एज्रा 7
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
एज्रा एक याजक था, और उसका परिवार बहुत पुराना था, वह सीधा हारून महायाजक से जुड़ा हुआ था। यह बताना ज़रूरी था, क्योंकि इससे पता चलता है कि एज्रा को परमेश्वर के भवन और व्यवस्था की सेवा विरासत में मिली थी। परन्तु एज्रा सिर्फ नाम का याजक नहीं था। पद 6 कहता है कि वह मूसा की व्यवस्था में निपुण शास्त्री था, यानी वह परमेश्वर का वचन बहुत अच्छी तरह जानता और समझता था।
फारस के राजा अर्तक्षत्र के दिनों में एज्रा ने बाबेल छोड़कर यरूशलेम जाने का फैसला किया। उसके साथ कुछ इस्राएली, याजक, लेवीय, गवैये, द्वारपाल और मन्दिर के सेवक भी गए। राजा ने एज्रा को एक चिट्ठी दी, जिसमें लिखा था कि जो भी इस्राएली जाना चाहे, वह जा सकता है। राजा ने यह भी आज्ञा दी कि एज्रा यरूशलेम में जाकर परमेश्वर के भवन के लिये चाँदी-सोना ले जाए, बलिदान के लिये बैल, मेढ़े और मेम्ने खरीदे, और जो कुछ बचे, उसे अपने भाइयों के साथ परमेश्वर की इच्छा के अनुसार इस्तेमाल करे। राजा ने खजांचियों को भी आज्ञा दी कि एज्रा जो कुछ माँगे, वह जल्दी से दिया जाए, और याजकों व मन्दिर के सेवकों से कोई कर न लिया जाए।
राजा ने एज्रा को यह ज़िम्मेदारी भी दी कि वह न्यायी और विचार करनेवाले नियुक्त करे, जो परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार लोगों का न्याय करें, और जो नहीं जानते उन्हें सिखाएँ। अध्याय के अंत में एज्रा खुद बोलता है और परमेश्वर की स्तुति करता है, क्योंकि उसी ने राजा के मन में यह इच्छा डाली थी।
What Does This Mean?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर एक विदेशी राजा के दिल में भी काम कर सकते हैं। अर्तक्षत्र इस्राएल का परमेश्वर नहीं मानता था, फिर भी उसने वह सब कुछ करने की आज्ञा दी जो एज्रा को चाहिए था। एज्रा खुद इसे संयोग नहीं मानता, वह कहता है, "धन्य है हमारे पितरों का परमेश्वर यहोवा, जिसने ऐसी मनसा राजा के मन में उत्पन्न की है" (पद 27)।
पद 10 इस पूरे अध्याय की कुंजी है। एज्रा ने अपना मन तीन चीज़ों के लिये लगाया था, पहला यहोवा की व्यवस्था का अर्थ जान लेना, दूसरा उसके अनुसार खुद चलना, और तीसरा दूसरों को सिखाना। ध्यान दो, समझना पहले आया, फिर करना, फिर सिखाना। एज्रा सिर्फ जानकार बनना नहीं चाहता था, वह जो जानता था उसे जीना भी चाहता था।
The Common Thread
एज्रा हारून महायाजक का वंशज था। हारून का काम था लोगों को परमेश्वर के करीब लाना, बलिदान चढ़ाना, वचन सिखाना। एज्रा यह काम आगे बढ़ाता है। परन्तु बाइबल की बड़ी कहानी एक और महायाजक की ओर इशारा करती है, जो पूरी तरह से परमेश्वर की व्यवस्था को समझता था, उसके अनुसार चला, और लोगों को सिखाया, वह हैं यीशु मसीह। जहाँ एज्रा को व्यवस्था जानने और उसके अनुसार जीने के लिये मेहनत करनी पड़ी, वहाँ यीशु मसीह स्वयं परमेश्वर का वचन हैं। एज्रा की कहानी हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर अपनी प्रजा को कभी नहीं भूलते, चाहे वे बाबेल में बंधुआई में हों या यरूशलेम लौट रहे हों, परमेश्वर हर हाल में अपना काम आगे बढ़ाते रहते हैं।
For You
क्या तुम कभी सोचते हो कि बाइबल पढ़ना सिर्फ एक काम है जो करना पड़ता है? एज्रा के लिये यह अलग था। उसने अपना मन लगाया, यानी उसने चाहा कि वह समझे। शायद तुम्हारे लिये भी यह सीखने लायक बात है, पहले समझने की कोशिश करना, फिर उसके अनुसार जीने की, और फिर औरों को बताने की। यह क्रम बदला नहीं जा सकता। जो खुद नहीं जीता, वह ठीक से नहीं सिखा सकता।
Talk About It
राजा अर्तक्षत्र इस्राएल के परमेश्वर को नहीं जानता था, फिर भी उसने एज्रा की मदद की। तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर आज भी ऐसे लोगों के मन में काम करते हैं जो उन्हें नहीं जानते?
एज्रा ने पहले समझा, फिर जिया, फिर सिखाया। तुम अभी किस कदम पर हो, समझने के, जीने के, या सिखाने के?
Praying Together
हे परमेश्वर, आप एज्रा के साथ थे जब वह घर से दूर था, और आपने राजा का दिल भी बदल दिया। हमें भी ऐसा मन दीजिए जो आपके वचन को समझना चाहे, और फिर उसके अनुसार जीना चाहे। हमारी मदद कीजिए कि हम जो सीखें, वह दूसरों तक भी पहुँचाएँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
एज्रा 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एज्रा 7 किस विषय में है?
एज्रा 7 क्या कहता है?
एज्रा 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे एज्रा 7 से क्या सीख सकते हैं?
एज्रा 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
गवैये, द्वारपाल, मन्दिर के सेवक। ये नाम याजकों के साथ ही गिने गए, "राजा अर्तक्षत्र के सातवें वर्ष में... यरूशलेम को गए।" जो दरवाज़े पर खड़ा रहता था, उसका सफ़र भी उतना ही दर्ज हुआ जितना अगुवे का। तू सोचता है तेरी सेवा छोटी है, किसी को दिखती नहीं। परमेश्वर की सूची में वह छूटी नहीं।
अर्तक्षत्र कोई भक्त नहीं था, फिर भी उसने लिखवाया: "जो-जो आज्ञा स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से मिले, वह स्वर्ग के परमेश्वर के भवन के लिये ठीक-ठीक पूरी की जाए।" एक परदेशी राजा परमेश्वर के काम में लापरवाही सहन नहीं करता था। और तू? जो तेरे हाथ में परमेश्वर का काम है, उसे तू आधा-अधूरा छोड़ देता है या ठीक-ठीक पूरा करता है?
एक अन्यजाति राजा एज्रा के हाथ में बची हुई चाँदी सोना सौंपकर कहता है, "जो कुछ तुझको... उचित जान पड़े, वही अपने परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करना।" कितना बड़ा भरोसा! पर यह भरोसा अचानक नहीं आया। एज्रा ने पहले अपना मन व्यवस्था खोजने में लगाया था, इसलिए उसकी पसंद परमेश्वर की इच्छा से टकराती नहीं थी। तुझे भी कभी आदेश नहीं, बस आज़ादी मिलती है। उस घड़ी तेरा मन किसकी इच्छा चुनता है?
एक विदेशी राजा का फरमान, और उसमें नाम लिखे हैं याजकों के, लेवियों के, गवैयों के, द्वारपालों के, नतीनों के: "इनमें से किसी पर कर, चुंगी, अथवा राहदारी लगाना उचित नहीं।" ध्यान दो, गवैये और द्वारपाल भी छूट गए। परमेश्वर की गिनती में छोटा सेवक भी छूटता नहीं। तू सोचता है तेरा काम किसी को दिखता नहीं? जिसने अर्तक्षत्र का मन फेरा, वह तेरा नाम भी जानता है।
किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?
हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें