3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

मरकुस 10

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

बच्चों को यीशु के पास लाना

एक दिन बहुत सारे लोग यीशु के पास आए। कुछ माएँ भी आईं। उनकी गोद में छोटे-छोटे बच्चे थे। वे चाहती थीं, यीशु उन्हें छुए।

पर चेलों ने कहा, "नहीं, नहीं! मत लाओ।" उन्होंने बच्चों को डाँटा।

व्याख्या

यीशु ने यह देखा। वे उदास हुए। बहुत उदास। उन्होंने चेलों से कहा, "बच्चों को मेरे पास आने दो। उन्हें मना मत करो।"

फिर यीशु मुस्कुराए। उन्होंने कहा, "परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है।"

सोचो कितना अच्छा लगा होगा। यीशु ने हर बच्चे को गोद में लिया। एक-एक करके। उन्होंने अपने हाथ उनके सिर पर रखे। और उन्हें आशीष दी।

इसका मतलब क्या है?

यीशु किसी बड़े आदमी के पास नहीं भागे। वे बच्चों के पास आए। छोटे बच्चों के पास, जो कुछ भी नहीं जानते थे। जो बस यीशु की गोद में बैठना चाहते थे।

यीशु ने कहा, "जो बालक की तरह परमेश्वर के राज्य को ग्रहण नहीं करता, वह उसमें प्रवेश नहीं पाएगा।" यानी, जैसे एक बच्चा अपनी माँ पर भरोसा करता है, वैसे ही हमें परमेश्वर पर भरोसा करना है। बस भरोसा। कुछ साबित करने की जरूरत नहीं।

समान सूत्र

बाद में एक धनी आदमी यीशु के पास आया। उसने सोचा, वह अपने भले कामों से स्वर्ग कमा सकता है। पर यीशु ने कहा, यह मनुष्य से नहीं हो सकता, केवल परमेश्वर से हो सकता है।

यीशु स्वयं इसलिए आए। उन्होंने कहा, "मनुष्य का पुत्र सेवा टहल करने आया, और बहुतों के छुटकारे के लिये अपना प्राण देने आया।" यीशु ने अपनी जान दी, ताकि हम परमेश्वर के पास आ सकें। जैसे एक बच्चा दौड़कर पिता की गोद में आता है।

बरतिमाई नाम का एक अंधा आदमी भी यही जानता था। उसने पुकारा, "यीशु, मुझ पर दया कर!" लोगों ने उसे चुप कराने की कोशिश की। पर वह और ज़ोर से पुकारता रहा। यीशु ने उसे बुलाया। और उसकी आँखें खुल गईं।

तुम्हारे लिए

तुम भी यीशु के पास आ सकते हो। ठीक वैसे ही जैसे तुम हो। तुम्हें कुछ बड़ा बनने की जरूरत नहीं। बस उनके पास आओ, जैसे वे बच्चे आए थे।

जब तुम्हें डर लगे, या कुछ चाहिए हो, तो बरतिमाई जैसे पुकार सकते हो। यीशु सुनते हैं।

बात करें

तुम्हें क्या लगता है, यीशु ने बच्चों को गोद में क्यों लिया?

अगर तुम यीशु से एक चीज़ माँग सकते, तो क्या माँगते?

साथ में प्रार्थना करें

प्यारे यीशु, धन्यवाद, आपने बच्चों को अपने पास बुलाया। मुझे भी अपनी गोद में लीजिए। मुझ पर दया कीजिए, जैसे आपने बरतिमाई पर की। आमेन।

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मरकुस 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मरकुस 10 किस विषय में है?
एक दिन बहुत सारे लोग यीशु के पास आए। कुछ माएँ भी आईं। उनकी गोद में छोटे-छोटे बच्चे थे। वे चाहती थीं, यीशु उन्हें छुए।
मरकुस 10 क्या कहता है?
फिर यीशु मुस्कुराए। उन्होंने कहा, "परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है।"
मरकुस 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु ने कहा, "जो बालक की तरह परमेश्वर के राज्य को ग्रहण नहीं करता, वह उसमें प्रवेश नहीं पाएगा।" यानी, जैसे एक बच्चा अपनी माँ पर भरोसा करता है, वैसे ही हमें परमेश्वर पर भरोसा करना है। बस भरोसा। कुछ साबित करने की जरूरत नहीं।
नन्हे बच्चे मरकुस 10 से क्या सीख सकते हैं?
बरतिमाई नाम का एक अंधा आदमी भी यही जानता था। उसने पुकारा, "यीशु, मुझ पर दया कर!" लोगों ने उसे चुप कराने की कोशिश की। पर वह और ज़ोर से पुकारता रहा। यीशु ने उसे बुलाया। और उसकी आँखें खुल गईं।
मरकुस 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें क्या लगता है, यीशु ने बच्चों को गोद में क्यों लिया?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

यीशु आगे आगे चल रहे थे, और शिष्य डरे हुए पीछे। तब उन्होंने कहा, "देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा।" वे जानते थे कि आगे क्या है, फिर भी कदम नहीं रुके। तुम्हारे लिए यह रास्ता उन्होंने आँखें खोलकर चुना, अनजाने में नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

चेले अचम्भित थे, और यीशु ने उन्हें डाँटा नहीं। उसने कहा, "हे बालको," जैसे कोई पिता घबराए हुए बच्चे को गोद में लेता है। फिर कठोर सच्चाई: "जो धन पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!" समस्या पैसा नहीं, भरोसा है। आज तेरी सुरक्षा किस पर टिकी है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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