न्यायियों 18
किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यह अध्याय एक ऐसे दौर की कहानी है जब "इस्राएलियों का कोई राजा न था", यानी कोई ऐसा केंद्रीय अधिकार नहीं था जो लोगों को परमेश्वर की ओर मोड़े। दान के गोत्र को अब तक अपना हिस्सा नहीं मिला था, इसलिए वे पाँच जासूस भेजते हैं कि कोई अच्छी जगह ढूँढ़ें। रास्ते में वे मीका के घर रुकते हैं, जहाँ एक जवान लेवीय पुरोहित बनकर रह रहा था, पैसे के बदले। जासूस उससे पूछते हैं कि उनकी यात्रा सफल होगी या नहीं, और पुरोहित झट से कह देता है, "यहोवा की कृपादृष्टि है।" ध्यान दें, वह परमेश्वर से कुछ पूछता भी नहीं, बस जो सुनना चाहिए वही कह देता है।
जासूसों को लैश नाम का शहर मिलता है, जो शांति से, बेखटके जी रहा है, किसी से लड़ाई नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। यह देखकर दानी लोग सोचते हैं कि यह आसान शिकार है। छह सौ हथियारबंद पुरुष निकल पड़ते हैं। रास्ते में वे फिर मीका के घर रुकते हैं, और इस बार सिर्फ सलाह नहीं लेते, वे उसकी खुदी हुई मूरत, एपोद, गृहदेवता और ढली हुई मूरत चुरा लेते हैं। पुरोहित को भी लालच दिया जाता है, "एक घराने का पुरोहित बनने से क्या फायदा, पूरे गोत्र का पुरोहित बन।" वह राज़ी हो जाता है।
मीका पीछे दौड़ता है, विरोध करता है, पर छह सौ हथियारबंद लोगों के आगे उसकी एक नहीं चलती। वह चुपचाप लौट जाता है। दानी लोग लैश पहुँचते हैं, उन शांत लोगों को तलवार से मार डालते हैं, शहर जला देते हैं, और उसका नाम बदलकर "दान" रख देते हैं। वहाँ वे मीका की चुराई हुई मूरत स्थापित करते हैं, और यह पूजा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है, यहाँ तक कि जब परमेश्वर का भवन शीलो में खड़ा था, तब भी।
What Does This Mean?
यह अध्याय पढ़ते हुए असहज होना सही प्रतिक्रिया है। यहाँ कोई नायक नहीं है। पुरोहित अपनी आस्था बेच देता है। दानी लोग चोरी करते हैं, धमकाते हैं, और निर्दोष लोगों को मार डालते हैं, और इसे "परमेश्वर ने हमारे हाथ में दे दिया" कहकर जायज़ ठहराते हैं। मीका खुद एक घर में मूरत बनाकर रखता था, और परमेश्वर की "इच्छा" जानने के लिए एक भाड़े के पुरोहित का इस्तेमाल करता था। यानी हर तरफ धर्म है, पर सच्चाई कहीं नहीं।
यही बात सबसे ज़्यादा चुभती है, यह धर्म बिल्कुल सुविधा के हिसाब से इस्तेमाल किया जा रहा है। जब जो चाहिए वो मिल जाए, कहो "परमेश्वर की कृपा है"। जब ज़रूरत पड़े, पुरोहित को खरीद लो। जब कोई रास्ते में आए, उसे कुचल दो। यह अध्याय दिखाता है कि जब कोई सच्चा अधिकार नहीं होता जिसके आगे झुका जाए, तो इंसान अपनी इच्छा को ही परमेश्वर की इच्छा का नाम दे देता है।
The Common Thread
यह अध्याय सीधे यीशु का नाम नहीं लेता, पर इसकी खाली जगह ही यीशु की ज़रूरत को उजागर करती है। इस्राएल को एक सच्चे राजा की ज़रूरत थी, ऐसे राजा की जो अपनी इच्छा नहीं, परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चले। बाद में इस्राएल को राजा मिलेंगे, पर वे भी असफल होंगे। अंततः परमेश्वर एक राजा भेजेंगे जो खुद परमेश्वर है, यीशु मसीह, जिसने कभी सुविधा के लिए सच नहीं छोड़ा, जिसने कभी किसी निर्दोष को नहीं कुचला, बल्कि खुद कुचला गया ताकि हम बच सकें।
और पुरोहित की बात भी देखिए। यहाँ एक पुरोहित है जो पैसे के लिए बिकता है, जो परमेश्वर की इच्छा जाने बिना ही "आशीर्वाद" बाँट देता है। यीशु मसीह एक ऐसे महायाजक हैं जो कभी नहीं बिकते, जो सच में हमारे और परमेश्वर के बीच खड़े होते हैं, और जो झूठी शांति नहीं देते बल्कि सच बोलते हैं, चाहे वह कितना भी कठोर क्यों न लगे।
For You
यह अध्याय आईना है। सोचिए कितनी बार आप अपनी इच्छा को परमेश्वर की इच्छा का नाम देते हैं, "शायद परमेश्वर चाहते हैं कि मैं यह रिश्ता रखूँ", "परमेश्वर समझ जाएँगे कि मैंने यह क्यों किया", बिना वाकई उनसे पूछे। कितनी बार आप आस्था को सुविधा के हिसाब से ढालते हैं, चर्च जाना तब जब मन करे, बाइबल पढ़ना तब जब आराम से फिट बैठे, पर जब कुछ कीमत चुकानी पड़े, पीछे हट जाना।
दानी लोगों की तरह, कभी-कभी हम ताकतवर होने पर कमज़ोर को कुचल देते हैं, चाहे वह ऑनलाइन किसी की बेइज़्ज़ती हो, या किसी को नज़रअंदाज़ करना क्योंकि वह "काम का" नहीं है। यह अध्याय पूछता है, क्या आपकी आस्था वाकई परमेश्वर की सुनती है, या सिर्फ वही कहती है जो आप सुनना चाहते हैं। सच्चा विश्वास वह है जो तब भी टिका रहे जब जवाब कठिन हो, जब कीमत ज़्यादा हो।
Talk About It
पुरोहित ने बिना परमेश्वर से वाकई पूछे ही "आशीर्वाद" दे दिया। आपकी ज़िंदगी में ऐसा कब होता है कि आप परमेश्वर की इच्छा जाने बिना ही मान लेते हैं कि कुछ ठीक है?
दानी लोगों ने ताकत के बल पर मीका को चुप करा दिया और लैश को नष्ट कर दिया। आज के समय में "ताकतवर होने पर सही होने का हक़" वाली सोच कहाँ-कहाँ दिखती है, आपके आसपास या आप में भी?
Praying Together
हे परमेश्वर, हमें माफ़ कीजिए जब हम अपनी इच्छा को आपका नाम देते हैं। हमें सच्चाई की हिम्मत दीजिए, भले ही वह सुविधाजनक न हो। हमें सिखाइए कि असली विश्वास क्या होता है, ऐसा विश्वास जो आपकी सुनता है, आपके सामने झुकता है, और कमज़ोर को नहीं कुचलता। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
न्यायियों 18 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
न्यायियों 18 किस विषय में है?
न्यायियों 18 क्या कहता है?
न्यायियों 18 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर न्यायियों 18 से क्या सीख सकते हैं?
न्यायियों 18 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मीका के घर के पास आते ही उन लोगों ने उस जवान लेवीय की आवाज़ पहचान ली। आवाज़ तो वही थी, पर जगह गलत थी। वे पूछते हैं, "तुझे यहाँ कौन ले आया? और तू यहाँ क्या करता है? और यहाँ तेरे पास क्या है?"
ये तीन सवाल आज भी चुभते हैं। परमेश्वर की बुलाहट लेकर तू जहाँ खड़ा है, क्या वहाँ उसने तुझे भेजा था, या वेतन और सुविधा तुझे खींच लाई?
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