7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

नहेम्याह 8

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

एक दिन सारे इस्राएली लोग यरूशलेम के जलफाटक के पास इकट्ठे हुए। सब एक साथ, जैसे कोई बड़ा मेला हो। उन्होंने एज्रा नाम के एक शास्त्री से कहा, "वह किताब ले आओ! मूसा की व्यवस्था की किताब, जो यहोवा ने हमें दी थी।"

एज्रा किताब ले आया। वह एक लकड़ी के ऊँचे मंच पर खड़ा हुआ, ताकि सब उसे देख सकें। उसके दाहिने और बाएँ कई आदमी खड़े थे, मानो पहरेदार हों।

जब एज्रा ने किताब खोली, तो कुछ हुआ जो किसी ने नहीं सोचा था। सब लोग अपनी जगह से उठ खड़े हुए। बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष, सब। फिर एज्रा ने परमेश्वर की स्तुति की, और लोगों ने अपने हाथ ऊपर उठाकर कहा, "आमीन! आमीन!" उन्होंने अपना सिर झुकाया और भूमि पर माथा टेक दिया।

फिर एज्रा और कुछ लेवीय सुबह से दोपहर तक पढ़ते रहे। वे सिर्फ पढ़ते नहीं थे, वे समझाते भी थे, ताकि हर कोई समझ सके कि शब्दों का मतलब क्या है।

और जब लोगों ने व्यवस्था के शब्द सुने, तो वे रोने लगे। शायद उन्हें याद आया कि वे कितनी बार परमेश्वर से दूर भटक गए थे।

लेकिन नहेम्याह और एज्रा ने कहा, "रोओ मत! आज का दिन यहोवा के लिये पवित्र है। जाओ, अच्छा खाना खाओ, मीठा रस पियो, और जिनके पास कुछ नहीं है, उन्हें भी भेजो। उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारी ताकत है।"

तो लोग रोना छोड़कर खाने-पीने और बाँटने चले गए। बड़ा आनन्द हुआ उस दिन।

अगले दिन लोग फिर इकट्ठे हुए, और सुना कि व्यवस्था में झोपड़ियों के पर्व के बारे में लिखा है। तुरन्त सब पहाड़ पर गए, जैतून और खजूर की डालियाँ लाए, और अपनी छतों पर, आँगनों में झोपड़ियाँ बनाईं। सात दिन तक वे इन झोपड़ियों में रहे, और रोज एज्रा किताब पढ़ता रहा। ऐसा आनन्द बहुत समय से नहीं हुआ था।

What Does This Mean?

यह सिर्फ एक किताब पढ़ने की कहानी नहीं है। यह दिखाता है कि परमेश्वर का वचन कितना शक्तिशाली है। जब लोगों ने सुना, तो उनके दिल हिल गए, वे रो पड़े। परमेश्वर का वचन हमें दिखाता है कि हम कहाँ गलत हैं।

लेकिन परमेश्वर चाहते हैं कि हम वहीं न रुकें। वे चाहते हैं कि हम आनन्द मनाएँ, क्योंकि वे हमें प्यार करते हैं और माफ करते हैं। इसलिए नहेम्याह ने कहा, "रोओ मत, आनन्द मनाओ।" यहोवा का आनन्द हमारी ताकत है।

The Common Thread

परमेश्वर का वचन हमेशा लोगों को इकट्ठा करता है और बताता है कि वे कौन हैं। बहुत बाद में, यीशु मसीह खुद परमेश्वर का वचन बनकर इस दुनिया में आए। जैसे एज्रा ने किताब खोलकर लोगों को दिखाई, वैसे ही यीशु ने अपने जीवन से परमेश्वर को दिखाया। और जैसे उस दिन लोग रोए पर फिर आनन्द मनाया, वैसे ही यीशु के पास आने वाला हर व्यक्ति पहले अपनी गलती देखता है, फिर बड़ा आनन्द पाता है क्योंकि यीशु ने उसे माफ कर दिया है।

For You

तुम भी परमेश्वर का वचन सुन सकते हो, जैसे वे लोग सुनते थे। जब कोई तुम्हें बाइबल की कहानी सुनाए, ध्यान से सुनो, जैसे वे लोग भोर से दोपहर तक सुनते रहे। और जब तुम समझो कि परमेश्वर तुमसे प्यार करते हैं, तो उदास मत रहो, आनन्द मनाओ। अपने दोस्त के साथ खाना बाँटो, जैसे उन लोगों ने बाँटा जिनके पास कुछ नहीं था।

Talk About It

अगर तुम वहाँ खड़े होते जब एज्रा ने किताब खोली, तो तुम्हें कैसा लगता?

तुम किसी के साथ अपना खाना या अपनी खुशी कैसे बाँट सकते हो?

Praying Together

हे प्रभु, आपका वचन हमें दिखाता है कि आप कौन हैं। हमें सुनने के लिए कान दीजिए, और समझने के लिए दिल दीजिए। जब हम गलत करें, हमें माफ कीजिए, और हमें फिर आनन्द से भर दीजिए। आमीन।

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नहेम्याह 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नहेम्याह 8 किस विषय में है?
एक दिन सारे इस्राएली लोग यरूशलेम के जलफाटक के पास इकट्ठे हुए। सब एक साथ, जैसे कोई बड़ा मेला हो। उन्होंने एज्रा नाम के एक शास्त्री से कहा, "वह किताब ले आओ! मूसा की व्यवस्था की किताब, जो यहोवा ने हमें दी थी।"
नहेम्याह 8 क्या कहता है?
फिर एज्रा और कुछ लेवीय सुबह से दोपहर तक पढ़ते रहे। वे सिर्फ पढ़ते नहीं थे, वे समझाते भी थे, ताकि हर कोई समझ सके कि शब्दों का मतलब क्या है।
नहेम्याह 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
तो लोग रोना छोड़कर खाने-पीने और बाँटने चले गए। बड़ा आनन्द हुआ उस दिन।
बच्चे नहेम्याह 8 से क्या सीख सकते हैं?
लेकिन परमेश्वर चाहते हैं कि हम वहीं न रुकें। वे चाहते हैं कि हम आनन्द मनाएँ, क्योंकि वे हमें प्यार करते हैं और माफ करते हैं। इसलिए नहेम्याह ने कहा, "रोओ मत, आनन्द मनाओ।" यहोवा का आनन्द हमारी ताकत है।
नहेम्याह 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम वहाँ खड़े होते जब एज्रा ने किताब खोली, तो तुम्हें कैसा लगता?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

और उसमें यह लिखा हुआ मिला" कि सातवें महीने में झोपड़ियों में रहना है। सदियों से यह आज्ञा पन्नों में पड़ी थी, पर किसी ने उसे जिया नहीं। जब तक किताब बंद रही, आशीष भी बंद रही।

सोचो, तुम्हारी बाइबल में भी कोई ऐसा वचन हो सकता है जो तुमने पढ़ा तो है, पर कभी माना नहीं। आज उसे खोलो। जो लिखा मिलता है, वही जीने को मिलता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

अभी अभी शहरपनाह बनकर खड़ी हुई थी, और लोग पक्के घर छोड़कर टहनियों की कच्ची झोपड़ियों में जा बसे। यहोशू के दिनों से ऐसा नहीं हुआ था, और लिखा है, "और बहुत बड़ा आनन्द हुआ।" आनन्द दीवारों से नहीं आया, उस याद से आया कि जब उनके पास कुछ न था तब भी परमेश्वर ने सम्भाला। तेरी सुरक्षा किसमें टिकी है, अपनी बनाई दीवारों में या उसमें जो जंगल में भी साथ था?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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