मरकुस 10
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यह अध्याय एक यात्रा के भीतर पाँच अलग-अलग मुलाकातों की कड़ी है, और हर मुलाकात यीशु के भीतर की उस सच्चाई को खोलती है जिसे इंसान समझना नहीं चाहता। पहले फरीसी आते हैं और तलाक पर सवाल उठाकर यीशु को फंसाना चाहते हैं। यीशु मूसा की व्यवस्था के पीछे जाते हैं, सृष्टि की शुरुआत तक, और कहते हैं कि परमेश्वर ने पुरुष और नारी को एक तन बनाने के लिए जोड़ा है, और मनुष्य को यह जोड़ तोड़ना नहीं चाहिए। यह कठोर हृदय की छूट थी, आदर्श नहीं।
फिर बच्चे लाए जाते हैं, और चेले उन्हें रोकते हैं, शायद यह सोचकर कि गुरु का समय बच्चों के लिए नहीं है। यीशु क्रुद्ध हो जाते हैं, यह शब्द ध्यान देने लायक है, और कहते हैं कि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है। इसके बाद एक धनी युवक दौड़ता हुआ आता है, घुटने टेकता है, अनन्त जीवन पूछता है। वह आज्ञाओं का पालन करता आया है, पर यीशु उसकी एक कमी देखते हैं, उसकी संपत्ति का बंधन, और उससे कहते हैं सब कुछ बेच दे। युवक उदास होकर चला जाता है।
यीशु फिर अपने चेलों को याद दिलाते हैं कि वे यरूशलेम जा रहे हैं, जहाँ उन्हें पकड़वाया जाएगा, ठट्ठा किया जाएगा, कोड़े मारे जाएंगे, मार डाला जाएगा, और तीसरे दिन वे जी उठेंगे। ठीक इसी बात के बाद याकूब और यूहन्ना आकर महिमा में ऊँचे स्थान माँगते हैं। यीशु उनसे पूछते हैं क्या वे उनका दुख का कटोरा पी सकते हैं, और बताते हैं कि उनके बीच बड़ा होने का अर्थ है सेवक बनना, दास बनना, क्योंकि मनुष्य का पुत्र स्वयं सेवा करने और अपना प्राण देने आया है।
अंत में यरीहो के पास अंधा बरतिमाई सड़क किनारे बैठा है। भीड़ उसे चुप कराना चाहती है, पर वह और भी पुकारता है। यीशु ठहरते हैं, उसे बुलाते हैं, पूछते हैं वह क्या चाहता है, और उसकी आँखें खुल जाती हैं। वह मार्ग में यीशु के पीछे हो लेता है।
इसका मतलब क्या है?
इस अध्याय में एक ही सवाल हर बार अलग रूप में लौटता है, परमेश्वर के राज्य में कौन प्रवेश करेगा, और किस आधार पर। फरीसी सोचते हैं नियम की सही व्याख्या से। युवक सोचता है अच्छे कामों से। याकूब और यूहन्ना सोचते हैं पद और स्थान से। हर बार यीशु उस सोच को उलट देते हैं। राज्य किसी की योग्यता, धन या दावे से नहीं मिलता, बल्कि उस भरोसे से जो एक बच्चे में होता है, जो खाली हाथ आता है और अपने बल पर कुछ नहीं मांगता।
यह कहना कठिन है, और यीशु इसे आसान नहीं बनाते। ऊँट का सुई के नाके से निकलना असंभव जैसा है, और चेले हैरान होकर पूछते हैं तो फिर किसका उद्धार हो सकता है। यीशु का उत्तर पूरे अध्याय की कुंजी है, मनुष्यों से यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है। उद्धार मानवीय प्रयास की सीढ़ी नहीं है, यह परमेश्वर का काम है।
समान सूत्र
इस अध्याय का केंद्र वह वचन है जो यीशु स्वयं अपने बारे में बोलते हैं, मनुष्य का पुत्र इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों के छुटकारे के लिये अपना प्राण दे। यही उनका पूरा जीवन, और पूरी बाइबल की कहानी का मोड़ है। सृष्टि के समय परमेश्वर ने मनुष्य को एक बनाया, जैसा आयत 6 से 8 याद दिलाते हैं, पर पाप ने वह जोड़ तोड़ दिया, इंसानों के बीच भी और परमेश्वर के साथ भी। यीशु का यरूशलेम जाना, पकड़वाना, मार डाला जाना, और तीसरे दिन जी उठना, यही वह रास्ता है जिससे टूटा हुआ फिर जुड़ता है। बरतिमाई की पुकार, हे दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कर, यह पहचानती है कि यीशु वही प्रतीक्षित राजा हैं, और उसका अंधापन दूर होना दिखाता है कि यही राजा देखने की शक्ति भी देते हैं, जिस तरह वे अंधे दिलों को भी खोलते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम्हारी उम्र में यह सवाल बार बार सामने आता है कि तुम्हारा मूल्य किस बात पर टिका है, तुम्हारे अंकों पर, तुम्हारी शक्ल पर, तुम्हारे दोस्तों की संख्या पर, तुम्हारे भविष्य की योजना पर। धनी युवक के पास सब कुछ था, फिर भी वह उदास होकर चला गया, क्योंकि जो चीज़ उससे माँगी गई वह छोड़ना नहीं चाहता था। यह सवाल पूछने लायक है, तुम्हारे जीवन में वह कौन सी चीज़ है जिसे यीशु के पीछे चलने के लिए छोड़ना पड़े। शायद वह पैसा नहीं है, शायद वह नियंत्रण है, या दूसरों की राय है, या तुम्हारी अपनी योजना।
बच्चे की तरह राज्य को ग्रहण करना कमजोरी नहीं है, यह ईमानदारी है, यह मानना कि तुम अपने बल पर परमेश्वर के सामने नहीं ठहर सकते। और बरतिमाई की तरह पुकारना सीखो, भले भीड़ तुम्हें चुप कराए। यीशु ठहरते हैं। वे सुनते हैं।
बात करें
तुम्हारे जीवन में वह कौन सी चीज़ है जिसे छोड़ना तुम्हें सबसे कठिन लगेगा, अगर यीशु आज तुम्हारे पास आकर उसे माँगें?
याकूब और यूहन्ना बड़ा बनना चाहते थे, यीशु ने कहा सेवक बनो। तुम्हारे स्कूल, दोस्ती या घर में "बड़ा बनने" की यह इच्छा कहाँ दिखती है, और सेवक बनना उसकी जगह कैसा दिखेगा?
साथ में प्रार्थना करें
प्रभु यीशु, हमारी आँखें अक्सर बंद रहती हैं, वैसे ही जैसे बरतिमाई की थीं। हमें वह भरोसा दीजिए जो बच्चे में होता है, और वह हिम्मत जो पुकारना नहीं छोड़ती। जो कुछ हमें आपके पीछे चलने से रोकता है, उसे पहचानने में हमारी मदद कीजिए, और हमें सेवा करने की इच्छा दीजिए, जैसे आप ने स्वयं सेवा की। आमीन।
मरकुस 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मरकुस 10 किस विषय में है?
मरकुस 10 क्या कहता है?
मरकुस 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर मरकुस 10 से क्या सीख सकते हैं?
मरकुस 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यीशु आगे आगे चल रहे थे, और शिष्य डरे हुए पीछे। तब उन्होंने कहा, "देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा।" वे जानते थे कि आगे क्या है, फिर भी कदम नहीं रुके। तुम्हारे लिए यह रास्ता उन्होंने आँखें खोलकर चुना, अनजाने में नहीं।
चेले अचम्भित थे, और यीशु ने उन्हें डाँटा नहीं। उसने कहा, "हे बालको," जैसे कोई पिता घबराए हुए बच्चे को गोद में लेता है। फिर कठोर सच्चाई: "जो धन पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!" समस्या पैसा नहीं, भरोसा है। आज तेरी सुरक्षा किस पर टिकी है?
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