7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

नहेम्याह 11

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

नहेम्याह 11 की कहानी

The Explanation

यरूशलेम की दीवार बन चुकी थी। पत्थर पर पत्थर रखकर, मेहनत से, लोगों ने शहर की शहरपनाह फिर से खड़ी कर दी थी। पर अब एक नई समस्या खड़ी हुई। यरूशलेम शहर खाली था। दीवारें तो मजबूत थीं, पर घर सूने पड़े थे। किसी शहर में अगर लोग न रहें तो वह शहर कैसा लगेगा? सुनसान, चुप, उदास।

इसलिए लोगों ने चिट्ठी डाली, यानी पर्ची निकालकर फैसला किया। दस परिवारों में से एक परिवार यरूशलेम में बसेगा। बाकी नौ अपने ही नगरों में रहेंगे। सोचो, अगर तुम्हारा नाम पर्ची में निकल आए तो क्या होगा? तुम्हें अपना पुराना घर छोड़कर एक नए, अनजान शहर में जाना होगा, वहाँ जहाँ पहले किसी ने तुम्हारी आहट भी नहीं सुनी।

पर कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें पर्ची की जरूरत ही नहीं पड़ी। वे अपनी खुशी से यरूशलेम में रहने को तैयार हो गए। उन्होंने सोचा, यह पवित्र नगर है, परमेश्वर का नगर है, हम यहीं रहेंगे। बाकी लोगों ने उन्हें आशीर्वाद दिया, यानी उनके लिए भलाई माँगी, उनकी सराहना की।

फिर एक के बाद एक नाम आते हैं, याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये। ये वे लोग थे जो परमेश्वर के भवन में सेवा करते थे। कोई बलिदान चढ़ाता, कोई गीत गाता, कोई फाटक पर पहरा देता। हर एक का काम छोटा लगे पर जरूरी था। और अंत में उन सारे गाँवों और खेतों के नाम आते हैं जहाँ बाकी लोग बस गए, किर्यतअर्बा से लेकर बेर्शेबा तक, गेबा से लेकर ओनो तक। मानो परमेश्वर कह रहे हों, हर एक जगह मुझे याद है, हर एक नाम मुझे पता है।

What Does This Mean?

यह कहानी बहादुरी की कहानी है, पर तलवार वाली नहीं। यह घर छोड़ने की बहादुरी है। जो लोग यरूशलेम में बसे, उन्होंने आराम छोड़ा। वे जानते थे कि नए शहर में शुरुआत करनी कठिन होगी। पर उन्होंने सोचा कि परमेश्वर का शहर आबाद रहना चाहिए, वहाँ रौनक होनी चाहिए, वहाँ उपासना होनी चाहिए।

परमेश्वर को खाली दीवारें पसंद नहीं, उन्हें लोग पसंद हैं। वे चाहते हैं कि उनका घर भरा रहे, उनकी आराधना गूँजती रहे।

The Common Thread

बहुत बाद में, यीशु मसीह आए। उन्होंने भी कहा कि वे अपने पिता के घर को प्रिय मानते हैं। और परमेश्वर का असली घर अब दीवारों में नहीं, लोगों के हृदय में है। जैसे यरूशलेम को बसाने के लिए लोगों ने अपना घर छोड़ा, वैसे ही यीशु मसीह ने स्वर्ग का अपना घर छोड़ दिया, ताकि वे हमारे बीच आकर रहें। वे खुद आनंद से आए, जैसे वे लोग खुद खुशी से यरूशलेम में बसे थे।

For You

क्या तुमने कभी किसी नए काम के लिए अपनी बारी दी है, भले वह कठिन लगा हो? शायद बड़ों की मदद करना, या किसी नए दोस्त का स्वागत करना, जब तुम्हारा मन उसके लिए नहीं था। परमेश्वर उन छोटे फैसलों को देखते हैं। तुम भी आज किसी के लिए अपनी जगह बना सकते हो, अपनी बारी दे सकते हो, ताकि परमेश्वर का घर भरा रहे।

Talk About It

अगर तुम्हारा नाम पर्ची में निकलता और तुम्हें नया घर बसाना पड़ता, तो तुम्हें सबसे ज्यादा किस बात का डर लगता?

तुम कौन सी एक चीज़ परमेश्वर के लिए खुशी से छोड़ सकते हो, बिना पर्ची के?

Praying Together

प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप हमारे लिए अपना घर छोड़कर आए। हमें भी साहस दीजिए कि हम आपके लिए अपनी जगह बना सकें। आमीन।

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नहेम्याह 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नहेम्याह 11 किस विषय में है?
यरूशलेम की दीवार बन चुकी थी। पत्थर पर पत्थर रखकर, मेहनत से, लोगों ने शहर की शहरपनाह फिर से खड़ी कर दी थी। पर अब एक नई समस्या खड़ी हुई। यरूशलेम शहर खाली था। दीवारें तो मजबूत थीं, पर घर सूने पड़े थे। किसी शहर में अगर लोग न रहें तो वह शहर कैसा लगेगा? सुनसान, चुप, उदास।
नहेम्याह 11 क्या कहता है?
पर कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें पर्ची की जरूरत ही नहीं पड़ी। वे अपनी खुशी से यरूशलेम में रहने को तैयार हो गए। उन्होंने सोचा, यह पवित्र नगर है, परमेश्वर का नगर है, हम यहीं रहेंगे। बाकी लोगों ने उन्हें आशीर्वाद दिया, यानी उनके लिए भलाई माँगी, उनकी सराहना की।
नहेम्याह 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह कहानी बहादुरी की कहानी है, पर तलवार वाली नहीं। यह घर छोड़ने की बहादुरी है। जो लोग यरूशलेम में बसे, उन्होंने आराम छोड़ा। वे जानते थे कि नए शहर में शुरुआत करनी कठिन होगी। पर उन्होंने सोचा कि परमेश्वर का शहर आबाद रहना चाहिए, वहाँ रौनक होनी चाहिए, वहाँ उपासना होनी चाहिए।
बच्चे नहेम्याह 11 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत बाद में, यीशु मसीह आए। उन्होंने भी कहा कि वे अपने पिता के घर को प्रिय मानते हैं। और परमेश्वर का असली घर अब दीवारों में नहीं, लोगों के हृदय में है। जैसे यरूशलेम को बसाने के लिए लोगों ने अपना घर छोड़ा, वैसे ही यीशु मसीह ने स्वर्ग का अपना घर छोड़ दिया, ताकि वे हमारे बीच आकर रहें। वे खुद आनंद से आए, जैसे वे लोग खुद खुशी से यरूशलेम में बसे थे।
नहेम्याह 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम्हारा नाम पर्ची में निकलता और तुम्हें नया घर बसाना पड़ता, तो तुम्हें सबसे ज्यादा किस बात का डर लगता?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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