7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

न्यायियों 18

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

उन दिनों इस्राएल का कोई राजा नहीं था। हर गोत्र अपने हिसाब से चलता था। दान के गोत्र को अब तक अपने रहने के लिए ज़मीन नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने पाँच बहादुर आदमियों को भेजा कि वे कोई अच्छी जगह ढूँढ़ें। रास्ते में ये पाँच लोग मीका के घर पहुँचे, जहाँ पिछले अध्याय में एक जवान लेवीय पुरोहित बना हुआ था। उन्होंने उससे पूछा कि उनकी यात्रा सफल होगी या नहीं, और पुरोहित ने कहा, हाँ, यहोवा की कृपा तुम पर है। आगे जाकर उन्होंने लैश नाम का एक शहर देखा। वहाँ के लोग शांति से, बेखटके रहते थे, किसी से झगड़ा नहीं करते थे, और उनकी रक्षा करने वाला कोई नहीं था। दान के लोगों को यह जगह बहुत पसंद आई।

छह सौ हथियारबंद पुरुष निकल पड़े। रास्ते में वे फिर मीका के घर रुके। पाँच जासूसों ने वहाँ से चुपचाप एपोद, गृहदेवता और मूरतें उठा लीं। जब पुरोहित ने पूछा, यह क्या करते हो, तो उन्होंने उसे डराया और लालच भी दिया, हमारे साथ चल, एक घराने का पुरोहित बनने से बेहतर है कि एक पूरे गोत्र का पुरोहित बन जा। पुरोहित खुश हो गया और चला गया।

मीका ने अपने आदमियों के साथ पीछा किया, पर छह सौ हथियारबंद लोगों के सामने वह कुछ नहीं कर सका। वह उदास होकर घर लौट आया। दान के लोग लैश पहुँचे, जिन निर्दोष और शांत रहने वाले लोगों को उन्होंने तलवार से मार डाला और शहर को जला दिया। फिर उन्होंने उसे फिर से बनाया, उसका नाम अपने मूलपुरुष दान के नाम पर रख दिया, और वहाँ वही चोरी की हुई मूरत खड़ी कर दी, जो बहुत लंबे समय तक, शीलो में परमेश्वर का भवन रहने तक, वहाँ पूजी जाती रही।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी पढ़कर मन में कई सवाल उठते हैं। क्या दान के लोग सचमुच परमेश्वर से पूछकर चले थे, या सिर्फ एक झूठे पुरोहित से मन-चाहा जवाब लेकर संतोष कर लिया? ध्यान दो, उन्होंने असली परमेश्वर से नहीं, बल्कि मीका के घर के एक चोरी की मूरतों वाले पुरोहित से पूछा। यह इबादत नहीं थी, यह सिर्फ अपने मन को शांत करने का एक तरीका था।

फिर वे एक शांत, निर्दोष शहर पर हमला करते हैं, सिर्फ इसलिए कि वह कमज़ोर था और उन्हें ज़मीन चाहिए थी। कहीं भी नहीं लिखा कि परमेश्वर ने उन्हें ऐसा करने को कहा था। यह इस्राएल के लिए शर्म की बात है। जब हर कोई अपने मन का राजा बन जाता है, तो न्याय और दया दोनों कमज़ोर पड़ जाते हैं। मीका की मूरतें चोरी होती हैं, फिर भी वही मूरतें पूजी जाती रहती हैं, यह दिखाता है कि लोग सच्चे परमेश्वर को भूलकर कैसे झूठे रास्तों पर चलते चले जाते हैं।

एक बड़ी कहानी से जुड़ाव

परमेश्वर ने इस्राएल से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक पक्का वादा, कि वे उनके लोग होंगे और वे उनके परमेश्वर होंगे। पर इस अध्याय में कोई भी सच में परमेश्वर की बात नहीं सुनता। हर कोई अपने फ़ायदे के हिसाब से चलता है। यही कारण है कि इस्राएल को बाद में एक ऐसे राजा की ज़रूरत महसूस हुई जो सचमुच परमेश्वर की तरह न्याय से चले। बहुत बाद में परमेश्वर ने अपना बेटा यीशु मसीह भेजा, जो कभी अपने फ़ायदे के लिए नहीं, बल्कि पिता की इच्छा पूरी करने के लिए जीवित रहे। जहाँ दान के लोग एक कमज़ोर शहर को लूटते हैं, वहाँ यीशु मसीह कमज़ोर और असहाय लोगों की रक्षा करने आए।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी हम भी वही करते हैं जो हमें अच्छा लगता है, और फिर सोचते हैं कि परमेश्वर ज़रूर साथ होंगे। पर सच्चाई यह है कि हमें पहले परमेश्वर से पूछना है, उनका वचन पढ़ना है, तब फैसला लेना है। यह भी सोचने लायक बात है कि हम कमज़ोर लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, क्या हम उन्हें कुचलते हैं क्योंकि हम ज़्यादा ताकतवर हैं, या उनकी रक्षा करते हैं क्योंकि परमेश्वर ऐसा चाहते हैं।

आपस में बात करें

दान के लोगों ने पुरोहित से पूछा, पर असली परमेश्वर से नहीं पूछा। क्या तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा होता है कि तुम सिर्फ वही जवाब सुनना चाहते हो जो तुम्हें पसंद हो?

लैश के लोग शांति से रहते थे, फिर भी उन पर हमला हुआ। इस कहानी में न्याय कहाँ चला गया, और क्यों?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, हमें सिखाइए कि हम अपने मन की नहीं, बल्कि आपकी बात सुनें। हमें ऐसी आँखें दीजिए जो कमज़ोर लोगों को देख सकें और उनकी मदद करें, न कि उन्हें नुकसान पहुँचाएँ। हमें अपने वचन से सच्चाई सिखाते रहिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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न्यायियों 18 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

न्यायियों 18 किस विषय में है?
उन दिनों इस्राएल का कोई राजा नहीं था। हर गोत्र अपने हिसाब से चलता था। दान के गोत्र को अब तक अपने रहने के लिए ज़मीन नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने पाँच बहादुर आदमियों को भेजा कि वे कोई अच्छी जगह ढूँढ़ें। रास्ते में ये पाँच लोग मीका के घर पहुँचे, जहाँ पिछले अध्याय में एक जवान लेवीय पुरोहित बना हुआ था। उन्होंने उससे पूछा कि उनकी यात्रा सफल होगी या नहीं, और पुरोहित ने कहा, हाँ, यहोवा की कृपा तुम पर है। आगे जाकर उन्होंने लैश नाम का एक शहर देखा। वहाँ के लोग शांति से, बेखटके रहते थे, किसी से झगड़ा नहीं करते थे, और उनकी रक्षा करने वाला कोई नहीं था। दान के लोगों को यह जगह बहुत पसंद आई।
न्यायियों 18 क्या कहता है?
मीका ने अपने आदमियों के साथ पीछा किया, पर छह सौ हथियारबंद लोगों के सामने वह कुछ नहीं कर सका। वह उदास होकर घर लौट आया। दान के लोग लैश पहुँचे, जिन निर्दोष और शांत रहने वाले लोगों को उन्होंने तलवार से मार डाला और शहर को जला दिया। फिर उन्होंने उसे फिर से बनाया, उसका नाम अपने मूलपुरुष दान के नाम पर रख दिया, और वहाँ वही चोरी की हुई मूरत खड़ी कर दी, जो बहुत लंबे समय तक, शीलो में परमेश्वर का भवन रहने तक, वहाँ पूजी जाती रही।
न्यायियों 18 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर वे एक शांत, निर्दोष शहर पर हमला करते हैं, सिर्फ इसलिए कि वह कमज़ोर था और उन्हें ज़मीन चाहिए थी। कहीं भी नहीं लिखा कि परमेश्वर ने उन्हें ऐसा करने को कहा था। यह इस्राएल के लिए शर्म की बात है। जब हर कोई अपने मन का राजा बन जाता है, तो न्याय और दया दोनों कमज़ोर पड़ जाते हैं। मीका की मूरतें चोरी होती हैं, फिर भी वही मूरतें पूजी जाती रहती हैं, यह दिखाता है कि लोग सच्चे परमेश्वर को भूलकर कैसे झूठे रास्तों पर चलते चले जाते हैं।
बच्चे न्यायियों 18 से क्या सीख सकते हैं?
कभी-कभी हम भी वही करते हैं जो हमें अच्छा लगता है, और फिर सोचते हैं कि परमेश्वर ज़रूर साथ होंगे। पर सच्चाई यह है कि हमें पहले परमेश्वर से पूछना है, उनका वचन पढ़ना है, तब फैसला लेना है। यह भी सोचने लायक बात है कि हम कमज़ोर लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, क्या हम उन्हें कुचलते हैं क्योंकि हम ज़्यादा ताकतवर हैं, या उनकी रक्षा करते हैं क्योंकि परमेश्वर ऐसा चाहते हैं।
न्यायियों 18 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
लैश के लोग शांति से रहते थे, फिर भी उन पर हमला हुआ। इस कहानी में न्याय कहाँ चला गया, और क्यों?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

मीका के घर के पास आते ही उन लोगों ने उस जवान लेवीय की आवाज़ पहचान ली। आवाज़ तो वही थी, पर जगह गलत थी। वे पूछते हैं, "तुझे यहाँ कौन ले आया? और तू यहाँ क्या करता है? और यहाँ तेरे पास क्या है?"

ये तीन सवाल आज भी चुभते हैं। परमेश्वर की बुलाहट लेकर तू जहाँ खड़ा है, क्या वहाँ उसने तुझे भेजा था, या वेतन और सुविधा तुझे खींच लाई?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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