योना 1
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यहोवा परमेश्वर योना नाम के एक भविष्यवक्ता से बात करते हैं। वे उसे एक काम सौंपते हैं, "उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर, क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में आ चुकी है।" नीनवे इस्राएल का दुश्मन देश अश्शूर की राजधानी थी। परमेश्वर चाहते थे कि योना वहाँ जाकर लोगों को उनकी बुराई के बारे में चेतावनी दे।
पर योना ऐसा नहीं करता। वह उठता तो है, पर नीनवे की उलटी दिशा में। वह याफा नगर जाकर तर्शीश जाने वाले जहाज पर चढ़ जाता है, ताकि यहोवा के सामने से भाग जाए। यह अजीब बात है, क्योंकि योना जानता था कि परमेश्वर हर जगह हैं। फिर भी वह भागने की कोशिश करता है।
समुद्र में परमेश्वर एक भयंकर आँधी भेजते हैं। जहाज टूटने वाला होता है। मल्लाह डर जाते हैं और अपने-अपने देवताओं को पुकारने लगते हैं, सामान समुद्र में फेंकने लगते हैं ताकि जहाज हल्का हो जाए। और योना कहाँ है? वह जहाज के निचले हिस्से में जाकर गहरी नींद में सो रहा है। कप्तान उसे जगाकर कहता है, "तू क्यों सो रहा है, उठ, अपने परमेश्वर को पुकार।"
मल्लाह चिट्ठी डालकर जानना चाहते हैं कि यह मुसीबत किसके कारण आई है, और चिट्ठी योना के नाम पर निकलती है। तब योना सच बता देता है, "मैं इब्री हूँ, और स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा का भय मानता हूँ, जिसने जल और स्थल दोनों को बनाया है।" मल्लाह बहुत डर जाते हैं क्योंकि वे समझ जाते हैं कि योना यहोवा से भाग रहा था।
समुद्र और उग्र होता जाता है। योना खुद कहता है, "मुझे उठाकर समुद्र में फेंक दो, तब समुद्र शान्त हो जाएगा।" मल्लाह पहले किनारे पर पहुँचने की कोशिश करते हैं, पर सफल नहीं होते। अंत में वे यहोवा से प्रार्थना करके योना को समुद्र में फेंक देते हैं, और समुद्र तुरंत शान्त हो जाता है। तब यहोवा एक बड़ी मछली भेजते हैं, जो योना को निगल लेती है। योना उस मछली के पेट में तीन दिन और तीन रात रहता है।
What Does This Mean?
यह कहानी दिखाती है कि परमेश्वर से भागना संभव नहीं है। योना एक असली भविष्यवक्ता था, जिसे परमेश्वर पर विश्वास था, फिर भी वह परमेश्वर की आज्ञा से बचना चाहता था। शायद उसे नीनवे के लोगों से नफरत थी, क्योंकि वे इस्राएल के दुश्मन थे। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर के लोग भी गलत चुनाव कर सकते हैं, यहाँ तक कि जानबूझकर।
पर ध्यान दें, आँधी में सबसे शान्त व्यक्ति योना ही है, वह सोया हुआ है, जबकि गैर-यहूदी मल्लाह डर के मारे प्रार्थना कर रहे हैं। यह अजीब उलटफेर है। और अंत में यही मल्लाह यहोवा का भय मानने लगते हैं और उन्हें भेंट चढ़ाते हैं। परमेश्वर उन लोगों तक भी पहुँच जाते हैं जो योना के रास्ते में केवल संयोग से आए थे।
The Common Thread
परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था कि उसके वंश से सारी पृथ्वी के लोग आशीष पाएँगे। योना की कहानी में हम देखते हैं कि यह वादा केवल इस्राएल के लिए नहीं है, बल्कि नीनवे जैसे दुश्मन शहरों के लिए भी है। यीशु मसीह ने बाद में योना की तीन दिन और तीन रात की बात को अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान का चिन्ह बताया। जैसे योना मछली के पेट में तीन दिन रहा, वैसे ही यीशु मसीह तीन दिन कब्र में रहे, और फिर जी उठे। योना का भागना अंततः उसकी मृत्यु जैसा अनुभव बन गया, पर परमेश्वर ने उसे बचाया। यह हमें दिखाता है कि परमेश्वर मृत्यु से भी परे काम कर सकते हैं।
For You
कभी-कभी हमें भी लगता है कि कोई काम या कोई व्यक्ति इतना कठिन है कि हम उससे दूर भागना चाहते हैं। शायद स्कूल में माफी माँगना, या किसी अनजान बच्चे से दोस्ती करना। योना की कहानी हमें ईमानदार होना सिखाती है, अपनी असहमति परमेश्वर के सामने रखना ठीक है, पर भागना समाधान नहीं है। यह भी याद रखने लायक है कि परमेश्वर हमारे आस-पास के लोगों की, यहाँ तक कि अजनबियों की भी, परवाह करते हैं।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, योना नीनवे जाने से इतना क्यों डरता या नाराज़ था?
क्या तुम्हें कभी लगा है कि परमेश्वर तुमसे कुछ ऐसा माँग रहे हैं जो तुम नहीं करना चाहते? उस समय तुमने क्या किया?
Praying Together
हे प्रभु, आप हर जगह हैं, समुद्र में भी और हमारे दिल में भी। जब हम आपकी बातों से मुँह मोड़ना चाहें, तो हमें साहस दीजिए कि हम भागने के बजाय आपसे बात करें। जैसे आपने योना और मल्लाहों की रक्षा की, वैसे ही हमारी भी रक्षा कीजिए। आमीन।
योना 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योना 1 किस विषय में है?
योना 1 क्या कहता है?
योना 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे योना 1 से क्या सीख सकते हैं?
योना 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मुझे उठाकर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र तुम्हारे लिये शान्त हो जाएगा।" योना जानता है कि तूफ़ान उसी के कारण है। वह मरने को तैयार है, पर नीनवे जाने को नहीं। कभी-कभी हम भी यही करते हैं: अपनी गलती मान लेना आसान लगता है, पर परमेश्वर की बात मानना भारी। तुम्हारे जीवन में वह कौन सा नीनवे है?
तूफान के बीच नाविकों ने चिट्ठी डाली, और "चिट्ठी योना के नाम पर निकली।" योना समझता था कि तर्शीश भागकर बच जाएगा, पर जहाज के सबसे नीचे के अँधेरे कोने तक परमेश्वर की उँगली पहुँच गई। जो बात तुम छिपाए बैठे हो, वह भीतर ही भीतर तुम्हें खा रही है। परमेश्वर तुम्हें पकड़ता है नाश करने को नहीं, लौटा लाने को।
यहोवा का यह वचन अमित्तै के पुत्र योना के पास पहुँचा।" कहानी शुरू होती है परमेश्वर के बोलने से, योना की तैयारी से नहीं। उसने न प्रार्थना की थी, न मांगा था। वचन बस आ गया। आज भी परमेश्वर तुझसे तब बात कर सकता है जब तू सबसे कम तैयार है। सवाल यह नहीं कि वह बोलेगा या नहीं, सवाल यह है कि तू सुनकर किस दिशा में चलेगा।
नाविक मूर्तिपूजक थे, फिर भी सुनते ही "बहुत डर गए"। और योना, परमेश्वर का जन, नीचे सोता रहा। कभी कभी जो परमेश्वर को नहीं जानते, वे उसकी गम्भीरता हमसे ज़्यादा समझते हैं। उन्होंने पूछा, "तूने यह क्या किया है?" यह सवाल वही है जो योना ने खुद से कभी नहीं पूछा। तू भागते हुए किससे बचना चाह रहा है?
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