, जिसे बाइबल में "बीचबिचौलिया" कहा जाता है, यानी वह जो दोनों के बीच सुलह कराए। अय्यूब को अपने समय में यह नहीं मिला। पर आगे बाइबल की कहानी में यीशु मसीह आते हैं, जो ठीक यही काम करते हैं। वे परमेश्वर और इंसानों के बीच खड़े होते हैं। पर एक बड़ा फर्क है, अय्यूब कह सकता था कि उसने कोई बड़ा पाप नहीं किया, पर यीशु मसीह के बारे में बाइबल कहती है कि वे पूरी तरह निष्पाप थे, फिर भी उन्होंने हमारे पापों की सज़ा अपने ऊपर ली। अय्यूब चाहता था कि उसका न्याय हो, यीशु मसीह ने हमारी जगह वह न्याय अपने ऊपर सहा।

For You

तुम भी कभी सोचते होगे, क्या मुझे हर बात परमेश्वर को बतानी चाहिए, जब वे वैसे भी सब जानते हैं? अय्यूब की तरह अपने दिल को खोलकर देखना डरावना लग सकता है। पर यह अच्छा है, क्योंकि परमेश्वर से कुछ छिपा नहीं रहता, न तुम्हारी आँखों की चाल, न तुम्हारे मन के विचार। सवाल यह नहीं कि क्या तुम पूरी तरह अच्छे हो, कोई नहीं है। सवाल यह है, क्या तुम ईमानदार हो अपने बारे में, और क्या तुम गरीब, कमजोर, या अकेले किसी के साथ भला करते हो, जैसे अय्यूब ने किया।

Talk About It

अय्यूब कहता है कि उसने कभी अपनी आँखों को गलत जगह नहीं लगाया। तुम्हें क्या लगता है, यह वादा निभाना आसान है या मुश्किल, और क्यों?

अय्यूब चाहता था कि कोई उसका पक्ष ले और उसके बारे में परमेश्वर से बात करे। क्या तुमने कभी किसी के लिए ऐसा किया, या किसी ने तुम्हारे लिए किया?

Praying Together

प्रभु परमेश्वर, आप हमारे हर पग को जानते हैं, हमारे दिल के हर विचार को भी। हमें डर लगता है जब हम सोचते हैं कि आपसे कुछ छिपा नहीं है, पर हमें यह भी सिखाइए कि यह एक अच्छी बात है। हमें ईमानदार बनाइए, गरीबों के लिए दयालु बनाइए, और धन्यवाद कि यीशु मसीह हमारे और आपके बीच खड़े हुए। आमीन।

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अय्यूब 31 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

अय्यूब 31 किस विषय में है?
अय्यूब बहुत दुख से गुजर चुका है। उसके दोस्तों ने कहा कि उसके साथ जो बुरा हुआ, वह इसलिए हुआ क्योंकि उसने कोई गुप्त पाप किया होगा। अय्यूब 31 में अय्यूब इसका जवाब देता है, पर धमकी से नहीं, बल्कि एक लंबी, ईमानदार सूची से। वह अपने पूरे जीवन को परमेश्वर के सामने रखता है और कहता है, अगर मैंने यह किया हो, तो मुझे यह सज़ा मिले।
अय्यूब 31 क्या कहता है?
आखिर में अय्यूब कहता है कि वह चाहता है कि कोई उसकी बात सुने। वह चाहता है कि परमेश्वर खुद उसका न्याय करें। वह इतना निश्चिंत है कि वह कहता है, यह मेरा दस्तखत है, मुझे कोई डर नहीं। इस अध्याय के आखिरी शब्दों के साथ अय्यूब के वचन पूरे हो जाते हैं।
अय्यूब 31 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि अय्यूब का धर्म केवल पूजा या बलिदान में नहीं दिखता, बल्कि उसके रोज़ के व्यवहार में, गरीबों के साथ, नौकरों के साथ, अपनी आँखों और मन को काबू में रखने में। यह दिखाता है कि सच्चा विश्वास जीवन के हर कोने को छूता है, न कि केवल मंदिर या चर्च का एक घंटा।
बच्चे अय्यूब 31 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी कभी सोचते होगे, क्या मुझे हर बात परमेश्वर को बतानी चाहिए, जब वे वैसे भी सब जानते हैं? अय्यूब की तरह अपने दिल को खोलकर देखना डरावना लग सकता है। पर यह अच्छा है, क्योंकि परमेश्वर से कुछ छिपा नहीं रहता, न तुम्हारी आँखों की चाल, न तुम्हारे मन के विचार। सवाल यह नहीं कि क्या तुम पूरी तरह अच्छे हो, कोई नहीं है। सवाल यह है, क्या तुम ईमानदार हो अपने बारे में, और क्या तुम गरीब, कमजोर, या अकेले किसी के साथ भला करते हो, जैसे अय्यूब ने किया।
अय्यूब 31 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अय्यूब चाहता था कि कोई उसका पक्ष ले और उसके बारे में परमेश्वर से बात करे। क्या तुमने कभी किसी के लिए ऐसा किया, या किसी ने तुम्हारे लिए किया?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

अय्यूब अपनी सफाई में उन पापों को भी गिनता है जिन्हें कोई देख नहीं सकता था: "और मेरा मन चुपके से मोहित हो गया हो, और मैंने अपने मुँह को हाथ से चूमा हो।" सूरज को देखकर हाथ चूम लेना, बस इतना सा इशारा, किसी को पता भी न चले। पर अय्यूब जानता था कि दिल का चुपचाप खिंच जाना भी बेवफाई है। आज तेरा मन किसकी चमक की ओर चुपके से झुकता है?

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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