इब्रानियों 7
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
इब्रानियों अध्याय 7 में एक रहस्यमय व्यक्ति की बात होती है, जिसका नाम है मलिकिसिदक। वह शालेम का राजा था और साथ ही परमप्रधान परमेश्वर का याजक भी था। बहुत पुराने समय में, जब अब्राहम युद्ध से लौट रहे थे, तो मलिकिसिदक ने उनसे भेंट की और उन्हें आशीष दी। इसके जवाब में अब्राहम ने अपनी सारी लूट का दसवाँ हिस्सा उसे दे दिया। यह चौंकाने वाली बात है, क्योंकि अब्राहम बहुत बड़ा व्यक्ति था, परमेश्वर का चुना हुआ, फिर भी उसने मलिकिसिदक के आगे झुककर उसे कुछ दिया।
लेखक यह दिखाता है कि मलिकिसिदक बहुत खास था। बाइबल में उसके माता-पिता या परिवार की कोई जानकारी नहीं है, और न ही उसकी मृत्यु का वर्णन है। इससे वह हमेशा जीवित रहनेवाले याजक जैसा दिखता है। यहूदी लोगों में लेवी के परिवार से याजक बनते थे, और वे लोगों से दसवाँ अंश लेते थे। लेकिन मलिकिसिदक इस परिवार का नहीं था, फिर भी उसने अब्राहम से दसवाँ अंश लिया, जिससे यह पता चलता है कि वह लेवी के याजकपद से भी ऊँचा था।
फिर लेखक बताता है कि परमेश्वर ने मसीह को इसी मलिकिसिदक की रीति पर याजक ठहराया, जैसा भजन में लिखा है, "तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।" यह याजकपद पुराने नियम की व्यवस्था के अनुसार नहीं, बल्कि अविनाशी यानी कभी न मरनेवाले जीवन की सामर्थ्य के अनुसार है। पुराने याजक एक के बाद एक मरते रहे, पर यीशु सदा जीवित रहते हैं, इसलिए उनका याजकपद कभी खत्म नहीं होता।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि पुरानी व्यवस्था, यानी मूसा के द्वारा दी गई नियम-व्यवस्था, अच्छी थी, पर वह किसी को पूरी तरह परमेश्वर के पास नहीं पहुँचा सकती थी। लेखक साफ कहता है कि व्यवस्था "निर्बल" थी और "किसी बात की सिद्धि नहीं" कर सकी। पुराने याजक हर दिन बलिदान चढ़ाते रहे, पहले अपने पापों के लिए, फिर लोगों के पापों के लिए, फिर भी बात पूरी नहीं होती थी। यह बताना आसान नहीं है, पर लेखक इसे छिपाता भी नहीं। कभी-कभी हम सोचते हैं कि नियम मानने से हम परमेश्वर के करीब आ जाएंगे, पर यह अध्याय कहता है कि उससे भी बड़ी कोई बात चाहिए थी।
The Common Thread
यहाँ परमेश्वर की एक प्रतिज्ञा, यानी वादा, बहुत गहराई से दिखाई देती है। परमेश्वर ने शपथ खाकर कहा कि यीशु सदा के लिए याजक रहेंगे, और वे इस बात से "फिर न पछताएंगे।" इसी कारण यीशु "एक उत्तम वाचा का जामिन" ठहरे, यानी वे इस बेहतर वाचा की गारंटी हैं। यह वाचा एक ऐसा करार है जिसमें परमेश्वर स्वयं अपनी शपथ के साथ खड़े होते हैं। यीशु ने अपने आपको एक ही बार बलिदान चढ़ाकर पापों की बात सदा के लिए निपटा दी। और सबसे सुंदर बात यह है कि वे अभी भी जीवित हैं और हमारे लिए विनती करते रहते हैं। इसलिए वे उन सभी का "पूरा-पूरा उद्धार" कर सकते हैं जो उनके द्वारा परमेश्वर के पास आते हैं।
For You
तुम कभी-कभी सोचते होगे कि परमेश्वर के सामने अच्छे बनने के लिए तुम्हें हर नियम ठीक से मानना पड़ेगा। पर यह अध्याय तुम्हें याद दिलाता है कि तुम्हारी भलाई का बोझ यीशु ने खुद उठा लिया है। तुम्हें परमेश्वर के पास पहुँचने के लिए खुद को साबित नहीं करना, बल्कि यीशु के द्वारा आना है, जो अभी इस समय तुम्हारे लिए प्रार्थना कर रहे हैं। जब तुम गलती करते हो और डरते हो कि परमेश्वर नाराज़ होंगे, तो याद रखो, तुम्हारा याजक कभी नहीं मरता, वे हमेशा तुम्हारी तरफ से बोलते हैं।
Talk About It
अगर पुरानी व्यवस्था अच्छी थी, फिर भी वह किसी को पूरी तरह परमेश्वर के पास नहीं पहुँचा सकी, तो इससे तुम्हें क्या समझ आता है?
यीशु अभी भी तुम्हारे लिए विनती करते रहते हैं, यह जानकर तुम्हारे मन में क्या भाव आता है?
Praying Together
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप सदा जीवित रहनेवाले याजक हैं और हमारे लिए विनती करते हैं। हम खुद को साबित करने से थक जाते हैं, इसलिए हमें याद दिलाइए कि हम आपके द्वारा ही परमेश्वर के पास आ सकते हैं। आमीन।
इब्रानियों 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
इब्रानियों 7 किस विषय में है?
इब्रानियों 7 क्या कहता है?
इब्रानियों 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे इब्रानियों 7 से क्या सीख सकते हैं?
इब्रानियों 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मलिकिसिदक के समान एक और याजक" उठा, यानी वंशावली की सूची से नहीं, बल्कि उस जीवन से जो कभी मिट नहीं सकता। पुराने याजक मरते रहे, नए आते रहे, हर बार सब अधूरा छूट गया। पर तुम्हारा याजक जीवित है। जिस बोझ को तुम आज उसके सामने रख रहे हो, वह कल किसी और के हाथ में नहीं जाएगा। वही सुनता रहेगा, हमेशा।
व्यवस्था ऐसे याजक देती रही जो खुद टूटे हुए थे, अपने ही पापों के लिए बलि चढ़ाते थे, और एक दिन मर जाते थे। पर लिखा है, "उस शपथ का वचन जो व्यवस्था के बाद खाई गई, उस पुत्र को नियुक्त करता है जो युगानुयुग के लिए सिद्ध किया गया है।" सोचो, तुम्हारे लिए प्रार्थना करने वाला कभी थकता नहीं, कभी बदलता नहीं, कभी मरता नहीं। तुम्हारा नाम आज भी उसके होंठों पर है।
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