गिनती 18
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
गिनती अध्याय 18 में परमेश्वर हारून से सीधे बात करते हैं। हारून याजक थे, यानी वह व्यक्ति जो लोगों की तरफ से परमेश्वर के सामने बलिदान चढ़ाता था। परमेश्वर कहते हैं कि पवित्रस्थान से जुड़ी हर गलती की जिम्मेदारी हारून और उनके परिवार पर होगी। यह कोई छोटी बात नहीं थी। लेवी गोत्र, जो हारून के अपने भाई-बंधु थे, उन्हें भी सेवा में मदद करनी थी, पर वे वेदी और पवित्र सामान के बहुत पास नहीं जा सकते थे। सिर्फ हारून और उसके पुत्र वेदी की सेवा कर सकते थे। यह नियम कठोर लगता है, पर परमेश्वर स्पष्ट कहते हैं कि यह इस्राएलियों की जान बचाने के लिए है, ताकि परमेश्वर का क्रोध उन पर न भड़के।
फिर परमेश्वर बताते हैं कि याजकों को अपना गुज़ारा कैसे चलना है। उनके पास खेत या जमीन का हिस्सा नहीं होगा जैसे बाकी गोत्रों के पास था। इसके बदले, लोग जो भेंट, अन्नबलि, पापबलि और पहली उपज परमेश्वर को चढ़ाएँगे, उसका एक बड़ा भाग हारून और उसके परिवार का हक़ बनेगा। पहलौठे पशु और पहली फसल भी याजकों के लिए रखे गए। परमेश्वर इसे "नमक की अटल वाचा" कहते हैं, यानी एक ऐसा वादा जो कभी नहीं टूटेगा, जैसे नमक कभी खराब नहीं होता।
लेवियों के लिए भी एक व्यवस्था बनाई गई। उन्हें इस्राएलियों की उपज का दशमांश, यानी दसवां हिस्सा मिलेगा, क्योंकि वे मिलापवाले तम्बू की सेवा करते थे। पर उस दशमांश में से भी लेवियों को अपना दशमांश परमेश्वर को और हारून को देना था। हर कोई किसी न किसी को कुछ देता था, और अंत में सब कुछ परमेश्वर की ओर लौटता था।
इसका मतलब क्या है?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर के पास आना कोई सामान्य बात नहीं थी। पवित्रस्थान परमेश्वर की उपस्थिति का स्थान था, और उसके पास लापरवाही से जाना जान जोखिम में डालना था। यह डराने के लिए नहीं लिखा गया, बल्कि यह दिखाने के लिए कि परमेश्वर पवित्र हैं और उनकी उपस्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
साथ ही यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर अपने सेवकों की परवाह करते हैं। हारून और लेवियों के पास ज़मीन नहीं थी, पर परमेश्वर खुद कहते हैं, "उनके बीच तेरा भाग और तेरा अंश मैं ही हूँ।" इससे बड़ा वादा और क्या हो सकता है? परमेश्वर खुद उनका हिस्सा बनने को तैयार हैं।
सामान्य सूत्र
यह वाचा, यह अटल वादा, हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर अपनी बातों पर टिके रहते हैं। सदियों बाद, इब्रानियों की पत्री बताती है कि यीशु मसीह हमारे महायाजक बने, पर एक फर्क के साथ, वे खुद हमारे पापों का बलिदान बन गए। हारून को हर दिन बलिदान चढ़ाना पड़ता था, पर यीशु ने एक बार, हमेशा के लिए यह काम पूरा किया। अब हमें डरते हुए दूर खड़े रहने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि यीशु के कारण हम सीधे परमेश्वर के पास जा सकते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम शायद सोचो कि यह सब बहुत पुराना और दूर का लगता है, पर सोचो, तुम्हारे जीवन में भी कुछ ऐसा है जिसे तुम गंभीरता से लेते हो या हल्के में। परमेश्वर के पास आना आज भी एक विशेषाधिकार है, न कि कोई साधारण बात। और जैसे हारून का भाग खुद परमेश्वर थे, वैसे ही तुम्हारे लिए भी परमेश्वर सबसे बड़ा खज़ाना बन सकते हैं, चाहे तुम्हारे पास कुछ हो या न हो।
चर्चा के लिए
क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर के पास जाना आज भी वैसा ही गंभीर मामला है जैसा हारून के समय था? क्यों या क्यों नहीं?
हारून के पास ज़मीन नहीं थी, पर परमेश्वर ने कहा, "मैं ही तेरा भाग हूँ।" तुम्हारे लिए परमेश्वर का इतना पास होना क्या मतलब रखता है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप पवित्र हैं और फिर भी हमें अपने पास बुलाते हैं। यीशु के कारण हम बिना डरे आपके पास आ सकते हैं। हमें सिखाइए कि आपकी उपस्थिति को हल्के में न लें, और हमारे दिल में यह विश्वास बढ़ाइए कि आप ही हमारा सबसे बड़ा हिस्सा हैं। आमीन।
गिनती 18 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गिनती 18 किस विषय में है?
गिनती 18 क्या कहता है?
गिनती 18 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे गिनती 18 से क्या सीख सकते हैं?
गिनती 18 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
लेवियों के पास न खेत था, न विरासत। जो मिला, वह भी दूसरों की भेंट से आया। फिर भी परमेश्वर कहता है, "जब तुम उसमें का उत्तम भाग उठा दो, तब उसके कारण तुमको पाप न लगेगा।" पहले उत्तम भाग, फिर बाकी सब निश्चिन्त होकर खाओ। तुम्हारी कमाई भी तब हल्की लगेगी, जब उसका पहला और सबसे अच्छा हिस्सा तुमने डरते हुए नहीं, प्रेम से लौटाया हो।
इस्राएल में जो कुछ अर्पण किया जाए वह तेरा ही ठहरे।" हारून के पास न खेत था, न ज़मीन। उसकी रोटी उस पर टिकी थी जो लोग परमेश्वर को देते थे। सोचो, जो तुम प्रभु के हाथ में सौंपते हो वह खो नहीं जाता, वह किसी सेवक की थाली बन जाता है। और अगर आज तुम्हारे पास कोई सुरक्षा नहीं, तो शायद परमेश्वर तुम्हें अपना हिस्सा बनने बुला रहा है।
लेवियों को कोई भूमि नहीं मिली। जब हर गोत्र को अपना हिस्सा मिल रहा था, तब लेवियों को कहा गया कि मिलापवाले तम्बू की सेवा ही उनका काम है, और उनके अधर्म का भार वे ही उठाएँगे। उनकी मीरास कोई खेत नहीं, बल्कि परमेश्वर स्वयं थे।
कभी सोचा है, जब सब कुछ खोने जैसा लगता है, तब शायद परमेश्वर आपको कुछ बड़ा दे रहे हों, स्वयं को। ज़मीन के टुकड़े से बड़ी मीरास क्या हो सकती है?
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