7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

गिनती 14

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बारह जासूस कनान देश देखने गए थे। वे लौट आए हैं। दस जासूस डर से काँप रहे हैं। वे कहते हैं, "वहाँ के लोग बहुत बड़े हैं! हम वह देश कभी नहीं जीत सकते।" पूरी मण्डली रात भर रोती है। लोग चिल्लाकर कहते हैं, "अच्छा होता हम मिस्र में ही मर जाते!" वे मूसा और हारून पर बुड़बुड़ाने लगते हैं, और कहते हैं, "आओ, हम किसी और को अपना प्रधान बना लें, और मिस्र लौट चलें।"

पर दो जासूस अलग हैं। उनके नाम यहोशू और कालेब हैं। वे अपने वस्त्र फाड़ते हैं, क्योंकि वे बहुत दुखी हैं। वे चिल्लाकर कहते हैं, "वह देश बहुत अच्छा है! यदि परमेश्वर हम से प्रसन्न हों, तो वे हमें वहाँ ले जाएँगे। उन लोगों से मत डरो, परमेश्वर हमारे साथ हैं!"

पर लोग नहीं सुनते। वे चिल्लाते हैं, "इनको पथरवाह करो!" ठीक उस समय परमेश्वर का तेज तम्बू में चमक उठता है। परमेश्वर मूसा से कहते हैं, "ये लोग कब तक मुझ पर विश्वास न करेंगे?"

मूसा परमेश्वर के सामने गिर जाता है और विनती करता है। वह कहता है, "परमेश्वर, आप धीरजवन्त और करुणामय हैं। कृपया इन्हें क्षमा कर दें।" परमेश्वर कहते हैं, "मैं क्षमा करता हूँ।" पर फिर भी एक गंभीर बात होती है। परमेश्वर कहते हैं कि जिन लोगों ने दस बार उनकी परीक्षा ली, वे अब उस अच्छे देश को कभी नहीं देखेंगे। केवल यहोशू और कालेब वहाँ जाएँगे, क्योंकि उनमें और ही आत्मा थी, वे परमेश्वर पर भरोसा करते रहे।

लोग यह सुनकर बहुत रोते हैं। फिर सुबह वे कहते हैं, "हमने पाप किया है, अब हम तैयार हैं!" और वे पहाड़ पर चढ़ने लगते हैं। पर मूसा चेतावनी देता है, "परमेश्वर तुम्हारे साथ नहीं हैं, मत चढ़ो!" वे फिर भी ढिठाई से चढ़ जाते हैं। दुश्मन उन पर हमला करते हैं, और वे हार जाते हैं।

इसका अर्थ क्या है?

यह कहानी दिखाती है कि डर कितना शक्तिशाली हो सकता है। लोगों ने विशाल पहाड़ों जैसे दुश्मनों को देखा, और भूल गए कि परमेश्वर उनसे भी बड़े हैं। डर ने उन्हें शिकायत करने और परमेश्वर से मुँह मोड़ने पर मजबूर किया। पर यहोशू और कालेब ने वही देश देखा, वही दुश्मन देखे, पर उन्होंने परमेश्वर को भी देखा। क्या तुम कभी इतना डर गए हो कि भूल गए कि परमेश्वर तुम्हारे साथ हैं?

सम्बन्ध सूत्र

परमेश्वर ने कहा, "मेरी शपथ, सारी पृथ्वी मेरी महिमा से भर जाएगी।" यह एक वादा है जो आज भी सच हो रहा है। बाद में प्रभु यीशु मसीह आए, जो कभी नहीं डरे, जो हमेशा परमेश्वर पर भरोसा करते रहे। मूसा ने परमेश्वर से विनती की, "क्षमा कर दें," और परमेश्वर ने क्षमा किया। यीशु मसीह ने भी हमारे लिए विनती की, ताकि हमारे पाप क्षमा हो सकें।

तुम्हारे लिए

जब तुम्हें कोई चीज़ डरावनी लगे, स्कूल का पहला दिन, अंधेरा कमरा, या कोई कठिन काम, तब याद करो कि परमेश्वर तुम्हारे साथ हैं। यहोशू और कालेब की तरह बनो, जो दुश्मन को देखकर भी परमेश्वर को न भूले। आज किसी एक डर के बारे में परमेश्वर से बात करो, और उन पर भरोसा रखने का प्रयास करो।

बातचीत के लिए सवाल:

अगर तुम वहाँ होते, क्या तुम यहोशू और कालेब की तरह विश्वास करते, या डरे हुए लोगों की तरह रोते?

क्या कोई ऐसी बात है जिससे तुम अभी डरते हो, और जिसके बारे में तुम परमेश्वर से बात करना चाहते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमेशा हमारे साथ रहते हैं। जब हम डरें, हमें याद दिलाएँ कि आप हमसे बड़े हैं। हमें यहोशू और कालेब जैसा विश्वास दें, जो आप पर भरोसा रखते थे। आमीन।

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गिनती 14 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

गिनती 14 किस विषय में है?
बारह जासूस कनान देश देखने गए थे। वे लौट आए हैं। दस जासूस डर से काँप रहे हैं। वे कहते हैं, "वहाँ के लोग बहुत बड़े हैं! हम वह देश कभी नहीं जीत सकते।" पूरी मण्डली रात भर रोती है। लोग चिल्लाकर कहते हैं, "अच्छा होता हम मिस्र में ही मर जाते!" वे मूसा और हारून पर बुड़बुड़ाने लगते हैं, और कहते हैं, "आओ, हम किसी और को अपना प्रधान बना लें, और मिस्र लौट चलें।"
गिनती 14 क्या कहता है?
पर लोग नहीं सुनते। वे चिल्लाते हैं, "इनको पथरवाह करो!" ठीक उस समय परमेश्वर का तेज तम्बू में चमक उठता है। परमेश्वर मूसा से कहते हैं, "ये लोग कब तक मुझ पर विश्वास न करेंगे?"
गिनती 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
लोग यह सुनकर बहुत रोते हैं। फिर सुबह वे कहते हैं, "हमने पाप किया है, अब हम तैयार हैं!" और वे पहाड़ पर चढ़ने लगते हैं। पर मूसा चेतावनी देता है, "परमेश्वर तुम्हारे साथ नहीं हैं, मत चढ़ो!" वे फिर भी ढिठाई से चढ़ जाते हैं। दुश्मन उन पर हमला करते हैं, और वे हार जाते हैं।
बच्चे गिनती 14 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने कहा, "मेरी शपथ, सारी पृथ्वी मेरी महिमा से भर जाएगी।" यह एक वादा है जो आज भी सच हो रहा है। बाद में प्रभु यीशु मसीह आए, जो कभी नहीं डरे, जो हमेशा परमेश्वर पर भरोसा करते रहे। मूसा ने परमेश्वर से विनती की, "क्षमा कर दें," और परमेश्वर ने क्षमा किया। यीशु मसीह ने भी हमारे लिए विनती की, ताकि हमारे पाप क्षमा हो सकें।
गिनती 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम वहाँ होते, क्या तुम यहोशू और कालेब की तरह विश्वास करते, या डरे हुए लोगों की तरह रोते?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 41

कल जब परमेश्वर ने कहा "जाओ", तब वे डर गए। आज जब उसने कहा "मत जाओ", तब वे चढ़ गए। मूसा की चेतावनी सीधी है, "तुम यहोवा की आज्ञा का उल्लंघन क्यों करते हो? यह सफल न होगा।" देर से किया गया आज्ञापालन भी आज्ञापालन नहीं रहता, अगर वह हमारी शर्तों पर हो। पश्चाताप का मतलब है उसकी आवाज़ पर लौटना, न कि अपनी गलती अपने बल से सुधारना। आज वह तुझसे क्या कह रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 39

जब मूसा ने ये बातें सब इस्राएलियों को कह सुनाईं, तब वे लोग बहुत विलाप करने लगे।" ध्यान दे, ये वही लोग हैं जो एक रात पहले भी रोए थे, पर तब अविश्वास में। अब आँसू तो हैं, मगर समय बीत चुका। दुख होना और मन फिराना दो अलग बातें हैं। परिणाम पर रोना आसान है, आज्ञा मानना कठिन। तू किस बात पर रो रहा है, अपने पाप पर या उसकी कीमत पर?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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