7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मीका 7

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

मीका 7

व्याख्या

मीका बहुत उदास होकर यह अध्याय शुरू करते हैं। वे कहते हैं, "हाय मुझ पर!" वे अपने आप को उस आदमी जैसा महसूस करते हैं जो फलों की फसल के बाद बगीचे में जाए और वहाँ खाने के लिए एक भी अंजीर या अंगूर का गुच्छा न पाए। ऐसा क्यों? क्योंकि पूरे देश में एक भी भला, ईमानदार इंसान नहीं बचा है। लोग एक दूसरे को नुकसान पहुँचाने के लिए जाल बिछाते हैं। जो न्यायाधीश होना चाहिए वह घूस लेता है। जो शासक होना चाहिए वह अपनी बुराई पर गर्व करता है। मीका कहते हैं कि हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अपने सबसे करीबी दोस्त पर, यहाँ तक कि अपनी पत्नी पर भी पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि घर के अंदर भी बेटा पिता का और बेटी माँ का अपमान कर रही है।

पर फिर अचानक मीका का सुर बदल जाता है। वे कहते हैं, "परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूँगा।" भले ही सब कुछ बिगड़ गया हो, वे परमेश्वर की ओर देखना नहीं छोड़ते। वे मानते हैं कि उन्होंने खुद भी पाप किया है, इसलिए वे परमेश्वर का गुस्सा सहने को तैयार हैं, लेकिन वे जानते हैं कि एक दिन परमेश्वर उन्हें अंधकार से निकालकर उजियाले में लाएँगे।

अध्याय के अंत में मीका एक सुंदर तस्वीर दिखाते हैं, दूर दूर देशों से लोग परमेश्वर के पास आएँगे, और परमेश्वर अपनी प्रजा को वैसे ही चराएँगे जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों को चराता है। और फिर वह सबसे अनमोल वाक्य आता है, "तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे?"

इसका मतलब क्या है?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर के लोग भी कभी कभी इतने बिगड़ सकते हैं कि समाज में भरोसा ही खत्म हो जाए। मीका झूठी उम्मीद नहीं देते। वे यह नहीं कहते कि "चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।" वे ईमानदारी से मानते हैं कि हालात बहुत बुरे हैं, और यह भी मानते हैं कि उनका अपना पाप भी इसमें शामिल है।

लेकिन ठीक इसी उदासी के बीच में वे परमेश्वर की ओर देखना चुनते हैं। यह कोई सस्ती उम्मीद नहीं है। यह एक ऐसा भरोसा है जो कहता है, "मैं गिर भी जाऊँ, तो भी उठूँगा, क्योंकि यहोवा मेरे लिए ज्योति का काम देंगे।" यही बात इस अध्याय को इतना गहरा बनाती है, निराशा और भरोसा दोनों एक साथ, बिना एक दूसरे को झुठलाए।

सूत्र की कड़ी

मीका का यह सवाल, "तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे," पूरी बाइबल में गूंजता है। परमेश्वर का नाम ही "मीका" के नाम में छिपा है, इसका मतलब है "कौन है परमेश्वर जैसा?" यही सवाल पूरी किताब का दिल है।

परमेश्वर हमारे पापों को "गहरे समुद्र में डाल देंगे," मीका ऐसा कहते हैं। बहुत बाद में, यीशु मसीह आए और उन्होंने अपनी जान देकर यह दिखाया कि परमेश्वर पाप को कितनी गंभीरता से लेते हैं, और फिर भी कितनी गहराई से क्षमा कर देते हैं। मीका जिस करुणा की बात करते हैं, वह सूली पर पूरी तरह से दिखाई देती है। और वह वाचा, जो परमेश्वर ने अब्राहम से की थी, वही वाचा यीशु मसीह में पूरी होती है।

आपके लिए

शायद तुमने कभी महसूस किया हो कि तुम्हारे आस पास भी भरोसा करना मुश्किल लगता है, स्कूल में, घर में, दोस्तों के बीच। मीका तुमसे झूठ नहीं बोलते कि सब कुछ हमेशा अच्छा ही रहेगा। लेकिन वे तुम्हें एक रास्ता दिखाते हैं, परमेश्वर की ओर देखना, तब भी जब बाकी सब कुछ टूटता हुआ लगे।

जब तुमसे कोई गलती हो जाए, तुम भी मीका जैसे ईमानदार हो सकते हो। तुम कह सकते हो, "हाँ, मैंने गलत किया," और फिर उसी साँस में परमेश्वर की ओर देख सकते हो, क्योंकि वे ऐसे परमेश्वर हैं जो अधर्म को क्षमा करते हैं।

आपस में बात करें

मीका कहते हैं कि वे गिरने के बाद भी उठेंगे। क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा समय आया है जब तुम्हें लगा कि परमेश्वर ने तुम्हें फिर से उठने में मदद की?

मीका अपने दोस्तों और परिवार पर भी पूरा भरोसा नहीं कर पा रहे थे, लेकिन परमेश्वर पर भरोसा करते रहे। क्या फर्क है इंसानों पर भरोसा करने और परमेश्वर पर भरोसा करने में?

एक साथ प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, कभी कभी हमारे आसपास की दुनिया टूटी हुई लगती है, और कभी कभी हम खुद भी गलत काम कर बैठते हैं। धन्यवाद कि आप ऐसे परमेश्वर हैं जो क्षमा करना जानते हैं, और जो हमें गिरने के बाद फिर से उठाते हैं। हमें सिखाइए कि हम हमेशा आपकी ओर देखते रहें, चाहे हालात कैसे भी हों। यीशु मसीह के नाम से, आमीन।

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मीका 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मीका 7 किस विषय में है?
मीका बहुत उदास होकर यह अध्याय शुरू करते हैं। वे कहते हैं, "हाय मुझ पर!" वे अपने आप को उस आदमी जैसा महसूस करते हैं जो फलों की फसल के बाद बगीचे में जाए और वहाँ खाने के लिए एक भी अंजीर या अंगूर का गुच्छा न पाए। ऐसा क्यों? क्योंकि पूरे देश में एक भी भला, ईमानदार इंसान नहीं बचा है। लोग एक दूसरे को नुकसान पहुँचाने के लिए जाल बिछाते हैं। जो न्यायाधीश होना चाहिए वह घूस लेता है। जो शासक होना चाहिए वह अपनी बुराई पर गर्व करता है। मीका कहते हैं कि हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अपने सबसे करीबी दोस्त पर, यहाँ तक कि अपनी पत्नी पर भी पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि घर के अंदर भी बेटा पिता का और बेटी माँ का अपमान कर रही है।
मीका 7 क्या कहता है?
अध्याय के अंत में मीका एक सुंदर तस्वीर दिखाते हैं, दूर दूर देशों से लोग परमेश्वर के पास आएँगे, और परमेश्वर अपनी प्रजा को वैसे ही चराएँगे जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों को चराता है। और फिर वह सबसे अनमोल वाक्य आता है, "तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे?"
मीका 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
लेकिन ठीक इसी उदासी के बीच में वे परमेश्वर की ओर देखना चुनते हैं। यह कोई सस्ती उम्मीद नहीं है। यह एक ऐसा भरोसा है जो कहता है, "मैं गिर भी जाऊँ, तो भी उठूँगा, क्योंकि यहोवा मेरे लिए ज्योति का काम देंगे।" यही बात इस अध्याय को इतना गहरा बनाती है, निराशा और भरोसा दोनों एक साथ, बिना एक दूसरे को झुठलाए।
बच्चे मीका 7 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर हमारे पापों को "गहरे समुद्र में डाल देंगे," मीका ऐसा कहते हैं। बहुत बाद में, यीशु मसीह आए और उन्होंने अपनी जान देकर यह दिखाया कि परमेश्वर पाप को कितनी गंभीरता से लेते हैं, और फिर भी कितनी गहराई से क्षमा कर देते हैं। मीका जिस करुणा की बात करते हैं, वह सूली पर पूरी तरह से दिखाई देती है। और वह वाचा, जो परमेश्वर ने अब्राहम से की थी, वही वाचा यीशु मसीह में पूरी होती है।
मीका 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुमसे कोई गलती हो जाए, तुम भी मीका जैसे ईमानदार हो सकते हो। तुम कह सकते हो, "हाँ, मैंने गलत किया," और फिर उसी साँस में परमेश्वर की ओर देख सकते हो, क्योंकि वे ऐसे परमेश्वर हैं जो अधर्म को क्षमा करते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

तो भी यह देश अपने निवासियों के कारण, उनके कामों के फल के कारण उजाड़ हो जाएगा।" मीका बहाली की बात कर ही रहा था कि यह वाक्य बीच में आ खड़ा होता है। धरती खुद दोषी नहीं थी, उस पर रहनेवाले थे। जो हम बोते हैं, उसका असर सिर्फ हम तक नहीं रुकता, वह मिट्टी, घर, रिश्तों तक फैलता है। आज तेरे हाथ क्या बो रहे हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

मैं यहोवा के क्रोध को सहूँगा, क्योंकि मैंने उसके विरुद्ध पाप किया है," मीका कहता है। कोई बहाना नहीं, कोई दोष किसी और पर नहीं। और फिर वही आदमी कहता है कि यहोवा "मेरा मुकद्दमा" लड़ेगा। सोचो, जिसके सामने तू दोषी है, वही तेरा वकील बनकर खड़ा होता है। अंधेरे में बैठा है तू? वह तुझे उजियाले में निकाल लाएगा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

मीका कहता है, "उनमें से जो सबसे उत्तम है, वह कँटीली झाड़ी के समान है।" सोचो, काँटों की बाड़ दूर से बचाव जैसी दिखती है, पर जो उस पर टेक लगाता है वह लहूलुहान होकर लौटता है। कभी तुमने भी किसी भरोसेमंद इंसान पर पूरा वज़न डाला और घायल हुए हो? यही दर्द मीका को आगे कहने पर मजबूर करता है कि वह यहोवा की ओर ताकता रहेगा। लोगों से प्रेम करो, पर टेक उसी पर लगाओ जिसमें काँटे नहीं।

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