हबक्कूक 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
हबक्कूक एक भविष्यद्वक्ता थे जिन्होंने परमेश्वर से बड़े कठिन सवाल पूछे थे। अब वे एक पहरेदार की तरह मीनार पर चढ़कर खड़े हो जाते हैं। वे कहते हैं, "मैं ताकता रहूँगा कि परमेश्वर मुझसे क्या कहेंगे।" यह कितना दिलचस्प है, है ना? वे बहस करके नहीं भागते, वे रुककर सुनने की तैयारी करते हैं।
परमेश्वर उत्तर देते हैं। वे कहते हैं, "जो मैं तुम्हें दिखाऊँगा उसे पटियाओं पर इतना साफ लिख दो कि दौड़ते हुए व्यक्ति भी उसे पढ़ सके।" यह बात इतनी जरूरी है कि हर किसी तक जल्दी पहुँचनी चाहिए। और वह बात क्या है? "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा।" यानी जो परमेश्वर पर भरोसा रखकर जीता है, वही सच में जीवित रहता है, भले ही अभी हालात कठिन दिखें।
इसके बाद परमेश्वर उस अन्यायी और अहंकारी व्यक्ति के बारे में बताते हैं जो दूसरों को लूटता और सताता है। पाँच बार "हाय" शब्द आता है, यह एक चेतावनी है, एक गहरी उदासी भरी पुकार। हाय उस पर जो दूसरों का धन छीनता है। हाय उस पर जो हत्या और अन्याय से अपना घर बनाता है। हाय उस पर जो अपने पड़ोसी को धोखे से नशा पिलाकर उसे शर्मिंदा करता है। हाय उस पर जो लकड़ी और पत्थर की मूरतें बनाकर उनसे आशा रखता है, जबकि उनमें कोई जीवन ही नहीं है।
अध्याय के अंत में एक शांत, गंभीर वाक्य आता है, "परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में हैं, समस्त पृथ्वी उनके सामने शान्त रहे।" जैसे तूफान के बाद अचानक सन्नाटा छा जाता है।
इसका क्या मतलब है?
हबक्कूक को शिकायत थी कि दुष्ट लोग सफल हो रहे हैं और परमेश्वर चुप हैं। यहाँ परमेश्वर बताते हैं कि वे चुप नहीं हैं, वे देख रहे हैं। अन्याय हमेशा के लिए नहीं टिकता। जो व्यक्ति दूसरों को लूटता है, एक दिन खुद लूटा जाएगा। जो पत्थर की दीवारें अन्याय से बनाता है, वे दीवारें ही उसके विरुद्ध गवाही देंगी।
लेकिन सबसे गहरी बात वह वाक्य है, "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा।" इसका मतलब यह नहीं कि विश्वास रखने से तुरंत सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसका मतलब है कि जब तक परमेश्वर का समय नहीं आता, तब तक भरोसा रखकर जीना ही असली जीवन है। कठिन बात यह है कि परमेश्वर ने यह नहीं बताया कि इंतज़ार कितने दिन का होगा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "देर न होगी", लेकिन हबक्कूक को अभी भी रुकना पड़ा। कभी-कभी विश्वास का मतलब यही होता है, बिना पूरा उत्तर पाए भरोसा करते रहना।
समान सूत्र
यह वाक्य, "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा", बाइबल की सबसे महत्वपूर्ण आयतों में से एक बन गया। बाद में प्रेरित पौलुस ने इसी सत्य को समझाया कि कोई भी व्यक्ति अपने अच्छे कामों से परमेश्वर के सामने धर्मी नहीं ठहर सकता, बल्कि केवल यीशु मसीह पर भरोसा करने से। यीशु स्वयं वह हैं जिन्होंने अन्याय सहा, फिर भी अंत तक परमेश्वर पर भरोसा रखा। सूली पर लटकते हुए भी वे परमेश्वर के हाथों में अपने आप को सौंपते रहे। इसलिए जब हम पढ़ते हैं कि दुष्टों का अंत निश्चित है, और धर्मी विश्वास से जीता है, तो यह कहानी अंततः यीशु तक पहुँचती है, जो हमारे लिए धर्मी ठहरे और हमें बुलाते हैं कि हम भी भरोसा करना सीखें।
तुम्हारे लिए
शायद तुमने भी कभी देखा हो कि कोई बेईमानी करके आगे निकल जाता है, या कोई तुम्हारे साथ अन्याय करे और कुछ न हो। ऐसे समय पर हबक्कूक जैसा पहरेदार बनना सीखो, शिकायत करने की बजाय परमेश्वर से पूछो और फिर सुनने के लिए रुको। और याद रखो, भरोसा रखना कोई कमजोरी नहीं है, यह असली ताकत है, भले ही उत्तर तुरंत न मिले।
बातचीत करें
तुम्हें क्या लगता है, इंतज़ार करना कठिन क्यों होता है जब हम जानते हैं कि परमेश्वर सही काम करेंगे?
क्या तुमने कभी किसी अन्याय को देखा और सोचा कि परमेश्वर कहाँ हैं? उस समय तुमने क्या किया?
साथ में प्रार्थना करें
हे प्रभु, कभी-कभी हमें लगता है कि आप देर कर रहे हैं। हमें सिखाइए कि हम शिकायत करने की बजाय आपकी ओर देखें और भरोसा रखें। हमें विश्वास से जीना सिखाइए, चाहे उत्तर अभी न मिले। आपका नाम पवित्र है, हम आपके सामने शांत होकर रुकना चाहते हैं। आमीन।
हबक्कूक 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
हबक्कूक 2 किस विषय में है?
हबक्कूक 2 क्या कहता है?
हबक्कूक 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे हबक्कूक 2 से क्या सीख सकते हैं?
हबक्कूक 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हबक्कूक चिल्ला रहा था, "कब तक?" और परमेश्वर ने तुरंत बाबेल को नहीं हटाया। उसने बस इतना कहा, "देख, उसका मन फूला हुआ है, उसमें सिधाई नहीं है; परन्तु धर्मी अपने विश्वास से जीवित रहेगा।"
ध्यान दे, विश्वास यहाँ कोई भावना नहीं, ठहरने की ताकत है। जब उत्तर देर से आता है, तब तेरा जीना ही तेरा विश्वास बन जाता है। आज तू किस अनुत्तरित प्रार्थना के बीच खड़ा रहना सीख रहा है?
उस पर हाय, जो हत्या करके नगर को बनाता, और कुटिलता करके गढ़ को दृढ़ करता है!" बाबेल की दीवारें ऊँची थीं, पर उनकी नींव में दूसरों का खून था। परमेश्वर इमारत नहीं, नींव देखता है। अपने बनाए हुए को एक बार फिर देखो, तुम्हारी तरक्की में किसी के आँसू तो नहीं मिले? जो दूसरों को गिराकर खड़ा किया जाता है, वह टिकता नहीं।
बाबेल अपने भव्य नगर पर इतरा रहा था, और परमेश्वर ने कहा, "क्या सेनाओं के यहोवा की ओर से यह नहीं होता कि देश देश के लोग परिश्रम करके अग्नि का ईंधन ही हो जाते हैं, और राज्य राज्य के लोग व्यर्थ ही थक जाते हैं?" जो दूसरों के आँसुओं पर खड़ा किया जाता है, वह आग का ईंधन बनता है। अपनी मेहनत को एक बार जाँच लो, तुम किसकी नींव पर चिन रहे हो?
हाय उस पर, जो अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाता है, और उसमें विष मिलाकर उसे मतवाला कर देता है कि उसको नंगा देखे!" बाबेल का पाप सिर्फ लूटना नहीं था, दूसरों को गिराकर उनकी शर्म का तमाशा देखना था। आज भी यही होता है, बस प्याले का रूप बदल गया है। किसी की कमज़ोरी जानकर तुम उसे ढाँपते हो या औरों को दिखाते हो? परमेश्वर वहाँ खड़ा है, जहाँ कोई नंगा किया जा रहा है।
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