7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

लैव्यव्यवस्था 22

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

स्पष्टीकरण

लैव्यव्यवस्था 22 में परमेश्वर मूसा के द्वारा हारून और उसके बेटों से बात करते हैं। हारून और उसके बेटे याजक थे, यानी वे लोग जो मिलापवाले तम्बू में परमेश्वर की सेवा करते थे। वे बलिदान चढ़ाते थे और लोगों के लिए परमेश्वर के सामने खड़े रहते थे।

इस अध्याय में परमेश्वर दो बड़ी बातें कहते हैं। पहली बात याजकों के बारे में है। परमेश्वर कहते हैं कि जब कोई याजक किसी कारण से "अशुद्ध" हो, तो वह पवित्र भोजन को न छुए और न खाए, जब तक कि वह फिर से शुद्ध न हो जाए। शुद्ध और अशुद्ध का यहाँ मतलब गंदा या साफ नहीं है। यह एक तरह का चिन्ह था कि परमेश्वर के पास आना कोई साधारण बात नहीं है। जो कोई बीमार था, या किसी मरे हुए जानवर को छू चुका था, उसे पहले पानी से नहाना था और शाम तक रुकना था। उसके बाद ही वह पवित्र भोजन में से खा सकता था।

परमेश्वर यह भी कहते हैं कि याजक का भोजन, यानी बलिदानों में से उसका हिस्सा, हर कोई नहीं खा सकता था। याजक के परिवार के लोग खा सकते थे, पर बाहरी लोग नहीं। अगर कोई गलती से खा लेता, तो उसे उसका पाँचवाँ हिस्सा जोड़कर याजक को लौटाना पड़ता था।

दूसरी बड़ी बात बलिदानों के बारे में है। जब कोई इस्राएली परमेश्वर के लिए एक जानवर लाता, तो वह जानवर निर्दोष होना चाहिए। इसका मतलब है, उसमें कोई कमी न हो। अंधा, लूला, टूटा हुआ, या बीमार जानवर परमेश्वर के लिए नहीं चढ़ाया जा सकता था। नवजात बच्चा जानवर सात दिन तक अपनी माँ के साथ रहे, और माँ और बच्चे को एक ही दिन नहीं मारा जाए।

अंत में परमेश्वर कहते हैं, "मैं यहोवा हूँ, जो तुम को मिस्र देश से निकाल लाया है।" वे याद दिलाते हैं कि उन्होंने इस्राएल को गुलामी से छुड़ाया था।

इसका क्या मतलब है?

पढ़ते समय ऐसा लगता है कि ये नियम बहुत सख्त हैं। हो सकता है तुम सोचो, "परमेश्वर को इससे क्या फर्क पड़ता है कि जानवर की एक टाँग टूटी है या नहीं?" यह अच्छा सवाल है। इसका जवाब यह है कि परमेश्वर इस्राएल को सिखा रहे थे कि वे पवित्र हैं। पवित्र का मतलब है, बिल्कुल अलग, बहुत खास, बहुत शुद्ध।

अगर तुम अपने सबसे अच्छे दोस्त को जन्मदिन का उपहार देते हो, तो क्या तुम टूटा हुआ खिलौना दोगे? नहीं। तुम कुछ अच्छा दोगे। परमेश्वर कह रहे थे, "जब तुम मेरे पास आओ, तो अपना सबसे अच्छा लाओ, आधा-अधूरा नहीं।"

और याजकों के लिए ये नियम इसलिए थे क्योंकि वे परमेश्वर के इतने पास खड़े होते थे। जो पवित्र परमेश्वर के पास जाता है, उसे लापरवाह नहीं होना चाहिए।

जोड़नेवाला सूत्र

यह पूरा अध्याय एक बड़ी कहानी की तरफ इशारा करता है। इस्राएली एक निर्दोष जानवर चढ़ाते थे, यानी बिना किसी दोष के। पर वह जानवर हमेशा के लिए काफी नहीं था। हर साल फिर से बलिदान चढ़ाना पड़ता था।

नए नियम में हम पढ़ते हैं कि यीशु मसीह ही असली और सिद्ध बलिदान हैं। उनमें कोई दोष नहीं था, कोई पाप नहीं था। पतरस लिखते हैं कि यीशु "निर्दोष मेम्ने" के समान थे। जो जानवर हारून चढ़ाता था, वे सब यीशु की तरफ उंगली उठा रहे थे।

और याजकों के बारे में भी सोचो। पुराने नियम में केवल कुछ खास लोग परमेश्वर के पास आ सकते थे। पर यीशु के कारण अब हम सब सीधे परमेश्वर के पास आ सकते हैं। यीशु सबसे बड़े याजक हैं, और वे हमारे लिए हमेशा शुद्ध रहे।

तुम्हारे लिए

परमेश्वर आज भी कहते हैं, "मुझे अपना सबसे अच्छा दो।" तुम्हारे पास वेदी और बकरी तो नहीं है, पर तुम्हारे पास तुम्हारा समय है, तुम्हारा मन, तुम्हारी आदतें, तुम्हारी दोस्ती।

क्या तुम परमेश्वर को अपनी थकी हुई प्रार्थना का आखिरी टुकड़ा देते हो, या दिन का सबसे अच्छा हिस्सा? क्या तुम चर्च में इसलिए जाते हो कि बस जाना पड़ता है, या इसलिए कि तुम सच में परमेश्वर से मिलना चाहते हो?

और एक बात, परमेश्वर ने कहा कि माँ जानवर और बच्चा एक ही दिन न मारे जाएँ। इससे पता चलता है कि परमेश्वर जानवरों की भी परवाह करते हैं। तुम भी अपने आसपास के जीव-जन्तुओं, पालतू जानवरों, और लोगों के साथ कोमल रह सकते हो। परमेश्वर की पवित्रता कठोर नहीं है, वह प्रेम से भरी है।

इस पर बात करो

अगर परमेश्वर आज तुमसे कहते, "मुझे अपना सबसे अच्छा दो," तो तुम क्या देते? और क्या देना मुश्किल होगा?

यीशु "निर्दोष मेम्ने" कहलाते हैं। इसका तुम्हारे लिए क्या मतलब है कि उनमें कोई कमी नहीं थी?

साथ में प्रार्थना

हे पवित्र परमेश्वर, आप महान हैं और अलग हैं। धन्यवाद कि यीशु सिद्ध बलिदान बने, ताकि हम आपके पास आ सकें। हमें सिखाइए कि हम आपको अपना सबसे अच्छा दें, आधा मन नहीं, पूरा मन। यीशु के नाम में, आमीन।

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लैव्यव्यवस्था 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 22 किस विषय में है?
लैव्यव्यवस्था 22 में परमेश्वर मूसा के द्वारा हारून और उसके बेटों से बात करते हैं। हारून और उसके बेटे याजक थे, यानी वे लोग जो मिलापवाले तम्बू में परमेश्वर की सेवा करते थे। वे बलिदान चढ़ाते थे और लोगों के लिए परमेश्वर के सामने खड़े रहते थे।
लैव्यव्यवस्था 22 क्या कहता है?
अंत में परमेश्वर कहते हैं, "मैं यहोवा हूँ, जो तुम को मिस्र देश से निकाल लाया है।" वे याद दिलाते हैं कि उन्होंने इस्राएल को गुलामी से छुड़ाया था।
लैव्यव्यवस्था 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह पूरा अध्याय एक बड़ी कहानी की तरफ इशारा करता है। इस्राएली एक निर्दोष जानवर चढ़ाते थे, यानी बिना किसी दोष के। पर वह जानवर हमेशा के लिए काफी नहीं था। हर साल फिर से बलिदान चढ़ाना पड़ता था।
बच्चे लैव्यव्यवस्था 22 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुम परमेश्वर को अपनी थकी हुई प्रार्थना का आखिरी टुकड़ा देते हो, या दिन का सबसे अच्छा हिस्सा? क्या तुम चर्च में इसलिए जाते हो कि बस जाना पड़ता है, या इसलिए कि तुम सच में परमेश्वर से मिलना चाहते हो?
लैव्यव्यवस्था 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे पवित्र परमेश्वर, आप महान हैं और अलग हैं। धन्यवाद कि यीशु सिद्ध बलिदान बने, ताकि हम आपके पास आ सकें। हमें सिखाइए कि हम आपको अपना सबसे अच्छा दें, आधा मन नहीं, पूरा मन। यीशु के नाम में, आमीन।

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