मत्ती 3
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला यहूदिया के जंगल में रहता था। सोचो, कैसा आदमी रहा होगा वह, ऊँट के रोम का खुरदरा वस्त्र पहने, चमड़े का कमरबन्द बाँधे, टिड्डियाँ और शहद खाते हुए। यह कोई आरामदायक जीवन नहीं था। फिर भी लोग दूर-दूर से उसके पास आते थे, यरूशलेम से, पूरे यहूदिया से, यरदन नदी के आस-पास से। क्यों? क्योंकि वह कुछ ऐसा कह रहा था जो लोगों के दिल को छू जाता था: "मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।"
मन फिराना यानी अपनी दिशा बदलना, जैसे कोई गलत रास्ते पर जा रहा हो और अचानक मुड़कर सही रास्ते पर चल पड़े। यूहन्ना लोगों को यरदन नदी में बपतिस्मा देता था, और जो आते थे वे अपने पाप मानकर यह दिखाते थे कि वे सचमुच बदलना चाहते हैं।
लेकिन जब फरीसी और सदूकी, यानी उस समय के धार्मिक और प्रभावशाली लोग, बपतिस्मा लेने आए, तो यूहन्ना ने उन्हें कड़ी बात कही। उसने उन्हें "साँप के बच्चे" कहा और पूछा कि वे केवल दिखावे के लिए तो नहीं आए। वह चाहता था कि उनका मन फिराव असली हो, फल देने वाला हो। उसने यह भी कहा कि केवल इब्राहीम की संतान होने से कोई नहीं बचता, परमेश्वर तो पत्थरों से भी संतान बना सकते हैं। फिर उसने यीशु के आने की बात कही, जो उससे भी शक्तिशाली है और पवित्र आत्मा तथा आग से बपतिस्मा देगा।
और फिर यीशु स्वयं आया। यह चौंकाने वाली बात है, है न? यीशु को बपतिस्मे की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि उसने कोई पाप नहीं किया था। यूहन्ना ने भी यही कहा और उसे रोकने की कोशिश की। पर यीशु ने उत्तर दिया कि ऐसा होना ज़रूरी है, "क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।" और जैसे ही यीशु पानी से बाहर आया, आकाश खुल गया, पवित्र आत्मा कबूतर के समान उस पर उतरा, और एक आवाज़ आकाश से आई: "यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।"
इसका क्या मतलब है?
यह अंश हमें दिखाता है कि परमेश्वर का राज्य केवल बातों की बात नहीं है, यह सचमुच बदलाव माँगता है। यूहन्ना यह नहीं कह रहा था "थोड़ा अच्छा बन जाओ।" वह कह रहा था, तुम्हारी दिशा ही बदलनी चाहिए। और यह बदलाव बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है, इसीलिए वह धार्मिक नेताओं से भी सीधी बात करता है। धर्म में बड़ा नाम होना काफी नहीं, दिल सही होना चाहिए।
पर इस अध्याय का सबसे अनोखा हिस्सा वह क्षण है जब यीशु बिना पाप के, पापियों के बपतिस्मे में शामिल होता है। क्यों? पाठ खुद यह पूरी तरह नहीं खोलता, पर यीशु कहता है यह "सब धार्मिकता को पूरा" करने के लिए ज़रूरी है। शायद इसका मतलब है कि यीशु शुरू से ही अपने आप को उन लोगों के साथ खड़ा कर रहा है जिन्हें वह बचाने आया है।
सिलसिला
यूहन्ना का संदेश भविष्यद्वक्ता यशायाह की पुरानी भविष्यवाणी को पूरा करता है, "जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्द हो रहा है, कि प्रभु का मार्ग तैयार करो।" सदियों पहले कहा गया वचन अब सच हो रहा है। और जब आकाश से आवाज़ आती है, "यह मेरा प्रिय पुत्र है," तो यह वही बात है जो भजन संहिता में पहले से लिखी थी। परमेश्वर अपनी बातों पर कायम रहते हैं, चाहे उसमें कितना भी समय लगे।
तुम्हारे लिए
शायद तुम कभी सोचते हो कि चर्च जाना, प्रार्थना करना, बाइबल पढ़ना ही काफी है। पर यूहन्ना पूछता है, क्या इससे तुम्हारा दिल भी बदल रहा है? क्या तुम्हारी ज़िंदगी में फल दिख रहा है, यानी सच्चाई, दया, ईमानदारी? मन फिराना एक बार की बात नहीं, यह रोज़ की यात्रा है, हर बार जब तुम गलत करते हो और फिर से परमेश्वर की ओर मुड़ते हो।
चर्चा के लिए
यूहन्ना ने फरीसियों और सदूकियों को इतनी कड़ी बात क्यों कही होगी, जबकि वे तो बपतिस्मा लेने आए थे?
यीशु को बपतिस्मे की ज़रूरत नहीं थी, फिर भी उसने बपतिस्मा क्यों लिया, इस बारे में तुम क्या सोचते हो?
आराधना
प्रिय परमेश्वर, आपने यूहन्ना के द्वारा लोगों को बुलाया कि वे अपना मन फिराएँ, और आपने यीशु को भेजा ताकि वह हमारे साथ खड़ा हो सके। हमारी मदद करें कि हम सिर्फ दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चे दिल से आपकी ओर मुड़ें। हमें याद दिलाएँ कि आप हमसे भी उतने ही प्रसन्न हो सकते हैं जितने आप यीशु से थे। आमीन।
मत्ती 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मत्ती 3 किस विषय में है?
मत्ती 3 क्या कहता है?
मत्ती 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे मत्ती 3 से क्या सीख सकते हैं?
मत्ती 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यूहन्ना उन्हें लौटाता नहीं, पर पूछता है, "हे साँप के बच्चों, तुम्हें किसने चेतावनी दी कि आनेवाले प्रकोप से भागो?" वे सही जगह आए थे, पर शायद गलत कारण से। सज़ा से बचने की चाह और परमेश्वर की ओर मुड़ने की चाह, दोनों एक जैसी दिखती हैं। आज तू जिस प्रार्थना में खड़ा है, उसमें डर बोल रहा है या प्रेम?
यूहन्ना कहता है, "उसका सूप उसके हाथ में है।" सूप गेहूँ को नष्ट करने नहीं, उसे भूसी से अलग करने के लिए उठाया जाता है। ध्यान दे, वही हाथ जो भूसी को जलाता है, गेहूँ को खत्ते में सम्भालकर रखता है। आज जो तेज़ हवा तेरे जीवन पर चल रही है, शायद वह तुझे उड़ाने नहीं, तुझमें से भूसी हटाने आई है।
लोग यरूशलेम से चलकर जंगल तक आए, और वहाँ पानी में खड़े होकर "अपने अपने पापों को मानकर" बपतिस्मा लिया। किसी ने बहाना नहीं बनाया। हर एक ने अपना नाम, अपना बोझ खुद कहा। सोचो, तुम्हारे मन में जो बात सालों से छिपी है, क्या तुमने कभी उसे शब्द दिए हैं? जो पाप कहा नहीं जाता, वह धोया भी नहीं जाता।
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