7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मरकुस 10

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यीशु और उनके चेले यरदन के पार आए। बहुत सारे लोग फिर इकट्ठे हो गए। फरीसियों ने यीशु को फँसाना चाहा। उन्होंने पूछा, "क्या पति अपनी पत्नी को त्याग सकता है?" यीशु ने जवाब दिया, "परमेश्वर ने शुरू से पुरुष और स्त्री को बनाया, ताकि वे दोनों मिलकर एक हो जाएँ। जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे कोई अलग न करे।"

फिर कुछ लोग अपने छोटे बच्चों को यीशु के पास लाने लगे। वे चाहते थे कि यीशु उन पर हाथ रखें। पर चेलों ने उन्हें डाँटा, "दूर हटो, गुरु व्यस्त हैं!" यह सुनकर यीशु क्रुद्ध हो गए। उन्होंने कहा, "बालकों को मेरे पास आने दो! परमेश्वर का राज्य तो ऐसों ही का है।" उन्होंने बच्चों को गोद में उठाया और उन्हें आशीष दी।

फिर एक धनी आदमी दौड़ता हुआ आया और घुटने टेककर पूछा, "अनन्त जीवन पाने के लिए मैं क्या करूँ?" यीशु ने उससे आज्ञाओं की बात की। आदमी बोला, "ये सब तो मैं बचपन से मानता आया हूँ।" यीशु ने प्रेम से उसकी ओर देखा और कहा, "जा, अपना सब कुछ गरीबों को दे दे, फिर मेरे पीछे हो ले।" यह सुनकर उस आदमी का चेहरा उदास हो गया, क्योंकि वह बहुत धनी था, और वह शोक करता हुआ चला गया।

यीशु ने चेलों से कहा, "धनवान के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कठिन है, जैसे ऊँट का सूई के छेद में से निकलना!" चेले चकित हुए और बोले, "तो किसका उद्धार हो सकता है?" यीशु ने कहा, "मनुष्यों से यह नहीं हो सकता, पर परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।"

वे यरूशलेम की ओर चल पड़े। यीशु ने अपने चेलों को बताया, "मुझे पकड़वाया जाएगा, मेरा उपहास होगा, मुझे मार डाला जाएगा, पर तीन दिन बाद मैं जी उठूँगा।" फिर याकूब और यूहन्ना ने यीशु से बड़ी जगह माँगी, "हमें अपने दाहिने और बाएँ बैठा दीजिए।" यीशु ने कहा, "जो बड़ा बनना चाहे, वह सबका सेवक बने। मनुष्य का पुत्र सेवा कराने नहीं, सेवा करने आया है।"

अंत में वे यरीहो पहुँचे। वहाँ बरतिमाई नाम का एक अंधा भिखारी सड़क किनारे बैठा था। जब उसने सुना कि यीशु पास से जा रहे हैं, तो वह ज़ोर से चिल्लाया, "हे दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया करो!" लोगों ने उसे डाँटा, पर वह और भी ज़ोर से पुकारने लगा। यीशु रुक गए और बोले, "उसे बुलाओ।" बरतिमाई अपना कपड़ा फेंककर उठा और दौड़ा। यीशु ने पूछा, "तू क्या चाहता है?" उसने कहा, "मैं देखना चाहता हूँ!" यीशु ने कहा, "तेरे विश्वास ने तुझे चंगा कर दिया है।" और वह तुरन्त देखने लगा, और यीशु के पीछे चल पड़ा।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय दिखाता है कि यीशु किन लोगों की परवाह करते हैं। छोटे बच्चे, जिन्हें कोई महत्वपूर्ण नहीं समझता था, उनके लिए यीशु ने समय निकाला। एक अंधा भिखारी, जिसे लोग चुप कराना चाहते थे, उसकी पुकार यीशु ने सुनी। पर धनी आदमी, जिसके पास सब कुछ था, वह उदास होकर चला गया क्योंकि वह अपना धन छोड़ नहीं सका। यीशु सिखाते हैं कि परमेश्वर के राज्य में बड़ा वही है जो सबसे छोटा बनकर सेवा करे, जैसे एक बच्चा निर्भर होकर आता है।

समान सूत्र

यीशु खुद ने कहा कि वे सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने और अपना प्राण देने आए हैं। यही पूरी कहानी का केंद्र है। बरतिमाई अंधा था, पर उसने यीशु को "दाऊद की सन्तान" पुकारा, यानी वह वादा किया हुआ राजा जिसकी प्रतीक्षा वर्षों से थी। परमेश्वर ने शुरू से वादा किया था कि वे अपने लोगों की मदद करेंगे, और यीशु में वह वादा पूरा हुआ।

तुम्हारे लिए

क्या तुम कभी किसी को छोटा समझकर दूर धकेलते हो? यीशु चाहते हैं कि तुम बच्चों जैसे बनो, यानी भरोसा करो कि परमेश्वर तुम्हें प्यार करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे तुम हो। आज किसी छोटे को अपने पास बुलाओ, या किसी जरूरतमंद की पुकार सुनो, जैसे यीशु ने बरतिमाई की सुनी।

बात करें

अगर तुम वहाँ होते जब चेलों ने बच्चों को डाँटा, तो तुम क्या करते?

बरतिमाई ने चिल्लाना क्यों नहीं छोड़ा, जबकि लोग उसे चुप कराना चाहते थे?

साथ में प्रार्थना

प्रिय प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप छोटों को भी अपने पास बुलाते हैं। जैसे आपने बरतिमाई की पुकार सुनी, वैसे ही हमारी भी सुनिए। हमें सिखाइए कि दूसरों की सेवा करना ही सच में बड़ा बनना है। आमीन।

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मरकुस 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मरकुस 10 किस विषय में है?
यीशु और उनके चेले यरदन के पार आए। बहुत सारे लोग फिर इकट्ठे हो गए। फरीसियों ने यीशु को फँसाना चाहा। उन्होंने पूछा, "क्या पति अपनी पत्नी को त्याग सकता है?" यीशु ने जवाब दिया, "परमेश्वर ने शुरू से पुरुष और स्त्री को बनाया, ताकि वे दोनों मिलकर एक हो जाएँ। जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे कोई अलग न करे।"
मरकुस 10 क्या कहता है?
फिर एक धनी आदमी दौड़ता हुआ आया और घुटने टेककर पूछा, "अनन्त जीवन पाने के लिए मैं क्या करूँ?" यीशु ने उससे आज्ञाओं की बात की। आदमी बोला, "ये सब तो मैं बचपन से मानता आया हूँ।" यीशु ने प्रेम से उसकी ओर देखा और कहा, "जा, अपना सब कुछ गरीबों को दे दे, फिर मेरे पीछे हो ले।" यह सुनकर उस आदमी का चेहरा उदास हो गया, क्योंकि वह बहुत धनी था, और वह शोक करता हुआ चला गया।
मरकुस 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
वे यरूशलेम की ओर चल पड़े। यीशु ने अपने चेलों को बताया, "मुझे पकड़वाया जाएगा, मेरा उपहास होगा, मुझे मार डाला जाएगा, पर तीन दिन बाद मैं जी उठूँगा।" फिर याकूब और यूहन्ना ने यीशु से बड़ी जगह माँगी, "हमें अपने दाहिने और बाएँ बैठा दीजिए।" यीशु ने कहा, "जो बड़ा बनना चाहे, वह सबका सेवक बने। मनुष्य का पुत्र सेवा कराने नहीं, सेवा करने आया है।"
बच्चे मरकुस 10 से क्या सीख सकते हैं?
यह अध्याय दिखाता है कि यीशु किन लोगों की परवाह करते हैं। छोटे बच्चे, जिन्हें कोई महत्वपूर्ण नहीं समझता था, उनके लिए यीशु ने समय निकाला। एक अंधा भिखारी, जिसे लोग चुप कराना चाहते थे, उसकी पुकार यीशु ने सुनी। पर धनी आदमी, जिसके पास सब कुछ था, वह उदास होकर चला गया क्योंकि वह अपना धन छोड़ नहीं सका। यीशु सिखाते हैं कि परमेश्वर के राज्य में बड़ा वही है जो सबसे छोटा बनकर सेवा करे, जैसे एक बच्चा निर्भर होकर आता है।
मरकुस 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम कभी किसी को छोटा समझकर दूर धकेलते हो? यीशु चाहते हैं कि तुम बच्चों जैसे बनो, यानी भरोसा करो कि परमेश्वर तुम्हें प्यार करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे तुम हो। आज किसी छोटे को अपने पास बुलाओ, या किसी जरूरतमंद की पुकार सुनो, जैसे यीशु ने बरतिमाई की सुनी।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

यीशु आगे आगे चल रहे थे, और शिष्य डरे हुए पीछे। तब उन्होंने कहा, "देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा।" वे जानते थे कि आगे क्या है, फिर भी कदम नहीं रुके। तुम्हारे लिए यह रास्ता उन्होंने आँखें खोलकर चुना, अनजाने में नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

चेले अचम्भित थे, और यीशु ने उन्हें डाँटा नहीं। उसने कहा, "हे बालको," जैसे कोई पिता घबराए हुए बच्चे को गोद में लेता है। फिर कठोर सच्चाई: "जो धन पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!" समस्या पैसा नहीं, भरोसा है। आज तेरी सुरक्षा किस पर टिकी है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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