12 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोर के लिए

लैव्यव्यवस्था 22

किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

लैव्यव्यवस्था 22 पढ़ना ऐसा लगता है जैसे किसी पुरानी नियमावली में झाँक रहे हों। पशुओं के दोष, याजकों की शुद्धता, कौन क्या खा सकता है और कौन नहीं। पहली नज़र में यह अध्याय दूर लगता है, शायद कुछ अजीब भी। लेकिन ठहरिए। इसे पढ़ने का तरीका बदलिए, तो कुछ बहुत गहरा सामने आता है।

परमेश्वर मूसा के ज़रिए हारून और उसके पुत्रों से बात करते हैं। ये याजक हैं, वे लोग जिनका काम था परमेश्वर और लोगों के बीच खड़ा होना। परमेश्वर कहते हैं: जो चीज़ें मेरे लिए पवित्र की गई हैं, उनके साथ लापरवाही मत करना। अगर कोई याजक अशुद्ध अवस्था में है, कोढ़, बीमारी, किसी मुर्दा शरीर को छूने के बाद, तो वह उन पवित्र वस्तुओं को न छुए। सूर्य ढलने तक इंतज़ार करे, स्नान करे, फिर खाए।

फिर आती हैं बलियों की बातें। जो पशु परमेश्वर को चढ़ाया जाए, वह निर्दोष हो। अंधा नहीं, लूला नहीं, टूटे अंगों वाला नहीं, बीमार नहीं। नवजात पशु कम से कम सात दिन अपनी माँ के साथ रहे। और माँ तथा बच्चे को एक ही दिन बलि न करना।

अध्याय के अंत में परमेश्वर एक वाक्य दोहराते हैं जो पूरी लैव्यव्यवस्था की धुरी है: "मैं तुम्हारा पवित्र करनेवाला यहोवा हूँ, जो तुम को मिस्र देश से निकाल लाया है।" यही सारी बातों की जड़ है।

इसका क्या अर्थ है?

आज हम बलि नहीं चढ़ाते। हम मंदिर में नहीं जाते। तो यह अध्याय हमसे क्या कहता है?

एक शब्द ध्यान से देखिए: पवित्र। यह शब्द इस अध्याय में बार-बार आता है। पवित्र का मतलब "अच्छा बनना" नहीं है, जैसा अक्सर सोचा जाता है। इसका मतलब है "अलग किया गया, विशेष के लिए रखा गया।" जैसे कोई अंगूठी जो सिर्फ शादी के दिन पहनी जाती है, वह अलग है।

परमेश्वर कह रहे हैं कि उनके साथ का रिश्ता कोई साधारण चीज़ नहीं है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। याजकों को इसलिए इतनी सावधानी बरतनी थी क्योंकि वे परमेश्वर की उपस्थिति के करीब थे। और जो पशु चढ़ाया जाता, वह बेकार, बचा-खुचा नहीं हो सकता था। परमेश्वर के लिए सबसे अच्छा।

यह बात हमें एक असहज सवाल के सामने खड़ी करती है: क्या हम परमेश्वर को अपनी ज़िंदगी में वह देते हैं जो हमारे लिए सबसे कीमती है, या जो बच जाता है? पढ़ाई, दोस्त, स्क्रीन, रिश्ते, समय, इनमें से सबसे अच्छा कहाँ जाता है? और अगर कुछ भी परमेश्वर के लिए न बचे तो हमें इसकी परवाह भी होती है क्या?

बड़ा सूत्र

लैव्यव्यवस्था के ये नियम एक कमी की ओर इशारा करते हैं। हर बलि, हर निर्दोष पशु, हर शुद्धिकरण, ये सब एक ही सवाल पूछते थे: पापी इंसान पवित्र परमेश्वर के पास कैसे आ सकता है?

नए नियम में इसका उत्तर मिलता है। इब्रानियों की पत्री कहती है कि यीशु मसीह वही पूर्ण, निर्दोष बलि हैं जिसकी ओर ये सब पशु इशारा कर रहे थे। "जिसमें कोई दोष न हो," लैव्यव्यवस्था 22 बार-बार कहती है। पतरस लिखते हैं कि यीशु "निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने" के समान थे। संयोग नहीं है यह।

और भी गहरी बात: याजक जो पर्दे के पीछे नहीं जा सकते थे अगर अशुद्ध हों, यीशु उनके लिए महायाजक बने जो हमेशा के लिए परमेश्वर के सामने खड़े हैं। हमारे लिए। जब यीशु क्रूस पर मरे, तो मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया। वह अलगाव जो लैव्यव्यवस्था 22 में इतना ज़रूरी था, उसे परमेश्वर ने खुद तोड़ दिया।

तो लैव्यव्यवस्था 22 पुरानी नियमावली नहीं है, यह सुसमाचार की पूर्व-कथा है।

तुम्हारे लिए

तुम शायद सोचोगे: इसका मेरी ज़िंदगी से क्या लेना-देना? बहुत कुछ।

पहला, तुम्हारा शरीर, तुम्हारी आत्मा, तुम्हारी पहचान, ये मामूली नहीं हैं। ऐसे समय में जब लोग खुद को घंटों स्क्रीन के सामने बेच देते हैं, जब पहचान इतनी उलझ चुकी है कि तुम खुद नहीं जानते कौन हो, यह अध्याय एक अजीब सच्चाई कहता है: तुम पवित्र किए जा सकते हो। तुम्हें अलग किया जा सकता है। तुम्हारी ज़िंदगी बड़ी चीज़ के लिए बनी है।

दूसरा, परमेश्वर को "बचा-खुचा" देने की आदत छोड़ो। थकावट के बाद बची हुई प्रार्थना, पढ़ाई के बाद बचा हुआ समय, दोस्तों के बाद बचा हुआ दिल। लैव्यव्यवस्था कहती है: निर्दोष, सबसे अच्छा। इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें "परफेक्ट" बनना है। इसका मतलब यह है कि परमेश्वर के लिए तुम्हारा "पहला" हो, तुम्हारा "बचा हुआ" नहीं।

तीसरा, याद रखो कि तुम खुद निर्दोष बलि नहीं चढ़ा सकते, यीशु ने वह काम कर दिया। तुम्हारी शुद्धता तुम्हारे प्रयासों पर नहीं, उनकी बलि पर टिकी है। यह बात राहत देने वाली है, खासकर जब तुम खुद से थक जाते हो।

इस पर बात करो

अगर तुम ईमानदारी से देखो, तो तुम परमेश्वर को अपना "पहला" देते हो या "बचा हुआ"? किस चीज़ में यह सबसे साफ दिखता है?

लैव्यव्यवस्था 22 में बार-बार "निर्दोष" शब्द आता है। यीशु ने खुद को उस निर्दोष बलि के रूप में दिया। यह जानकर तुम्हारे अपने "काफी अच्छा न होने" के अहसास के साथ क्या होता है?

साथ में प्रार्थना

पवित्र परमेश्वर, आप अलग हैं, ऊँचे हैं, और फिर भी आपने यीशु में हमारे बीच आने का रास्ता बनाया। मैं मानता हूँ कि अक्सर मैं आपको वह नहीं देता जो सबसे अच्छा है। मुझे माफ करें। मुझे सिखाइए कि मैं आपके लिए अलग की गई ज़िंदगी जी

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लैव्यव्यवस्था 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 22 किस विषय में है?
लैव्यव्यवस्था 22 पढ़ना ऐसा लगता है जैसे किसी पुरानी नियमावली में झाँक रहे हों। पशुओं के दोष, याजकों की शुद्धता, कौन क्या खा सकता है और कौन नहीं। पहली नज़र में यह अध्याय दूर लगता है, शायद कुछ अजीब भी। लेकिन ठहरिए। इसे पढ़ने का तरीका बदलिए, तो कुछ बहुत गहरा सामने आता है।
लैव्यव्यवस्था 22 क्या कहता है?
आज हम बलि नहीं चढ़ाते। हम मंदिर में नहीं जाते। तो यह अध्याय हमसे क्या कहता है?
लैव्यव्यवस्था 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
लैव्यव्यवस्था के ये नियम एक कमी की ओर इशारा करते हैं। हर बलि, हर निर्दोष पशु, हर शुद्धिकरण, ये सब एक ही सवाल पूछते थे: पापी इंसान पवित्र परमेश्वर के पास कैसे आ सकता है?
किशोर लैव्यव्यवस्था 22 से क्या सीख सकते हैं?
तुम शायद सोचोगे: इसका मेरी ज़िंदगी से क्या लेना-देना? बहुत कुछ।
लैव्यव्यवस्था 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम ईमानदारी से देखो, तो तुम परमेश्वर को अपना "पहला" देते हो या "बचा हुआ"? किस चीज़ में यह सबसे साफ दिखता है?

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