7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मत्ती 26

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यीशु ने अपने चेलों से कहा, "दो दिन बाद फसह का पर्व होगा, और मुझे पकड़वाया जाएगा, ताकि मुझे क्रूस पर चढ़ाया जाए।" उसी दिन एक स्त्री यीशु के पास आई। उसके हाथ में महँगा इत्र था। उसने वह इत्र यीशु के सिर पर उंडेल दिया। चेले नाराज़ हुए, "इतना अच्छा इत्र क्यों बर्बाद किया?" यीशु ने कहा, "उसने मेरे गाड़े जाने के लिए यह किया है।"

उसी रात यहूदा, जो बारह चेलों में से एक था, प्रधान याजकों के पास गया। उसने अपने गुरु को तीस चाँदी के सिक्कों के लिए बेच दिया।

फसह के भोजन पर यीशु ने कहा, "तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।" सब उदास हो गए। यहूदा ने भी पूछा, "क्या वह मैं हूँ?" यीशु ने कहा, "तू कह चुका।" फिर यीशु ने रोटी तोड़कर दी, "यह मेरी देह है।" और कटोरा देकर कहा, "यह मेरा लहू है, जो बहुतों के पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।"

जैतून पहाड़ पर यीशु ने कहा, "आज रात तुम सब मुझे छोड़ दोगे।" पतरस बोला, "मैं कभी नहीं!" यीशु ने कहा, "मुर्गे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मुझसे मुकर जाएगा।"

गतसमनी में यीशु का मन बहुत उदास था। उन्होंने प्रार्थना की, "हे पिता, अगर हो सके तो यह दुःख का कटोरा मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा आप चाहते हैं वैसा हो।" चेले जागते नहीं रह सके, वे सो गए।

तब यहूदा भीड़ के साथ आया, तलवारें और लाठियाँ लिए हुए। उसने यीशु को चूमकर इशारा दिया। सैनिकों ने यीशु को पकड़ लिया। एक चेले ने तलवार चलाई, पर यीशु ने कहा, "तलवार वापस रख।" सब चेले डरकर भाग गए।

यीशु को महायाजक कैफा के पास ले गए। महायाजक ने पूछा, "क्या तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है?" यीशु ने कहा, "तूने आप ही कह दिया।" इस पर लोगों ने यीशु को थूका और मारा।

बाहर आँगन में पतरस बैठा था। तीन बार लोगों ने पूछा, "क्या तू भी उसके साथ था?" और तीन बार पतरस ने इनकार किया। तभी मुर्गे ने बाँग दी। पतरस को यीशु की बात याद आई, और वह बाहर जाकर फूट-फूटकर रोने लगा।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी दिखाती है कि यीशु के सबसे करीबी दोस्तों ने भी उन्हें छोड़ दिया। यहूदा ने उन्हें बेच दिया, पतरस ने उनसे इनकार किया, बाकी चेले भाग गए। फिर भी यीशु ने कुछ भी गलत नहीं किया। वे जानते थे कि यह सब होगा, और वे डरे, पर उन्होंने पिता की इच्छा को चुना। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी, प्यार करना तब भी जब कोई उन्हें छोड़ दे।

एक ही कहानी की कड़ी

यीशु ने कहा, "यह मेरा लहू है, जो बहुतों के पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।" यही पूरी बाइबल की सबसे बड़ी बात है। परमेश्वर बहुत पहले से कह रहे थे कि वे लोगों के पापों को क्षमा करने का रास्ता बनाएँगे। यीशु ने वह रास्ता खुद अपने ऊपर लिया। उन्होंने दुःख का कटोरा पी लिया, ताकि हम कभी उसे न पीएँ।

आपके लिए

कभी-कभी हम भी पतरस जैसे होते हैं। हम कहते हैं कि हम यीशु के साथ हैं, पर जब मुश्किल आती है, हम डर जाते हैं। यह ठीक है यीशु से यह कहना, "मुझे माफ करें, मैं फिर आपके साथ रहना चाहता हूँ।" आज रात सोने से पहले, यीशु से बात करें जैसे एक दोस्त से करते हैं।

बात करते हैं

यीशु गतसमनी में इतने उदास क्यों थे?

अगर तुम वहाँ होते, तो क्या तुम जागते रहते, या पतरस की तरह सो जाते?

साथ मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आपने हमारे लिए दुःख का कटोरा पी लिया। जब हम डर जाएँ या गलत कर बैठें, हमें याद दिलाएँ कि आप हमें फिर भी प्यार करते हैं। हमें आपके साथ जागते रहना और सच्चे बने रहना सिखाएँ। आमीन।

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मत्ती 26 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मत्ती 26 किस विषय में है?
यीशु ने अपने चेलों से कहा, "दो दिन बाद फसह का पर्व होगा, और मुझे पकड़वाया जाएगा, ताकि मुझे क्रूस पर चढ़ाया जाए।" उसी दिन एक स्त्री यीशु के पास आई। उसके हाथ में महँगा इत्र था। उसने वह इत्र यीशु के सिर पर उंडेल दिया। चेले नाराज़ हुए, "इतना अच्छा इत्र क्यों बर्बाद किया?
मत्ती 26 क्या कहता है?
जैतून पहाड़ पर यीशु ने कहा, "आज रात तुम सब मुझे छोड़ दोगे।" पतरस बोला, "मैं कभी नहीं!" यीशु ने कहा, "मुर्गे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मुझसे मुकर जाएगा।"
मत्ती 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु को महायाजक कैफा के पास ले गए। महायाजक ने पूछा, "क्या तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है?" यीशु ने कहा, "तूने आप ही कह दिया।" इस पर लोगों ने यीशु को थूका और मारा।
बच्चे मत्ती 26 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु ने कहा, "यह मेरा लहू है, जो बहुतों के पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।" यही पूरी बाइबल की सबसे बड़ी बात है। परमेश्वर बहुत पहले से कह रहे थे कि वे लोगों के पापों को क्षमा करने का रास्ता बनाएँगे। यीशु ने वह रास्ता खुद अपने ऊपर लिया। उन्होंने दुःख का कटोरा पी लिया, ताकि हम कभी उसे न पीएँ।
मत्ती 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आपने हमारे लिए दुःख का कटोरा पी लिया। जब हम डर जाएँ या गलत कर बैठें, हमें याद दिलाएँ कि आप हमें फिर भी प्यार करते हैं। हमें आपके साथ जागते रहना और सच्चे बने रहना सिखाएँ। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 56

कुछ ही घंटे पहले पतरस ने कहा था कि वह मरने तक साथ देगा। और अब लिखा है, "तब सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।" सब, एक भी नहीं बचा। यीशु यह जानते थे, फिर भी उन्होंने इन्हीं लोगों को चुना था, इन्हीं के पाँव धोए थे। तुम्हारा भागना उसे चौंकाता नहीं। वह उस रात अकेला इसीलिए खड़ा रहा, ताकि तुम्हें अकेला न छोड़ना पड़े।

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