लैव्यव्यवस्था 25
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
परमेश्वर ने सीनै पर्वत पर मूसा से एक अनोखी बात कही। उन्होंने कहा कि जिस देश में इस्राएली लोग जाएँगे, वहाँ की भूमि को भी विश्राम चाहिए। छः साल लोग खेत बोएँ और फल इकट्ठा करें, पर सातवें साल भूमि को आराम मिले। उस साल न बोना, न काटना। जो अपने आप उग आए, वही सबके खाने के लिए हो, गरीब के लिए भी और पशुओं के लिए भी।
फिर परमेश्वर एक और बड़ी बात बताते हैं। सात बार सात साल, यानी उनचास साल गिनने के बाद, पचासवाँ साल आता है। उसे “योबेल” या जुबली का साल कहा जाता है। उस साल नरसिंगा फूँका जाता था, और एक बड़ा ऐलान होता था, हर व्यक्ति अपनी ज़मीन पर वापस लौटेगा, और जो गुलाम बन गया था वह आज़ाद होगा। अगर किसी ने गरीबी के कारण अपनी ज़मीन बेच दी थी, तो जुबली के साल वह ज़मीन उसे वापस मिल जाती थी। अगर कोई इतना गरीब हो गया था कि उसे खुद को या अपने परिवार को काम के लिए बेचना पड़ा, तो जुबली के साल वह भी आज़ाद हो जाता था।
परमेश्वर यह भी कहते हैं कि इस्राएली एक दूसरे पर अन्याय न करें, ब्याज लेकर गरीब भाई को और दबाएँ नहीं, और गुलाम के साथ कठोरता से पेश न आएँ। कारण साफ है, वे कहते हैं, “मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ, मैं तुम्हें मिस्र देश से निकाल लाया हूँ।”
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय थोड़ा जटिल लग सकता है, इतने सारे नियम ज़मीन और पैसे और साल गिनने के बारे में। पर इसके पीछे एक गहरी बात है। परमेश्वर कह रहे हैं कि इस दुनिया में कुछ भी हमेशा के लिए किसी का नहीं है, भूमि भी नहीं। वे खुद कहते हैं, “भूमि मेरी है।” इस्राएली सिर्फ उसमें रहनेवाले हैं, मालिक नहीं। इसलिए कोई भी गरीबी हमेशा के लिए नहीं रहनी चाहिए। गलतियाँ होती हैं, लोग कर्ज में डूब जाते हैं, कभी-कभी खुद को भी बेचना पड़ता है, पर परमेश्वर एक दरवाज़ा खुला रखते हैं, जुबली का साल। हर पचासवें साल सब कुछ फिर से शुरू हो सकता है।
यह सोचने वाली बात है कि परमेश्वर को यह इतना ज़रूरी क्यों लगा कि उन्होंने एक पूरा साल इसके लिए अलग रखा। शायद इसलिए क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि कोई परिवार हमेशा के लिए गरीबी में फँसा रहे, जबकि दूसरा परिवार हमेशा अमीर बना रहे। यह एक तरह की दूसरी शुरुआत थी, जो नियम द्वारा तय थी, किसी की दया पर निर्भर नहीं।
एक जैसा सूत्र
बाइबल में बार-बार यह विचार आता है कि परमेश्वर बंधन से छुड़ाते हैं और नया मौका देते हैं। जुबली का साल इसी बात की एक तस्वीर है। बहुत बाद में, जब यीशु मसीह अपनी सेवा शुरू करते हैं, वे नासरत के आराधनालय में यशायाह की किताब से पढ़ते हैं, “बंधुओं के लिए छुटकारे का प्रचार करने” की बात, और कहते हैं कि यह वचन उनमें पूरा हो गया है। जुबली का साल सिर्फ ज़मीन और पैसे के बारे में नहीं था, यह इस बात का इशारा था कि एक दिन परमेश्वर खुद आकर लोगों को पाप की गुलामी से पूरी तरह आज़ाद करेंगे। यीशु मसीह वह असली जुबली लेकर आए, जिसमें हर इंसान, चाहे कितना भी टूटा हुआ या कर्ज़दार हो, नई शुरुआत पा सकता है।
तुम्हारे लिए
शायद तुम्हारे पास ज़मीन नहीं है जिसे खोने या वापस पाने की चिंता हो, पर यह सोचना अच्छा है कि क्या तुम किसी ऐसे दोस्त को जानते हो जो गलती कर चुका है और लगता है जैसे उसे दूसरा मौका नहीं मिलेगा। परमेश्वर का दिल ऐसा है कि वे नई शुरुआत देना चाहते हैं, हमेशा के लिए सज़ा देना नहीं चाहते। क्या तुम किसी को माफ करने या दूसरा मौका देने के लिए तैयार हो, भले ही नियम तुम्हें मजबूर न करे?
बातचीत करें
अगर परमेश्वर कहते हैं कि भूमि उनकी है और हम सिर्फ उसमें रहनेवाले हैं, तो इससे तुम्हारे पास जो चीज़ें हैं उनके बारे में तुम्हारी सोच कैसे बदल सकती है?
क्यों लगता है कि परमेश्वर ने गरीब और गुलाम बने भाई के लिए दूसरा मौका देना इतना ज़रूरी समझा?
साथ में प्रार्थना करें
प्रभु, आप भूमि और सब कुछ के मालिक हैं, हम सिर्फ आपकी दी हुई चीज़ों को संभालते हैं। धन्यवाद कि आप हमें हमेशा के लिए गलतियों में फँसा हुआ नहीं छोड़ते, आप नई शुरुआत देते हैं। हमें सिखाइए कि हम भी दूसरों को माफ करें और उनके साथ नियम से नहीं, बल्कि प्रेम से पेश आएँ। आमीन।
लैव्यव्यवस्था 25 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लैव्यव्यवस्था 25 किस विषय में है?
लैव्यव्यवस्था 25 क्या कहता है?
लैव्यव्यवस्था 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे लैव्यव्यवस्था 25 से क्या सीख सकते हैं?
लैव्यव्यवस्था 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
और जुबली के वर्ष में छूट जाएगा, और वह अपनी निज भूमि का अधिकारी हो जाएगा।" ध्यान दे, जिसके पास लौटाने को कुछ न था, उसे भी भूमि वापस मिली। छुटकारा उसकी जेब पर नहीं, परमेश्वर के ठहराए समय पर टिका था। तेरी असफलता आखिरी शब्द नहीं है। जो तू खो बैठा है, उसे लौटाने वाला परमेश्वर आज भी जीवित है।
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