7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

नहेम्याह 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

नहेम्याह और यहूदी लोग यरूशलेम की शहरपनाह (शहर की सुरक्षा दीवार) बना रहे थे। यह दीवार बहुत समय से टूटी हुई पड़ी थी, और अब लोग मिलकर उसे फिर से बना रहे थे। पर यह काम सबको पसंद नहीं आया। सम्बल्लत नाम का एक आदमी सुनकर बहुत चिढ़ गया। उसने यहूदियों का मज़ाक बनाया। उसने कहा, ये कमज़ोर लोग क्या करेंगे? क्या ये जली हुई, टूटी-फूटी पत्थरों से कुछ बना पाएँगे? तोबियाह नाम के उसके साथी ने तो यह भी कहा कि अगर कोई गीदड़ भी इस दीवार पर चढ़े, तो वह टूट जाएगी। यह सुनकर आसानी से डर या शर्म लग सकती थी।

पर नहेम्याह ने क्या किया? उसने परमेश्वर से प्रार्थना की। उसने अपना दुःख और गुस्सा सीधे परमेश्वर के सामने रख दिया, बिना कुछ छिपाए। फिर काम आगे बढ़ता रहा, और दीवार आधी ऊँचाई तक बन गई।

जब दुश्मनों ने देखा कि काम रुक नहीं रहा, तो उनकी चिढ़ और बढ़ गई। उन्होंने मिलकर योजना बनाई कि यरूशलेम पर हमला करके काम बंद करवा दें। यहूदी लोग थकने भी लगे थे। वे कहने लगे, हमारी ताकत घट गई है, मिट्टी का ढेर इतना है कि हम दीवार नहीं बना सकते। डर और थकान, दोनों एक साथ आए।

नहेम्याह ने इसका सामना दो तरह से किया। पहला, उसने लोगों को हथियारों के साथ पहरे पर खड़ा कर दिया। दूसरा, उसने लोगों को याद दिलाया, डरो मत, प्रभु को याद करो जो महान और भययोग्य हैं, अपने भाई-बहनों और घरों के लिए लड़ो। इसके बाद लोग फिर काम पर लौट गए, एक हाथ से काम करते और दूसरे हाथ से हथियार पकड़े रहते। राजमिस्त्री भी तलवार बाँधकर दीवार बना रहे थे। और जब भी खतरा नज़दीक आता, नरसिंगा बजाया जाता, जिससे सब लोग एक जगह इकट्ठे हो जाते।

इसका मतलब क्या है?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का काम करना आसान नहीं होता। जब भी कुछ अच्छा बनाया जा रहा होता है, कोई न कोई उसका मज़ाक बनाता है या उसे रोकने की कोशिश करता है। यहूदी लोग न तो बहुत ताकतवर थे, न ही उनके पास बड़े हथियार थे। पर उनके पास एक चीज़ थी, परमेश्वर पर भरोसा और एक-दूसरे का साथ।

ध्यान देने वाली बात यह है कि नहेम्याह ने दुश्मनों को नज़रअंदाज़ नहीं किया और न ही सिर्फ प्रार्थना करके बैठ गया। उसने प्रार्थना भी की और पहरेदार भी खड़े किए। विश्वास का मतलब यह नहीं है कि हम कुछ न करें। विश्वास का मतलब है कि हम काम भी करें और परमेश्वर पर भरोसा भी रखें, दोनों साथ साथ।

यह भी सच है कि नहेम्याह की प्रार्थना में उसने परमेश्वर से कहा कि दुश्मनों का अपमान उन्हीं पर लौटे। यह एक कठिन प्रार्थना है। बाइबल इसे वैसे ही लिखती है, बिना छिपाए। हमें यहाँ रुककर सोचना चाहिए, क्या हम भी कभी ऐसी ही कठोर प्रार्थना करना चाहते हैं जब कोई हमें चोट पहुँचाए?

बड़ी कहानी से संबंध

पूरी बाइबल में परमेश्वर के लोग बार बार ऐसी स्थिति में पाए जाते हैं जहाँ दुनिया उनका मज़ाक बनाती है या उन्हें रोकने की कोशिश करती है। बहुत बाद में, जब यीशु मसीह सूली पर चढ़ाए गए, तब भी लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया और सोचा कि उनकी बात खत्म हो गई। पर परमेश्वर ने उन्हें फिर जिला दिया। नहेम्याह के समय परमेश्वर ने दुश्मनों की योजना को निष्फल कर दिया, वैसे ही परमेश्वर आज भी अपने लोगों के साथ रहते हैं, तब भी जब सब कुछ मुश्किल और डरावना लगता है।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ हो कि तुमने कुछ अच्छा करना चाहा, और किसी ने उसका मज़ाक बनाया। शायद स्कूल में, या दोस्तों के बीच। उस समय याद रखना कि नहेम्याह ने क्या किया, उसने न तो काम छोड़ा, न ही गुस्से में बदला लेने निकला। उसने परमेश्वर से बात की और फिर आगे बढ़ा। तुम भी जब डर लगे, परमेश्वर को बता सकते हो, और फिर जो सही है वह करते रहो।

बात करें

अगर कोई तुम्हारा मज़ाक बनाए जब तुम कुछ अच्छा कर रहे हो, तो तुम क्या करोगे?

नहेम्याह ने काम भी किया और प्रार्थना भी की। तुम्हारे जीवन में किस मुश्किल काम में तुम्हें ये दोनों चीज़ें साथ करने की ज़रूरत है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, जब कोई हमारा मज़ाक बनाए या हमें डराए, तो हमें याद दिलाइए कि आप महान और भययोग्य हैं। हमें हिम्मत दीजिए कि हम काम करते रहें और आप पर भरोसा रखें। आमीन।

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नहेम्याह 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नहेम्याह 4 किस विषय में है?
नहेम्याह और यहूदी लोग यरूशलेम की शहरपनाह (शहर की सुरक्षा दीवार) बना रहे थे। यह दीवार बहुत समय से टूटी हुई पड़ी थी, और अब लोग मिलकर उसे फिर से बना रहे थे। पर यह काम सबको पसंद नहीं आया। सम्बल्लत नाम का एक आदमी सुनकर बहुत चिढ़ गया। उसने यहूदियों का मज़ाक बनाया। उसने कहा, ये कमज़ोर लोग क्या करेंगे?
नहेम्याह 4 क्या कहता है?
जब दुश्मनों ने देखा कि काम रुक नहीं रहा, तो उनकी चिढ़ और बढ़ गई। उन्होंने मिलकर योजना बनाई कि यरूशलेम पर हमला करके काम बंद करवा दें। यहूदी लोग थकने भी लगे थे। वे कहने लगे, हमारी ताकत घट गई है, मिट्टी का ढेर इतना है कि हम दीवार नहीं बना सकते। डर और थकान, दोनों एक साथ आए।
नहेम्याह 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का काम करना आसान नहीं होता। जब भी कुछ अच्छा बनाया जा रहा होता है, कोई न कोई उसका मज़ाक बनाता है या उसे रोकने की कोशिश करता है। यहूदी लोग न तो बहुत ताकतवर थे, न ही उनके पास बड़े हथियार थे। पर उनके पास एक चीज़ थी, परमेश्वर पर भरोसा और एक-दूसरे का साथ।
बच्चे नहेम्याह 4 से क्या सीख सकते हैं?
यह भी सच है कि नहेम्याह की प्रार्थना में उसने परमेश्वर से कहा कि दुश्मनों का अपमान उन्हीं पर लौटे। यह एक कठिन प्रार्थना है। बाइबल इसे वैसे ही लिखती है, बिना छिपाए। हमें यहाँ रुककर सोचना चाहिए, क्या हम भी कभी ऐसी ही कठोर प्रार्थना करना चाहते हैं जब कोई हमें चोट पहुँचाए?
नहेम्याह 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
शायद तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ हो कि तुमने कुछ अच्छा करना चाहा, और किसी ने उसका मज़ाक बनाया। शायद स्कूल में, या दोस्तों के बीच। उस समय याद रखना कि नहेम्याह ने क्या किया, उसने न तो काम छोड़ा, न ही गुस्से में बदला लेने निकला। उसने परमेश्वर से बात की और फिर आगे बढ़ा। तुम भी जब डर लगे, परमेश्वर को बता सकते हो, और फिर जो सही है वह करते रहो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

शत्रु की साज़िश टूट गई, और उसके बाद क्या हुआ? कोई जश्न नहीं, कोई युद्ध नहीं। "तब हम सब के सब शहरपनाह के पास लौटकर अपना-अपना काम करने लगे।" परमेश्वर ने बचाया, और वे फिर से ईंट उठाने लगे। कभी-कभी विश्वास की सबसे बड़ी जीत यही होती है कि डर के बाद तुम चुपचाप अपने अधूरे काम पर लौट आते हो।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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