6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहोशू 2

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यहोशू ने दो जासूस भेजे। उन्हें चुपके से यरीहो शहर देखने भेजा गया। वे शहर में गए और राहाब नाम की एक स्त्री के घर में रुके।

पर यरीहो के राजा को पता चल गया। उसने सिपाही भेजे और कहा, "उन आदमियों को बाहर निकालो!" राहाब का दिल धड़क रहा होगा। क्या वह उन्हें बचाएगी? या डर जाएगी?

राहाब ने जासूसों को छत पर ले जाकर सनई की लकड़ियों के नीचे छिपा दिया। फिर उसने सिपाहियों से झूठ कहा, "वे तो चले गए, जल्दी पीछा करो!" सिपाही भागे, और शहर का फाटक बंद हो गया।

राहाब छत पर गई और जासूसों से कुछ अनोखी बात कही। उसने कहा, "मुझे निश्चय है कि यहोवा ने यह देश आप लोगों को दिया है।" उसने सुना था कि कैसे परमेश्वर ने लाल समुद्र सुखा दिया था, और कैसे इस्राएल ने बड़े राजाओं को हरा दिया। उसने कहा, "यह सुनकर हमारा मन पिघल गया।"

फिर राहाब ने एक निवेदन किया। "मुझ पर दया करो, जैसे मैंने तुम पर की है। मेरे माता-पिता, भाई-बहनों को बचा लेना।" जासूसों ने वादा किया, "तेरे प्राण के बदले हमारा प्राण जाए।"

रात में राहाब ने उन्हें खिड़की से रस्सी के सहारे नीचे उतार दिया, क्योंकि उसका घर शहरपनाह पर बना था। उसने कहा, "पहाड़ पर जाकर तीन दिन छिप जाना, फिर आगे बढ़ना।" जासूसों ने एक चिन्ह मांगा और दिया, "जब हम आएँ, तो इस खिड़की में लाल रंग की डोरी बाँध देना। तुम्हारे घर में जो भी रहेगा, वह बच जाएगा।"

राहाब राजी हो गई और लाल डोरी बाँध दी। जासूस पहाड़ पर गए, तीन दिन छिपे रहे, फिर यहोशू के पास लौटे। उन्होंने कहा, "निःसंदेह यहोवा ने वह सारा देश हमारे हाथ में कर दिया है।"

इसका क्या अर्थ है?

राहाब कोई इस्राएली नहीं थी। वह यरीहो की एक साधारण स्त्री थी, जिसका जीवन अच्छा नहीं कहलाता था। फिर भी उसने परमेश्वर पर विश्वास किया, जब औरों ने नहीं किया। उसने सुना कि परमेश्वर कैसे काम करते हैं, और उसने मान लिया कि वे सच्चे परमेश्वर हैं। उसका विश्वास उसे बचाने वाला बना।

यह दिखाता है कि परमेश्वर किसी को भी बाहर नहीं रखते। जो भी उन पर भरोसा करता है, चाहे वह कहीं से भी हो, परमेश्वर उसकी रक्षा करते हैं।

सूत्र

वह लाल डोरी सिर्फ एक निशानी नहीं थी। वह बचाव का चिन्ह था, ठीक वैसे ही जैसे मिस्र में भेड़ के खून का निशान दरवाजों पर लगाया गया था ताकि मृत्यु उस घर से दूर रहे। राहाब के घर पर वह लाल डोरी कहती थी, "यहाँ के लोग बचेंगे।"

यीशु मसीह भी हमारे लिए वैसा ही चिन्ह बने। जो भी उन पर भरोसा करता है, वह बच जाता है, चाहे उसका अतीत कैसा भी रहा हो। राहाब जैसी स्त्री भी परमेश्वर के परिवार में अपनाई गई, क्योंकि उसने विश्वास किया।

आपके लिए

कभी तुम्हें भी सच बोलने या सही काम करने में डर लगता है। राहाब ने जासूसों की मदद की, हालाँकि यह खतरनाक था। तुम भी किसी की मदद कर सकते हो, भले ही वह आसान न हो। और जब तुम डरो, तो राहाब की तरह परमेश्वर पर भरोसा रखना। वे उन लोगों की सुनते हैं जो उन पर विश्वास करते हैं, चाहे वे कोई भी हों।

बातचीत के लिए

राहाब ने सिपाहियों से झूठ बोला ताकि जासूस बच जाएँ। तुम्हें क्या लगता है, उसने ऐसा क्यों किया होगा?

क्या तुम कभी किसी ऐसे व्यक्ति से मिले जिसे सब छोड़ देते, पर परमेश्वर ने नहीं छोड़ा?

साथ में प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप राहाब जैसी स्त्री को भी अपनाते हैं। हमें भी विश्वास दीजिए, जैसा राहाब का था। जब हम डरें, तो हमें साहस दीजिए सही काम करने का। आपकी रक्षा पर हम भरोसा करते हैं। आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

यहोशू 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 2 किस विषय में है?
यहोशू ने दो जासूस भेजे। उन्हें चुपके से यरीहो शहर देखने भेजा गया। वे शहर में गए और राहाब नाम की एक स्त्री के घर में रुके।
यहोशू 2 क्या कहता है?
राहाब छत पर गई और जासूसों से कुछ अनोखी बात कही। उसने कहा, "मुझे निश्चय है कि यहोवा ने यह देश आप लोगों को दिया है।" उसने सुना था कि कैसे परमेश्वर ने लाल समुद्र सुखा दिया था, और कैसे इस्राएल ने बड़े राजाओं को हरा दिया। उसने कहा, "यह सुनकर हमारा मन पिघल गया।"
यहोशू 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
राहाब राजी हो गई और लाल डोरी बाँध दी। जासूस पहाड़ पर गए, तीन दिन छिपे रहे, फिर यहोशू के पास लौटे। उन्होंने कहा, "निःसंदेह यहोवा ने वह सारा देश हमारे हाथ में कर दिया है।"
बच्चे यहोशू 2 से क्या सीख सकते हैं?
वह लाल डोरी सिर्फ एक निशानी नहीं थी। वह बचाव का चिन्ह था, ठीक वैसे ही जैसे मिस्र में भेड़ के खून का निशान दरवाजों पर लगाया गया था ताकि मृत्यु उस घर से दूर रहे। राहाब के घर पर वह लाल डोरी कहती थी, "यहाँ के लोग बचेंगे।"
यहोशू 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
राहाब ने सिपाहियों से झूठ बोला ताकि जासूस बच जाएँ। तुम्हें क्या लगता है, उसने ऐसा क्यों किया होगा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

राहाब ने उन्हें सिर्फ़ छिपाया नहीं, रास्ता भी बताया: "पहाड़ पर चले जाओ... वहाँ तीन दिन छिपे रहो।" सोचो, इस्राएल के जासूस अब एक कनानी वेश्या की सलाह पर अपनी जान बचा रहे हैं। परमेश्वर जिसे तुम्हारी मदद के लिए भेजे, वह वैसा दिखे ज़रूरी नहीं। तुम किसे सुनने से इनकार कर रहे हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

राजा का आदेश सीधे राहाब के दरवाज़े तक आया: "जो पुरुष तेरे पास आए हैं, और तेरे घर में घुसे हैं, उन्हें बाहर ले आ।" सोच, एक बदनाम स्त्री, और सामने पूरे शहर की ताकत। उसी पल उसे चुनना था, किससे डरूँ। उसने जीवित परमेश्वर को चुना। तेरे दरवाज़े पर भी कभी दस्तक होगी, और तब पता चलेगा कि तेरा असली डर कहाँ टिका है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

वे चले गए, और पहाड़ पर पहुँचकर खोजनेवालों के लौटने तक, अर्थात् तीन दिन तक वहीं रहे" (यहोशू 2:22)। बच निकलना एक ही रात में पूरा नहीं हुआ। तीन दिन उन्हें पहाड़ की गुफा में चुप बैठना पड़ा, जबकि खोजनेवाले नीचे घूम रहे थे। कभी-कभी परमेश्वर का बचाव दौड़ने में नहीं, ठहरने में मिलता है। तू किस बात के लिए भागना चाहता है, जहाँ उसने तुझे रुकने को कहा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास नन्हे बच्चों (3-5 वर्ष) और किशोरों (13 वर्ष और उससे ऊपर) के लिए अलग संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें